Friday, December 13, 2019 07:13 PM

वाईएफसी पंडोगा फुटबाल चैंपियन

चुरुड़ू उपमंडल अंब के तहत चुरुड़ू स्कूल मैदान में चल रहे हैडमास्टर ठाकुर राजिंद्र सिंह मेमोरियल टूर्नामेंट में फाइनल मैच में वाईएफसी पंडोगा ने लायंस क्लब पंडोगा को हराकर खिताब अपने नाम किया। इससे पहले फाइनल के लिए क्वार्टर फाइनल में टीमों में काफी रोमांच मैच हुए, जिसमे फुटबाल खेल प्रेमियों ने उनका लुफ्त उठाया। वहीं, टूर्नामेंट में स्थानीय लोगों के साथ-साथ आसपास के इलाकों से भी काफी संख्या में दर्शक पहुंचे। फाइनल मैच के दिन बीडीसी अंब चेयरमैन सतीश शर्मा मुख्यातिथि के रूप में पधारे। जिन्होंने फाइनल मैच से पहले दोनों टीमों के खिलाडि़यों से परिचय किया। इसके बाद फाइनल मैच का शुभारंभ किया गया। फाइनल में दोनों टीमों की तरफ से काफी अच्छा खेल का प्रदर्शन किया गया। इसमें वाईएफसी पंडोगा टीम द्वारा बेहतरीन खेल का प्रदर्शन करते हुए लायंस क्लब पंडोगा टीम को 2-0 से हराकर खिताब पर कब्जा किया। इस अवसर पर मुख्यातिथि ने युवाओं को नशे न करने की और खेलो में ज्यादा रुचि लेने के लिए प्रेरित किया। वहीं, फाइनल में विजेता और उपविजेता रही टीमों को नकद इनाम के साथ यूनिफॉर्म किट और ट्रॉफी के साथ सम्मानित किया तथा पूरे टूर्नामेंट में अपना योगदान देने लिए मैच रैफरी, कमेंटेटर आदि अन्य को भी भेंट स्वरूप स्मृति चिन्ह दिए गए। इस अवसर पर कमेटी सदस्यों में पन्ना लाल, अरुण कुमार, संदीप ठाकुर, ऋषि, चनन सिंह, शम्मी, रविंद्र,र ाकेश कुमार, नरेंद्र पुनर, विनोद कुमार, संजय डोगरा, दीपक ठाकुर, नवनीत सिंह, जगपाल सिंह, सुरेश मान, कुलजीत सिंह, ओंकार सिंह प्रधान चुरुड़ू सुरेश कुमारी, उपप्रधान रामस्वरूप, विजय कुमार आदि गणमान्य उपस्तिथ रहे। वहीं, चुरुड़ू स्कूल के मैदान में करवाए जाने वाले वार्षिक फुटबाल टूर्नामेंट को ठाकुर राजिंद्र सिंह की याद में करवाया जाता है। बता दंे कि राजिंद्र सिंह का अपने जीवनकाल में खेलों के प्रति विशेष लगाव रहा था, वह खुद एक वालीबाल के बेहतरीन खिलाड़ी रहे तथा विशेषतया फुटबाल, वालीबाल, एथलेटिक में रुचि रही। उनका जन्म ऊना की बंगाणा तहसील के पंजोड़ा गांव में हुआ। वहीं, प्रारंभिक शिक्षा स्थानीय स्कूल में करने के बाद स्नातक ऊना महाविद्यालय में करके बीएड जम्मू कश्मीर में पूर्ण की। इसके बाद चुरुड़ू के पब्लिक स्कूल में सेवाएं शुरू की। खेलों के प्रति विशेष रुचि होने के कारण स्कूल के विद्यार्थियों को भी अपने खाली समय में खेलों की बारीकियां सिखाते रहते थे। वहीं, अपने भीतर के हुनर से उन्होंने स्कूल में से कई नेशनल स्तर के खिलाड़ी तैयार किए। वहीं, ठाकुर राजिंद्र सिंह का देहांत वर्ष 2011 में हृदयाघात होने से हुआ। इसके बाद उनकी खेलों की प्रति समर्पण को श्रद्धांजलि स्वरूप वार्षिक फुटबाल टूर्नामेंट का आयोजन किया जाता है।