Monday, April 06, 2020 04:16 PM

विवाद से परे है ईश्वर का अस्तित्व

26 जून 1971 के बंबई से छपने वाले नवभारत टाइम्स में एक समाचार में बताया गया है कि सिवनी जिले के हरई ग्राम में मल्लू नामक एक ग्वाला अपनी गायें चरा रहा था, तभी उस पर एक शेर ने आक्रमण कर दिया, जबकि उसके साथी भयभीत होकर भाग खड़े हुए, उसकी दो गायों ने शेर पर हमला कर दिया। सींगों की चपेट न सहन कर पाने के कारण शेर भाग खड़ा हुआ और इस तरह गायों ने अपने मालिक मल्लू की रक्षा कर ली...

-गतांक से आगे...

कबूतर तो एक अनाक्रमणकारी पक्षी है, उन्होंने भी तब अपने मालिक की रक्षा के लिए उन अधिकारियों पर बार-बार आक्रमण कर विलक्षण दृश्य प्रस्तुत कर दिया। इतने समय तक जब तक वह शव वहां से हटा नहीं दिया गया, कबूतर भूखे-प्यासे पहरेदारी करते रहे, अपने स्थान से टस से मस न हुए। 26 जून 1971 के बंबई  से छपने वाले नवभारत  टाइम्स में एक समाचार में बताया गया है कि सिवनी  जिले के हरई ग्राम में  मल्लू नामक एक ग्वाला  अपनी गायें चरा रहा था,  तभी उस पर एक शेर ने आक्रमण कर दिया, जबकि उसके साथी भयभीत होकर भाग खड़े हुए, उसकी दो गायों ने शेर पर हमला कर दिया।  सींगों की चपेट न सहन कर पाने के कारण शेर भाग खड़ा हुआ और इस तरह गायों ने अपने मालिक मल्लू की रक्षा कर ली। केरल के मौपला विद्रोह के समय सर्पों ने डकैतों के एक समूचे दल पर आक्रमण कर जिस घर में वे निवास करते थे, उसके मालिक की रक्षा की थी। इस तरह यह जीव यह शिक्षा देते हैं कि जब तुच्छ प्राणी भी भावनाओं से रिक्त नहीं तो मनुष्य संवेदना शून्य हो जाए, यह उचित नहीं है।

प्रेम की प्यास पशु-पक्षियों के भी पास

अल्बर्ट श्वाइत्जर जहां रहते थे, उनके समीप ही बंदरों का एक दल रहता था। दल के एक बंदर और बंदरिया में गहरी मित्रता हो गई। दोनों जहां जाते साथ-साथ जाते, एक कुछ खाने को पाता तो यही प्रयत्न करता कि उसका अधिकांश उसका साथी खाए।  कोई भी वस्तु उनमें से एक ने भी कभी अकेले  न खाई।  उनकी इस प्रेम भावना ने अल्बर्ट श्वाइत्जर को बहुत प्रभावित किया। वे प्रायः प्रतिदिन इन मित्रों की प्रणय-लीला देखने जाते और एकांत स्थान में बैठकर घंटों उनके दृश्य  देखा करते।  कैसे भी संकट में उनमें से एक ने भी स्वार्थ का परिचय न दिया। अपने मित्र के लिए वे प्राणोत्सर्ग तक के लिए तैयार रहते, ऐसी थी उनकी अविचल प्रेम-निष्ठा।

 (यह अंश आचार्य श्रीराम शर्मा द्वारा रचित पुस्तक ‘विवाद से परे ईश्वर का अस्तित्व’ से लिए गए हैं।)