Monday, January 20, 2020 03:28 PM

वायु सेना में ‘अपाचे’

कर्नल मनीष धीमान

स्वतंत्र लेखक

इसी सप्ताह तीन सितंबर को भारतीय वायु सेना में दुनिया के सर्वश्रेष्ठ लड़ाकू हेलीकॉप्टर ए एच 64 डव्ल्यू अपाचे को कमीशन किया गया। अपाचे की काबिलीयत का अंदाजा उसके अभी तक के ट्रैक रिकार्ड से लगाया जा सकता है। यह एक ऐसा लड़ाकू हेलीकॉप्टर है जो रात को दुश्मन के राडार को धोखा देते हुए फारवर्ड लाइन ऑफ  ट्रूप (द्घद्यशह्ल) एरिया तक आसानी से जा सकता है। इसके अल्ट्रा हाई फ्रिकवेंसी (ह्वद्धद्घ) रेडियो कम्युनिकेशन सिस्टम की वजह से इंटर सर्विसेज कोआर्डिनेशन आसानी से स्थापित हो सकता है, जिससे थल सेना और वायु सेना के ज्वाइंट आपरेशन में भी  यह अहम भूमिका निभा सकता है। आने वाले समय में यह लड़ाकू हेलीकॉप्टर सर्जिकल स्ट्राइक जैसे कावट आपरेशन में थल सेना के साथ मिलकर तथा युद्ध में भी दुश्मन के एरिया में जाकर उसके सेकंड टियर के ऑप्सटिकल या डिफेंस को बर्बाद करने में काफी मददगार साबित होगा। आज के हालात में हमारे पड़ोसी मुल्क चीन और पाकिस्तान हमारी  अंतरराष्ट्रीय सीमा पर जिस तरह आए दिन कोई न कोई मसला खड़ा कर रहे हैं, उसे देखते हुए हवा में उड़ने वाला टैंक के नाम से मशहूर अमरीकी अपाचे सही वक्त पर भारतीय सेना का हिस्सा बना है। अपाचे हेलीकॉप्टर की जब से कमिश्निंग हुई है  इसने तब से अलग-अलग मोर्चों, सिचुएशन एवं कंडिशन में दुनियाभर में अपना लोहा मनवाया है, चाहे वह पनामा कनफ्लिक्ट हो या कुवैत पर इराक के आक्रमण के बाद, अफगानिस्तान  में तालिबान  के खिलाफ  या फिर इजराइल का लेबनान और गाजा पट्टी पर अपाचे का इस्तेमाल, हर जगह अपाचे ने अपनी काबिलीयत का डंका बजवाया है। आज  कश्मीर से अनुच्छेद 370 के खत्म करने पर जिस तरह से पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर जगह-जगह अपनी बौखलाहट दिखा रहा है और कहीं से भी कोई सहारा न मिलने पर उनके मंत्री और सेना अधिकारी अलूल-जलूल बयानबाजी कर रहे हैं, उनके लिए यह एक बहुत बड़ा संदेश है कि भारत ने अटारी बार्डर लाहौर से सिर्फ 150 किलोमीटर दूर पठानकोट में अपाचे को रखकर अपनी मंशा जाहिर कर दी है। अपाचे की पठानकोट में तैनाती पाकिस्तान को साफ संदेश है कि अगर उसने भारत के साथ अपने व्यवहार में थोड़ी सी भी 19-21 करने की कोशिश की तो अंजाम खतरनाक और  उसकी बर्दाश्त के बाहर होगा।