Tuesday, May 21, 2019 07:10 AM

विभागों को न दें जंगल की भूमि

कांगणी के लोगों-विचार मंच ने उपायुक्त को ज्ञापन सौंप उठाई मांग

मंडी -डीपीएफ  कांगणी जंगल को बचाने के लिए महामहिम राष्ट्रपति से मांग की गई है। शहीद भगत सिंह विचार मंच तथा मंडी शहरवासियों ने इस जंगल की भूमि को परिवर्तित करके किसी भी विभाग को देने पर पूर्णतया रोक लगाने की मांग की है। शहीद भगत सिंह विचार मंच तथा स्थानीय वासियों का कहना है कि मंडी शहर से सटे हुए दो डीपीएफ  जंगल कांगणी और गंधर्व स्थित हैं। सरकार की ओर से पिछले कुछ वर्षों से इन जंगलों की डीपीएफ भूमि को पर्यावरण, वन, एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारत सरकार से अनुमति लेकर विभिन्न निर्माण कार्य करवाए जा रहे हैं। डीपीएफ कांगणी करीब 148 हैक्टेयर में फैला हुआ है। सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई सूचना में पता चला है कि साल 2002 से इस जंगल की भूमि को अन्य विभागों को परिवर्तित करने का सिलसिला शुरू हुआ, जब सरकार के विभाग एग्रीकल्चर प्रोड्यूस मार्केट कमेटी की ओर से यहां पर करीब 0.70 हेक्टेयर भूमि पर मार्केट यार्ड बनाया गया। साल 2014 में फू ड कारपोरेशन आफ इंडिया का गोदाम बनाने के लिए 0.90 हेक्टेयर भूमि इसमें से उन्हें दे दी गई। फिर साल 2016 में आर्ट कल्चर एंड लैंग्वेज विभाग को 0.323 हेक्टेयर भूमि संस्कृति सदन बनाने के लिए दी गई। साल 2017 में इसी जंगल की 6.31 हेक्टेयर भूमि लिफ्ट वाटर सप्लाई स्कीम ऊहल से मंडी शहर के लिए सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग को परिवर्तित कर दी गई। साल 2019 में करीब 2.5888 हेक्टेयर डीपीएफ  कांगणी की वन भूमि प्रदेश सरकार टूरिज्म एवं सिविल एविएशन विभाग को हेलिपोर्ट और सांस्कृतिक केंद्र बनाने के लिए दे दी गई। इसके अलावा कुछ अन्य विभाग इस जंगल की भूमि को अपने नाम करवाने के लिए अनुमतियों का इंतजार कर रहे हैं।  मंच का कहना है कि भारत सरकार द्वारा मौके का निरीक्षण किए बगैर सरकारी विभागों के पक्ष में जंगल की भूमि परिवर्तित करने की अनुमतियां दी जा रही हैं। जंगल को बचाने के लिए यह अनुमतियां न दी जाएं। इस बाबत मंच ने उपायुक्त को एक ज्ञापन भी सौंपा है।