Thursday, April 18, 2019 06:03 PM

विदेशों से धन बरसाते भारतीय

डा. जयंतीलाल भंडारी

विख्यात अर्थशास्त्री

हाल ही में नौ अप्रैल को जारी विश्व बैंक की ‘माइग्रेशन एंड डेवलपमेंट ब्रीफ’ रिपोर्ट के मुताबिक विदेश से अपने देश में धन भेजने के मामले में भारतीय प्रवासी एक बार फिर सबसे आगे रहे हैं। 2018 में प्रवासी भारतीयों ने 79 अरब डालर (करीब 5.5 लाख करोड़ रुपए) की राशि स्वदेश भेजी है। भारत के बाद चीन का नंबर आता है। चीन में प्रवासी चीनियों द्वारा 67 अरब डालर भेजे गए हैं। रिपोर्ट बताती है कि पिछले तीन वर्ष में विदेश से भारत को भेजे गए धन में महत्त्वपूर्ण वृद्धि हुई है। यह 2016 में 62.7 अरब डालर से बढ़कर 2017 में 65.3 अरब डालर हो गया तथा 2018 में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है, जो पूर्ववर्ती वर्ष की तुलना में 14 फीसदी अधिक है। दुनिया भर के देशों में उनके प्रवासियों द्वारा भेजा जाने वाला धन 2018 में 689 अरब डालर के स्तर पर पहुंच गया है। यह बात महत्त्वपूर्ण है कि प्रवासियों द्वारा भारत भेजी गई 40 फीसदी धनराशि ग्रामीण क्षेत्रों में भेजी गई है, जिसका एक बड़ा हिस्सा स्वास्थ्य सेवा, बेहतर शिक्षा और जीवन स्तर बढ़ाने में खर्च किया गया है। यह भी महत्त्वपूर्ण है कि पिछले वर्ष 2018 में जब भारतीय अर्थव्यवस्था प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करती रही, अमरीका और चीन के बीच बढ़ते तनाव तथा यूरोप में मंदी के कारण दुनिया के विभिन्न देशों में विकास दर कम रही और कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से भी विभिन्न देशों की मुश्किलें बढ़ीं। ऐसी आर्थिक चुनौतियों के बीच भी भारतीय प्रवासियों ने भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देने और भारत के घटते हुए विदेशी मुद्रा कोष में संचय बढ़ाने के लिए अपनी कमाई हुई विदेशी मुद्रा को स्वदेश भेजा। वर्ष 2018 में देश का राजकोषीय घाटा और वित्तीय घाटा बढ़ गया है। इसमें कोई दोमत नहीं कि प्रवासी भारतीय भारत की महान पूंजी हैं। दुनिया के 200 देशों में रह रहे करीब तीन करोड़ से अधिक प्रवासी भारतीय विभिन्न देशों में अपनी अहम भूमिका निभा रहे हैं। एक ओर विदेशों में रह रहे भारतीय कारोबारियों, वैज्ञानिकों, तकनीकी विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और उद्योगपतियों की प्रभावी भूमिका  विभिन्न देशों की अर्थव्यवस्थाओं में सराही जा रही है, वहीं दूसरी ओर कम कुशल व कम शिक्षित प्रवासी कामगार भी खाड़ी देशों सहित कई देशों में विकास के सहभागी बन गए हैं। ऐसे में भारत को भी प्रवासी भारतीयों की समस्याओं पर अधिक ध्यान देना होगा। वस्तुतः दुनिया के सारे प्रवासी भारतीय बहुत धनी नहीं हैं। अधिकांश देशों में इनकी आर्थिक हालत बहुत अच्छी नहीं है। खास तौर से विभिन्न खाड़ी देशों में लाखों कुशल-अकुशल भारतीय श्रमिक इस बात से त्रस्त हैं कि वहां पर इन्हें न्यूनतम वेतन और जीवन के लिए जरूरी उपयुक्त सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। विश्व विख्यात एनजीओ कॉमन वेल्थ ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव ने खाड़ी देशों में कार्यरत भारतीय कामगारों की मुश्किलों और विपरीत परिस्थितियों में काम करने संबंधी जो रिपोर्ट प्रस्तुत की है, वह बेहद चिंताजनक है। रिपोर्ट के अनुसार खाड़ी देशों में 2012 से 2018 के मध्य तक बहरीन, ओमान, कतर, कुवैत, सऊदी अरब व संयुक्त अरब अमीरात में औसतन प्रतिदिन 10 भारतीय कामगार प्रतिकूल और अस्वास्थ्यपूर्ण परिस्थितियों में काम करने के कारण मौत के शिकार हुए हैं। इसी तरह कई विकसित देशों में प्रवासी भारतीयों के लिए वीजा कानूनों में कठोरता के कारण मुश्किलें बढ़ गई हैं। यदि हम चाहते हैं कि प्रवासी भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में अपनी सहभागिता बढ़ाएं, तो हमें भी प्रवासियों के प्रति सांस्कृतिक सहयोग और स्नेह बढ़ाना होगा। हमें प्रवासियों से अधिक विदेशी मुद्रा अपेक्षाओं के साथ-साथ उनकी विभिन्न समस्याओं के निराकरण में भी अहम भूमिका निभानी होगी। जिस तरह चीन प्रवासी चीनियों के हितों की रक्षा करता है, उसी तरह भारत को भारतीय प्रवासियों के हितों की रक्षा के लिए आगे आना चाहिए। हमें प्रवासियों की मुश्किलों से संबंधित आर्थिक-सामाजिक मुद्दे मजबूती से उठाने चाहिएं। विकसित देशों में प्रवासियों की वीजा संबंधी मुश्किलों को कम करने में भी मदद करनी होगी। खास तौर से भारत को खाड़ी देशों से बातचीत कर कामगारों की बेहतरी के लिए तुरंत पहल करनी चाहिए। चूंकि विदेशों से आ रही कमाई का करीब आधा भाग केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु और आंध्रप्रदेश प्रवासियों से संबंधित है और इन प्रदेशों में कामगारों की कुशलता और कौशल-प्रशिक्षण पर ध्यान दिया जाता है, वैसे ही देश के अन्य प्रदेश भी यदि कौशल-प्रशिक्षण पर ध्यान देंगे, तो कुशल कामगार तैयार होंगे, जो विदेशों में अधिक कमाई कर सकेंगे। भारत द्वारा विदेशों में रोजगार की प्रक्रियाओं को सरल व पारदर्शी बनाने पर जोर देना होगा, ताकि भारतीय कामगारों को बेईमान बिचौलियों और शोषक रोजगारदाताओं से बचाया जा सके। प्रवासियों की बेहतरी की हरसंभव कोशिश करनी होगी। हम आशा करें कि आने वाले समय में भारत को विकसित देश बनाने में प्रवासियों की भूमिका महत्त्वपूर्ण होगी। जिस तरह प्रवासी चीनियों ने दुनिया के कोने-कोने से कमाई हुई अपनी विदेशी मुद्रा चीन में लगाकर चीन की तकदीर हमेशा के लिए बदल डाली है, उसी प्रकार से भारत की तकदीर बदलने में प्रवासी भारतीयों द्वारा और अधिक कारगर सहयोग अपेक्षित किया जा रहा है।