व्हाट्सऐप बताएगा हाल-ए-दिल

मरीज को अस्पताल आने की जरूरत तभी; जब डाक्टर बुलाए, मंजूर हुए प्रोजेक्ट में नया आइडिया

शिमला  - अब डाक्टर व्हाट्सऐप से प्रदेशवासियों के दिल पर नजर रखेंगे। दिल के इलाज में अब हाईटेक योजना को शुरू किया जा रहा है। डाक्टर हार्ट के  रोगों के लक्षणों को देखते हुए जिला अस्पताल से ईसीजी और अन्य रिपोर्ट को आईजीएमसी के कार्डियोलॉजी विभाग के डाक्टर्ज को व्हाट्सऐप पर भेजेगा। इसके बाद आईजीएमसी के डाक्टर यह निर्णय करके साफ बता सकेंगे कि मरीज को हार्ट अटेक हुआ है, उसे लाइफ सेविंग ड्रग दी जाने की जरूरत है या नहीं, या फिर उसे आईजीएमसी भेजा जाए। दूरदाराज के केस, जिसमें अकसर देरी से हार्ट पेशेंट की पहुंचने और बीमारी का पता नहीं लगने पर उसकी मौत हो जाती है, इस ग्राफ को कम किया जा सकता है। गौर हो कि दिल की धड़कन को सही तरह से धड़काने के लिए इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च ने 18 लाख का प्रोजेक्ट मंजूर किया है, जिसके तहत अब इसमें काम शुरू हो गया है। देखा जाए तो हार्ट अटेक के दौरान लाइफ सेविंग ड्रग के इस्तेमाल की दर को बढ़ाने के लिए आईजीएमसी के कार्डियोलॉजी विभाग को एक अहम प्रोजेक्ट पर मंजूरी मिली है, जिसमें अब तकनीकी तौर पर हाईटेक तरीके से दिल के मरीजों पर नजर रखी जाने वाली है। कार्डियोलॉजी विभाग द्वारा दिल पर की गई लास्ट रिपोर्टिंग के माध्यम से यह सामने आया है कि अस्पतालों में मात्र 35 फीसदी मरीजों को ही हार्ट अटेक के दौरान लाइफ सेविंग ड्रग मिल पाया है। इसका कारण अस्पताल में मरीज का देरी से पहुंचने देखा गया था।

इस तरह ट्रेक होगा मरीज

इस क ार्यक्रम में ब्लॉक स्तर के दस अस्पताल के चिकित्सकों को ट्रेंड किया जाएगा। इसमें डाक्टर हार्ट अटेक वाले मरीजों का ईसीजी करके  व्हाट्सऐप के माध्यम से कार्डियोलॉजी विशेषज्ञों को भेजेंगे, जिसमें आईजीएमसी कार्डियोलॉजी की टीम यह बताएगी कि उक्त मरीज का लाइफ सेविंग ड्रग की आवश्यक्ता है या नहीं। इस व्यवस्था से मरीज के दूरस्थ अस्पताल तक पहुंचने की समय अवधि को भी कम किया जा सकेगा। इस प्रोजेक्ट के माध्यम से दिल का दौरा पड़ने के दौरान इस्तेमाल की जाने वाली लाइफ सेविंग ड्रग के  माध्यम से हार्ट अटेक के ग्राफ को कम किया जा सकेगा।

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