लार्ड कर्जन ने नालदेहरा में गोल्फ की शुरुआत की

सर्वप्रथम 1905 में लार्ड कर्जन ने नालदेहरा में गोल्फ खेला। 1905 में गोल्फ खेल का आरंभ जो यहां हुआ, वह आज भी अपनी चरम सीमा पर जारी है। हिमाचल प्रदेश के निर्माता डा. यशवंत सिंह परमार भी नालदेहरा में गोल्फ खेला करते थे...

गतांक से आगे ...

नगरोटा बगवां

इसकी स्थापना भागवान नाम की एक नर्तकी के द्वारा की गई और इसने एक देवालय भी बनाया। गुरुद्वारा पौड़ साहिब भी यहां स्थित है। यह गुरुद्वारा 1708 ई. में दसवें सिख गुरु गोबिंद सिंह की पवित्र याद में बनवाया गया था। इसका निर्माण मुगल और सिखों के बीच नादौन के युद्ध के बाद कराया गया, जिसमें आलफ खां को गुरु गोबिंद सिंह द्वारा हराया गया था। प्रसिद्ध कन्या देवी का मंदिर भी यहां स्थित है।

नालदेहरा

शिमला मंडी मार्ग पर स्थित शिमला से 25 किलोमीटर की दूरी पर एक रमणीय, सुंदर व शांत पर्यटक स्थल और गोल्फ खेलने के लिए शिमला में एकमात्र जगह नालदेहरा लंबे-लंबे देवदार के वृक्षों से घिरा और हरी घास में लिपटा यह एक पर्यटक स्थल पर्यटकों के लिए आकर्षक स्थल है। सर्वप्रथम 1905 में लार्ड कर्जन ने नालदेहरा में गोल्फ खेला। 1905 में गोल्फ खेल का आरंभ जो यहां हुआ, वह आज भी अपनी चरम सीमा पर जारी है। हिमाचल प्रदेश के निर्माता डा. यशवंत सिंह परमार भी नालदेहरा में गोल्फ खेला करते थे और आज यहां पर बड़े-बड़े सैन्य अधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी व प्रतिष्ठित लोगों द्वारा गोल्फ खेला जाता है। यहां पर मुख्य मार्ग के साथ एक स्थानीय देवता का मंदिर है। इसी मंदिर के आधार पर यहां का नाम नालदेहरा पड़ा। हिमाचल प्रदेश टूरिज्म विभाग ने यहां एक रेस्टोरेंट खोला है। गोल्फ को संचालित करने के लिए क्लब भी बना है, जिसमें 300 के लगभग सदस्य हैं। नालदेहरा में हर समय व हर मौसम में पर्यटक आते हैं। यह स्थान प्रदूषण से मुक्त व चहल-पहल से मुक्त शांत सुंदर एवं मनमोहक स्थल है। फिल्म निर्माता भी अपनी फिल्म की शूटिंग के लिए इस स्थान पर आते हैं। यहां स्थित गोल्फ कोर्स स्थानीय लोगों की आय का भी साधन है।

नारकंडा

नारकंडा 2274 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। इस स्थान से एक व्यक्ति आंतरिक हिमालय की बर्फानी चोटियों का श्रेष्ठ नजारा देख सकता है। नारकंडा में घने चील के जंगल इमारती लकड़ी के प्रचुर भंडार हैं। 3300 मीटर ऊंची चोटी हाटू शिखर यहां से 8 किलोमीटर दूर है।

 

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