लॉकडाउन के बाद खेलों का नया रूप,  साई होस्टल बिलासपुर के प्रभारी विजय नेगी का खुलासा; खेल मंत्रालय ने जारी की नई गाइडलाइन, चार कैटेगरी में गेम्स

 साई होस्टल बिलासपुर के प्रभारी विजय नेगी का खुलासा; खेल मंत्रालय ने जारी की नई गाइडलाइन, चार कैटेगरी में गेम्स

बिलासपुर - कोविड-19 के खतरे के मद्देनजर लगाए गए लॉकडाउन के चलते स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (साई) में बंद पड़ी खेल गतिविधियां अब नए रूप में होंगी। साई होस्टल बिलासपुर के प्रभारी विजय नेगी ने बताया कि खेल मंत्रालय भारत सरकार की ओर से स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिजर (एसओपी) के तहत नई गाइडलाइन जारी की गई है। हालांकि, खेलें कब शुरू होंगी, इस बारे कोई अधिसूचना नहीं आई है, लेकिन जब भी खेलें शुरू होंगी, उनका स्वरूप कैसा होगा, इसके लिए नई रूपरेखा तैयार की जा रही है। नई गाइडलाइन के मुताबिक सभी खेलों को चार श्रेणियों में बांटा गया है। इसमें ए श्रेणी में नॉन कांटेक्ट स्पोर्ट्स (शूटिंग, तीरंदाजी, साइकिलिंग, फेंसिंग व एथलीट) को रखा गया है, जबकि बी श्रेणी में मिनिमम व मिडियम कांटेक्ट स्पोर्ट्स (फुटबाल, हाकी, वालीबाल, बास्केटबाल व हैंडबाल) को लिया गया है। साथ ही इंडरेक्ट कांटेक्ट रेस्लिंग, लॉन टेनिस, बैडमिंटन व टेबल टेनिस को भी जोड़ा गया है। वहीं, सी श्रेणी में फुल कांटेक्ट स्पोर्ट्स (बॉक्सिंग, जूडो, वुशू, कराटे, रेस्लिंग) तथा डी श्रेणी में वाटर स्पोर्ट्स को शामिल लिया गया है। इसके अलावा मास्क, सोशल डिस्टेंसिंग सहित अन्य नियमों का पालन भी अनिवार्य किया गया है। इन नई गाइडलाइन के माध्यम से ऐसा माहौल बनाने की कोशिश की जाएगी, जिससे भविष्य में जब खेले गतिविधियां शुरू होंगी, उस समय खिलाड़ी व प्रशिक्षकों  की सुरक्षा की दृष्टि से सभी प्रबंध सुनिश्चित हो सकें।

ऑनलाइन कोचिंग

लॉकडाउन के दौरान स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (साई) व स्पोर्ट्स फेडरेशन ने खिलाडि़यों के लिए ऑनलाइन कोचिंग की व्यवस्था की है, जबकि प्रशिक्षकों के लिए ऑनलाइन एजुकेशन प्रोग्राम रखा गया है। रोहतक से पूरे देश के खिलाडि़यों को रोजाना सुबह ऑनलाइन व्यायाम करवाया जाता है, जिसे लेकर खिलाड़ी काफी उत्साहित हैं। घर में रहकर खिलाडि़यों को बहुत कुछ सीखने को मिल रहा है।

ओलंपिक ईयर में भारी

देश और दुनिया के लिए खतरा बना कोरोना वायरस ओलंपिक ईयर पर भी भारी पड़ गया है। वर्ष 2020 ओलंपिक की खेलें होनी थी, जो कोरोना के चलते अब नहीं हो पाएंगी, जिससे खिलाडि़यों का भारी नुकसान होगा, क्योंकि ओलंपिक तक पहुंचना हर खिलाड़ी का सपना होता है और यहां तक पहुंचने के लिए खिलाड़ी खूब मेहनत करता है।

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