Friday, December 13, 2019 07:17 PM

विदेशों तक पहुंच रही पांवटा के गुड़ की महक

पांवटा साहिब में करीब 15 गुड़ क्रशरों में हर साल बनता है हजारों क्विंटल गुड़; बाहरी राज्यों से आते हैं कारीगर, हर दिन 600 क्विंटल का उत्पादन

पांवटा साहिब -पांवटा साहिब के दून क्षेत्र के गन्ने की मिठास से तो पूरा देश वाकिफ है ही, लेकिन यहां के गन्ने से बनने वाले गुड़ की महक भी सात समंदर पार तक जाती है। पांवटा साहिब के शिवपुर व हरिपुर टोहाना आदि क्षेत्रों के गुड़ क्रशरों में बनने वाला गुड़ अपनी महक कनाडा समेत विदेशों में बिखेर रहा है। यहां से हर साल देश के कई हिस्सों में तो गुड़ जाता ही है। साथ ही कनाडा में ज्यादातर बसे भारतीय इस गुड़ का स्वाद चखते हैं। जानकारी के मुताबिक पांवटा साहिब में हर साल अक्तूबर माह से गुड़ के क्रशर कार्य करना शुरू कर देते हैं। दिसंबर माह तक जब तक उत्तराखंड की डोईयोवाला स्थित शुगर मिल कार्य करना शुरू नहीं कर देती तब तक करीब तीन माह यहां पर किसान अपना गन्ना इन क्रशरों पर डालते हैं। इस बार भी अक्तूबर माह में दिवाली से ही यहां पर गुड़ की महक आनी शुरू हो गई है। जानकारी के मुताबिक प्रदेश के पड़ोसी राज्यों पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और उत्तराखंड में तो यहां के गुड़ की सप्लाई जाती ही है। साथ ही विदेशों से पांवटा साहिब के प्रसिद्ध गुरुद्वारे मंे माथा टेकने आने वाले सिख श्रद्धालु इस गुड़ की महक को अपने साथ कनाडा आदि स्थानों पर ले जाते हैं। जानकारी के मुताबिक कनाडा मंे रहने वाले सिख समुदाय के लोगों की पांवटा साहिब में काफी रिश्तेदारी भी है। कई परिवार हर साल गुरुद्वारा साहिब में शीश नवाने जरूर आते हैं और यहां के शिवपुर और हरिपुर टोहाना से ताजा गुड़ खरीदकर अपने साथ विदेश ले जाते हैं। जानकारी के मुताबिक इस समय पांवटा साहिब मंे एक दर्जन से अधिक गुड़ क्रशर कार्य कर रहे हैं। इसमें शिवपुर और हरिपुर टोहाना समेत काहनूवाला, निहालगढ़ और माजरा क्षेत्र के टोकियों आदि स्थान शामिल हैं, जिनमें हर दिन करीब 600 क्विंटल तक गुड़ बनता है। यहां पर गुड़ बनाने वाले ज्यादातर कारीगर बाहरी राज्यों से आते हैं। यह उत्तर प्रदेश और हरियाणा से आते हैं। फरवरी अंत तक गन्ना खत्म होने तक यह गुड़ क्रशर संचालित रहते हैं। यहां पर दो किलो की भेल्ली के साथ-साथ छोटे-छोटे टुकड़ों में भी गुड़ निर्माण किया जाता है। इसके साथ ही यहां शक्कर भी बनाई जाती है।

एक क्विंटल गन्ने से बनता है 13 किलो गुड़

जानकार बताते हैं कि एक क्विंटल गन्ने से करीब 12 से 13 किलो गुड़ बन जाता है। एक क्विंटल गन्ना जहां 320 रुपए तक पड़ता है, वहीं गुड़ 40 से 45 रुपए प्रतिकिलो तक बेचा जाता है। शिवपुर में गुड़ क्रशर संचालक बताते हैं कि हालांकि इसमंे मेहनत के मुताबिक ज्यादा फायदा नहीं है, लेकिन यह उनका पुश्तैनी कार्य है इसलिए कर रहे हैं। गुड़ निकालने के बाद बची हुई शक्कर से उनको थोड़ा सा लाभ हो जाता है। मिल से ज्यादा खपत होती है क्रशर में  जानकारी के मुताबिक पांवटा संे जितना गन्ना उत्तराखंड की शुगर मिल में जाता है उससे करीब तीन गुणा गन्ना गुड़ क्रशरों में पहुंचता है। हालांकि इसका कोई रिकॉर्ड नहीं रहता है। गुड़ बनाने की चरखियां अक्तूबर माह से ही शुरू हो जाती है, जबकि मिल दिसंबर माह तक शुरू होती है। इन तीन महीनों में करीब दो से अढ़ाई लाख क्विंटल गन्ना क्रशरों में खप जाता है। एक-एक क्रशर में हर दिन करीब 40 से 45 क्विंटल गुड़ बनता है। हालांकि मिल खुलने के बाद क्रशरों में गन्ने की पहुंच कम हो जाती है, लेकिन क्रशरों मंे गन्ना पहले से ही स्टॉक हो जाता है।