Sunday, November 17, 2019 03:52 PM

वायु सेना में ‘रफाल’

कर्नल मनीष धीमान

स्वतंत्र लेखक

वायु सेना दिवस आठ अक्तूबर को पेरिस में भारतीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने नींबू, मिर्ची का टोटका कर पहला रफाल लड़ाकू विमान ग्रहण किया। ‘रफाल’ एक फ्रांसीसी कंपनी ने बनाया है जिसका अंग्रेजी में मतलब ‘गस्ट आफ  विंड’ तथा हिंदी में ‘हवा का झोंका’ या वायु सा वेग ! मीडियम मल्टीरोल काम्बैट एयरक्राफ्ट ‘एमएमआरसीए’ की श्रेणी में आने वाले रफाल विमान को पहली बार 2006 में फ्रांस की एयरफोर्स और नेवी में कमीशन किया गया था। पिछले 13 सालों में रफाल ने अफगानिस्तान में अनगिनत काम्बैट मिशंस,  लिबिया के त्रिपोली एवं वेंगाजी आदि जगहों पर अपनी काबिलीयत को बखूबी प्रमाणित किया है। वर्तमान में ये लड़ाकू विमान ‘सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक’ तथा इराक में चल रहे पीस कीपिंग मिशन के लिए इस्तेमाल में लाया जा रहा है। भारत में वायु सेना की जरूरत को देखते हुए अगस्त 2007 में उस वक्त के रक्षा मंत्री एके एंटनी ने 126 रफाल विमान खरीदने पर सहमति बनाई थी, जिसमें 18 फ्लाई अवे कंडीशन में तथा बचे हुए विमानों को ट्रांसपोर्ट आफ टेक्नोलाजी के आधार पर हिंदुस्तान एयरोनाटिक्स ने बनाना था। 2012 में शुरू हुई नेगोसिएशन के निष्कर्ष पर 126 जेट खरीदने के प्लान को कम कर सिर्फ  36 विमान और सभी फ्लाई अवे कंडीशन में ही खरीदने पर सहमति बनी। पिछले साल रफाल विमान की नेगोसिएशन प्रोसेस एवं कीमत पर लगभग सभी विपक्षी राजनीतिक दलों ने संशय व शक जताया था और इसके चलते पिछले लोकसभा चुनावों में यह एक मुद्दा बनकर उभरा था, पर जैसे चुनाव खत्म हुए, सभी अग्रणी अखबार, मीडिया हाउस तथा राजनीतिक पार्टियां भी चुप्पी साध कर बैठ गईं। रफाल विमान के सौदे में अहम भूमिका निभाने वाले वर्तमान में वायु सेना अध्यक्ष आरकेएस भदोरिया के नाम पर पहले रफाल का नंबर ‘आरबी-01’ दिया गया है। 36 रफाल विमान की कीमत करीब 58,000 करोड़ की बताई जा रही है। इस उम्दा लड़ाकू विमान के भारतीय वायु सेना में शामिल होने से भारतीय सेना को एक बड़ी ताकत मिलेगी। रफाल विमान का एक स्क्वाड्रन अंबाला एयरबेस, पाकिस्तान सीमा से मात्र 220 किलोमीटर की दूरी पर स्थापित किया जाएगा। अंबाला रणनीति के हिसाब से एक  महत्त्वपूर्ण स्ट्रैटजिक लोकेशन है, जहां से हम पाकिस्तान को उसकी हर गतिविधि के लिए बालाकोट जैसा जवाब देने में बिना समय खोए सक्षम रहेंगे? दूसरा स्क्वाड्रन ‘हासीमारा’ वेस्ट बंगाल में स्थापित किया जाएगा, जो कि हमारे उत्तरी-पूर्वी सीमा के साथ सटे देशों पर नजर रखने एवं जरूरत पड़ने पर उचित जवाब देने के लिए तैयार रहेगा। अभी तक भारतीय सीमा की सुरक्षा का जिम्मा ‘मिराज 2000’ जो  बालाकोट स्ट्राइक में इस्तेमाल किया गया था, के साथ-साथ मिग 29, सुखोई तथा तेजस लड़ाकू विमानों पर था। निश्चित ही रफाल भारतीय सेना की मजबूती की तरफ  बढ़ाया गया एक कारगार कदम है।