Tuesday, January 21, 2020 11:24 AM

विदेशी तकनीक से तलाशेंगे रेल टनल

बिलासपुर-लेह प्रोजेक्ट के लिए मनाली में इलेक्ट्रो मैग्नेटिक एंटीना से हो रहा तीन सुरंगों का भू-गर्भीय सर्वेक्षण

भुंतर - केंद्र सरकार के प्रस्तावित महत्त्वाकांक्षी बिलासपुर-लेह रेललाइन प्रोजेक्ट में मनाली से लेह तक टनल की संभावना तलाशने के लिए विदेशी तकनीकों का सहारा लिया गया है। इलेक्ट्रो मेग्नेटिक एंटीना की मदद से क्षेत्र में बनने वाली तीन सुरंगों का भू-गर्भीय सर्वेक्षण किया जा रहा है। राष्ट्रीय राजमार्ग एवं अवसंरचना विकास निगम द्वारा भारतीय वायुसेना व एयरपोर्ट अथॉरिटी के सहयोग से यह कार्य पूरा किया जा रहा है, जिसकी प्रक्रिया करीब दस दिन तक चलेगी। लिहाजा, कुल्लू, लाहुल-स्पीति सहित लेह-लद्दाख के सपनों की रेललाइन धरातल पर उतरने लगी है, तो इसकी खातिर देश में पहली बार विदेशी तकनीक का सहयोग लिया गया है। भुंतर स्थित कुल्लू मनाली एयरपोर्ट के निदेशक ने मंगलवार को भू-गर्भीय सर्वेक्षण के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उन्होंने बताया कि तीन दिन तक इंडियन एयरफोर्स के हेलिकाप्टर के सहयोग से एनएचआईडीसीएल द्वारा एयरबांड इलेक्ट्रो मेग्नेटिक एंटीना के माध्यम से मनाली से लेह तक का भू-गर्भीय सर्वेक्षण का सफल ट्रायल किया गया और यहां टनल बनाने की संभावनाओं की मैपिंग की गई। तीन दिन तक एयरपोर्ट की टीम ने भी इसमें पूरा सहयोग किया। एंटीना की मदद से जमीन के अंदर की मिट्टी, पानी और अन्य परिस्थितियों का डाटा स्कैन किया गया है, जिसका अध्ययन कर इसकी रिपोर्ट तैयार होगी। उच्चाधिकारियों के अनुसार मनाली से लेह तक का अधिकतर क्षेत्र बर्फ से ढका रहता है और ऐसे में यहां की पहाडि़यों पर टनल से पानी का रिसाव बड़ी चुनौती बन सकती है। केंद्र सरकार ने इसी के तहत विशेष तकनीकों का इस्तेमाल किया है। बहरहाल, बिलासपुर-लेह रेललाइन की टनलों के सर्वेक्षण को पहली बार विदेशी तकनीक अपनाई गई है।

रोहतांग टनल के नाले से मिला सबक

वरिष्ठ अधिकारियों की मानें तो रोहतांग टनल के भीतर निकले नाले ने केंद्र सरकार को सबक सिखाया है। इस नाले के कारण रोहतांग प्रोजेक्ट के पूरा होने का समय आगे खिसका है, तो नए स्तर पर मेहनत भी करनी पड़ी है। इसी से बचने के लिए सरकार ने हाई-प्रोफाइल तकनीक से भू-गर्भीय सर्वेक्षण किया है। रेललाइन के लिए केंद्र सरकार ने बिलासपुर से मनाली तक सर्वेक्षण भी पूरा किया है और जहां से रेल गुजरनी है, उन स्थानों पर पक्की बुर्जियां भी लगा दी हैं।