Thursday, December 03, 2020 12:49 AM

लॉकडाउन में सब्जियों के रेट धड़ाम

किसानों को मेहनत बेकार, अब सेब की सताने लगी टेंशन

पतलीकूहल-जैसे-जैसे लॉकडाउन की समयावधि बढ़ रही है उसी के सदृश कोरोना पॉजिटिव की संख्या में भी बढ़ोतरी हो रही है, जो कि चिंताजनक है।  वहीं, घाटी में इस समय तैयार सब्जियों के दाम भी इतने गिर गए हैं कि किसान बीज के दाम भी लेने में समर्थ नहीं हो रहा है। गांव मेहा के किसान लाल चंद ने बताया कि उसने अपने खेतों में फुलगोभी लगाई है। जब उसे सब्जी मंडी में बेचने गया तो वहां पर उसे प्रति किलो छह रुपए दाम मिला, जबकि फू लगोभी को सब्जी मंडी तक पहुंचाने में ही प्रति किलो दस रुपए खर्च हो गए। यदि इसी तरह से किसानों को अपनी ऊपज का दाम मिलते रहे तो किसान किस तरह से अपने परिवार का भरणपोषण कर सकेंगे। सब्जियों के दाम को देखते हुए लोग इस वर्ष सेब के दाम को लेकर भी असमंजस की स्थिति में हैं। बागबानों का कहना है कि पहली जुलाई से मार्केट में अरली बैरायटी का सेब पहुंचना शुरू हो जाता है। मगर इस वर्ष मार्च महीने के अंतिम सप्ताह से कोरोना वायरस के चलते जिस तरह से देश में लॉकडाउन व कर्फ्यू लगा है, उससे बागबानों ने इस वर्ष सेब  को बीमारियों से फसल को सुरक्षित रखने के लिए स्प्रे पर ध्यान नहीं दिया है। बागबान अभी भी सेब के बागानों में सड़ने को लेकर चिंता में हैं। बतातें चले कि इस बार पूरे विश्व में कोरोना के फैलने के कारण नेपाल से मजदूर नहीं आएंगे, जिससे घाटी में सब्जी मंडियों तक सेब को पहुंचाने के लिए उन्हीं के कंधे का सहारा रहता था मगर इस बार मजदूरों की कमी के कारण बागबान परेशान हैं। घाटी के बागबानों का प्रदेश सरकार से आग्रह है कि उनकी फसल को बेचने के पहले ही ऐसे प्लेटफार्म को सुदृढ़ किया जाए, ताकि बागबानों को दोहरी मार से बचाया जा सके।