Tuesday, June 02, 2020 11:40 AM

लॉकडाउन में ऑनलाइन शिक्षा प्रणाली

कर्म सिंह ठाकुर

लेखक सुंदरनगर से हैं

एक सर्वे के मुताबिक कोरोना वायरस से पहले करीब तीन फीसदी विद्यार्थी ही ऑनलाइन कोचिंग का सहारा लेते थे, लेकिन इस महामारी के कारण 80 फीसदी तक विद्यार्थी ऑनलाइन कोचिंग को अपना रहे हैं। स्कूल, कॉलेज या विश्वविद्यालयों ने जूम, गूगल क्लासरूम, माइक्रोसॉफ्ट टीम, स्काइप जैसे प्लेटफार्मों के साथ-साथ यूट्यूब, व्हाट्सएप आदि के माध्यम से ऑनलाइन शिक्षण का विकल्प अपनाया है, जो इस संकट-काल में एकमात्र रास्ता है। ऐसा ही एक प्रयास हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय धर्मशाला द्वारा भी किया गया...

कोरोना वैश्विक महामारी के कारण विश्व में त्राहि-त्राहि मची हुई है। आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक तथा धार्मिक गतिविधियां ठप पड़ी हुई हैं। इस महामारी से बचने का एकमात्र तरीका सोशल डिस्टेंसिंग ही है जिसके लिए भारत सरकार द्वारा पूरे भारत में लॉकडाउन लगाया गया है। किसी भी तरह से इस वायरस को फैलने से रोका जाए तथा इसकी चेन को तोड़ा जाए, ऐसे में पठन-पाठन के सभी केंद्र इस महामारी के कारण बंद करने पड़े हैं। ऑनलाइन शिक्षा से पठन-पाठन पर भारत के शिक्षाविदों में नई बहस छिड़ गई है। क्या अध्यापक की जगह ऑनलाइन शिक्षा प्लेटफार्म सर्वांगीण विकास करने में सक्षम होंगे? सूचना प्रौद्योगिकी की उपज से आज संपूर्ण विश्व ग्लोबल विलेज का रूप ले चुका है। कोरोना महामारी के बीच में शैक्षणिक गतिविधियों के संचालन का एकमात्र तरीका ऑनलाइन शिक्षा प्रणाली को अपनाना शिक्षा जगत की जरूरत बन चुका है। राष्ट्रीय ऑनलाइन शिक्षा प्लेटफार्म ‘स्वयंसिद्ध’ पर भी अनेको विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।

एक सर्वे के मुताबिक कोरोना वायरस से पहले करीब तीन फीसदी विद्यार्थी ही ऑनलाइन कोचिंग का सहारा लेते थे, लेकिन इस महामारी के कारण 80 फीसदी तक विद्यार्थी ऑनलाइन कोचिंग को अपना रहे हैं। स्कूल, कालेज या विश्वविद्यालयों ने जूम, गूगल क्लासरूम, माइक्रोसॉफ्ट टीम, स्काइप जैसे प्लेटफार्मों के साथ-साथ यूट्यूब, व्हाट्सऐप आदि के माध्यम से ऑनलाइन शिक्षण का विकल्प अपनाया है, जो इस संकट-काल में एकमात्र रास्ता है। ऐसा ही एक प्रयास हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय धर्मशाला के द्वारा कोरोना महामारी के काल में विद्यार्थियों के लिए ‘सप्तसिंधु व्याख्यानमाला-2020’ कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है जिसमें ख्याति प्राप्त अद्भुत वक्तव्य शैली के धनी प्रोफेसरों के अनुभव व ज्ञान को ऑनलाइन प्लेटफार्म के माध्यम से हिमाचल प्रदेश के विद्यार्थियों को विशेष जानकारी उपलब्ध करवाई जा रही है। यह पूरा कार्यक्रम हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर कुलदीप चंद अग्निहोत्री के दिशा-निर्देश द्वारा देहरा कैंपस में स्थापित राजनीति विज्ञान  के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर जगमीत सिंह बाबा के नेतृत्व में संचालित किया जा रहा है।  इस कार्यक्रम की शुरुआत लॉकडाउन के बीच में ऑनलाइन प्लेटफार्म के माध्यम से भारत के जाने-माने व अनुभवी प्रोफेसरों द्वारा विद्यार्थियों तथा शोधार्थियों को विभिन्न समसामयिक विषयों से अवगत करवाया जाए। इसी कड़ी में ‘प्राचीन भारत में राजनीति की परंपरा’ पर बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर कौशल किशोर मिश्र द्वारा एक मई 2020 को सारगर्भित जानकारी से करीब एक तक ज्ञानशाला का प्रवाह किया। दो मई 2020 को ‘अंत्योदय में समाज की भूमिका’ विषय पर हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय धर्मशाला के डाक्टर प्रमोद कुमार द्वारा अत्यंत महत्त्वपूर्ण जानकारी से रू-ब-रू करवाया। तीन मई 2020 को ‘आधुनिक सभ्यता के निहितार्थ और कोरोना वायरस के बाद की सभ्यता’ पर महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा के कुलपति प्रोफेसर रजनीश शुक्ला ने अपनी वक्तव्य शैली से सबको मंत्रमुग्ध कर दिया। प्राचीन इतिहास के तथ्यों का वर्तमान समस्याओं के साथ समायोजन व समीक्षा तथा कोरोना वैश्विक महामारी के बीच में भारत की सभ्यता विश्व के लिए किस तरह से कल्याणकारी साबित हो सकती है, बहुत ही सारगर्भित भविष्योनमुखी विजन पर आधारित जानकारी उपलब्ध करवाई गई। इसी कड़ी में आगे ‘भारत के उत्तर-पूर्वांचल में सीमा पार आतंकवाद की उत्पत्ति और फैलाव’ विषय पर प्रोफेसर नारायण सिंह राव ने विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया।

‘कोविड-19 महामारी के काल में परीक्षा और शिक्षा’ विषय पर हिमाचल प्रदेश शिक्षा बोर्ड के चेयरमैन डा. सुरेश कुमार सोनी ने अनेको महत्त्वपूर्ण पठन-पाठन की समसामयिक जानकारियां इस सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर प्रेषित की। 10 मई 2020 को एक बार पुनः महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा के कुलपति प्रो. रजनीश शुक्ला ने ‘एकात्म मानव दर्शन ः अंतिम उपाय’ विषय पर एक घंटे तक अनेको जीवन परिवर्तन करने वाली जानकारियां उपलब्ध करवाईं। इतने ज्ञानवान और ऊर्जावान वक्ता को सुनने का अवसर प्राप्त होना पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए लॉकडाउन के समय काल का गोल्डन पीरियड माना जा सकता है। इन सभी उपरोक्त प्रोफेसरों के पास 30 से 40 वर्ष तक पठन-पाठन का अनुभव है। इन प्रोफेसरों से ज्ञानवर्धन करने के लिए भारत के बड़े-बड़े विश्वविद्यालयों में अभ्यर्थी बनकर तालीम ग्रहण करने का अवसर मिलता है। यदि किसी ज्ञानवान अनुभवी का मार्गदर्शन व आशीर्वाद प्राप्त हो जाए तो विद्यार्थियों का जीवन तबाह होने से बच जाता है। लेकिन उच्च शिक्षा के शैक्षणिक संस्थानों की कमी होने के कारण यह संभव नहीं हो पाता। ऐसे में ऑनलाइन शिक्षा प्लेटफार्म उच्च शिक्षा से वंचित विद्यार्थियों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।