Wednesday, July 17, 2019 08:26 AM

विश्व हीमोफीलिया दिवस

‘विश्व हीमोफीलिया दिवस’ पूरे विश्व में फैली गंभीर बीमारी हीमोफीलिया के प्रति लोगों में जागरुकता लाने के लिए मनाया जाता है।

‘हीमोफीलिया’ के प्रति जागरुकता लाने के लिए 1989 से इस दिवस की शुरुआत की गई। तब से हर साल ‘वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ हीमोफीलिया’ के संस्थापक फ्रैंक कैनेबल के जन्मदिन 17 अप्रैल, के दिन ‘विश्व हीमोफीलिया दिवस मनाया जाता है।

शाही बीमारी कहे जाने वाले रोग ‘हीमोफीलिया’ का पता सर्वप्रथम उस वक्त चला था, जब ब्रिटेन की महारानी विक्टोरिया के वंशज एक के बाद एक इस बीमारी की चपेट में आने लगे। शाही परिवार के कई सदस्यों के ‘हीमोफीलिया’ से पीडि़त होने के कारण ही इसे ‘शाही बीमारी’ कहा जाने लगा था। पुरुषों में इस बीमारी संभावना सबसे अधिक होती है। इस समय विश्वभर में लगभग 50 हजार से ज्यादा लोग इस रोग से पीडि़त हैं।

पूरे विश्व में इस बीमारी के प्रति लोगों में जागरुकता लाने के लिए 17 अप्रैल, को विश्व ‘हीमोफीलिया दिवस’मनाया जाता है। ‘हीमोफीलिया’ एक आनुवांशिक बीमारी है, जो महिलाओं की तुलना में पुरुषों में अधिक होती है। इस बीमारी से ग्रस्त व्यक्ति में खून के थक्के आसानी से नहीं बन पाते हैं। ऐसे में जरा-सी चोट लगने पर भी रोगी का बहुत सारा खून बह जाता है। दरअसल, इस बीमारी की स्थिति में खून के थक्का जमने के लिए आवश्यक प्रोटीनों की कमी हो जाती है।

शुरुआत

इसके प्रति जागरूकता फैलाने के लिए 1989 से ‘विश्व हीमोफीलिया दिवस’ मनाने की शुरुआत की गई। तब से हर साल ‘वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ ‘हीमोफीलिया’ डब्ल्यूएफएच के संस्थापक फ्रैंक कैनेबल के जन्मदिन 17 अप्रैल, के दिन विश्व हीमोफीलिया दिवस मनाया जाता है। फ्रैंक की 1987 में संक्रमित खून के कारण एड्स होने से मौत हो गई थी। डब्ल्यूएफएच एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है, जो इस रोग से ग्रस्त मरीजों का जीवन बेहतर बनाने की दिशा में काम करता है।

हीमोफीलिया रक्त से जुड़ी खतरनाक बीमारी है। इस बीमारी में चोट लगने या किसी अन्य वजह से रक्त का बहना शुरू तो हो जाता है, लेकिन फिर उसे रोकना मुश्किल हो जाता है। अलग-अलग मरीजों में रोग की गंभीरता में अंतर होता है। कुछ मरीजों में रक्त के जमने की क्षमता कम होती है,  जबकि बीमारी बिगड़ने पर यह बिलकुल समाप्त हो जाती है। यह बीमारी लाइलाज जरूर हैए पर सही इलाज द्वारा नियंत्रित की जा सकती है।