Wednesday, September 18, 2019 05:15 PM

शाप बड़ा या मारण मंत्र

अजय पाराशर

लेखक, धर्मशाला से हैं

पंडित जॉन अली जब से कारपोरेटर हुए हैं, उन्हें हमेशा भय सताता रहता है कि उनके विरोधी उन्हें नेस्तनाबूद करने के लिए मारण मंत्र का प्रयोग कर रहे हैं। अगर कहीं गलती से बिल्ली रास्ता काट जाए तो वह दो दिन तक बुखार में तपते रहते हैं। वैसे उन्होंने अपनी मुखालिफों को कई बार शाप भी दिए हैं। उन्हें लगता है कि उनके शाप से या तो उनके विरोधियों का बुरा हो जाता है या वे अल्लाह को प्यारे हो जाते हैं। एक दिन सुबह-सवेरे जब खबरिया चैनल्स पर उन्होंने मारण शक्ति के बारे में एक माननीय के विचार सुने तो मुझसे कहने लगे, अरे यह तो वही भद्र महिला हैं, जिनके शाप से एक पुलिस अधिकारी असमय मृत्यु को प्राप्त होकर, घोर नरक में जा पहुंचा था। जब तक मुझे उनके शाप के बारे में पता नहीं था, मैं यही समझता रहा था कि वह देशभक्त अधिकारी आतंकवादियों से लोहा लेते हुए वीरगति को प्राप्त हुआ था। वह आगे बोले, एक खबरिया चैनल पर जारी बहस में विशेषज्ञ ने बताया कि प्राचीन ऋषियों की शाप परंपरा को कलियुग में पुनर्जीवित करने का श्रेय इन्हीं नेत्री को जाता है। इससे पहले तो लोग शाप को ईमानदारी की तरह भुला चुके थे। जिस तरह हमारे देश में भ्रष्टाचार के घने जंगल में व्यवस्था की टूटी हवेली में ईमानदारी किसी तहखाने में सड़ रही है, वैसे ही श्राप न जाने किस कोने में बैठा अपने भाग्य को कोस रहा था। मैंने पंडित से हंसते हुए कहा कि न जाने इस विशेषज्ञ ने यह दावा क्यों नहीं किया कि कभी विगत में रहा देश का सबसे बड़ा दल इसी नेत्री के शाप के कारण आज किसी फन कुचले सांप की तरह मरणासन्न हालत में अपनी दुर्गति को रो रहा है। शायद उन्हीं के शाप के  कारण इस दल के तमाम नेता अभी भी दीमक लगे खूंटे के प्रति न केवल वफादार हैं, बल्कि अपने सुनहरे भविष्य के प्रति भी आश्वस्त हैं कि कभी उनका भी समय आएगा। बेचारा खूंटा चीख-चीख कर कह रहा है कि कोई उससे न बंधे। लेकिन शाप का असर इतना गहरा है कि कोई चाहकर भी उससे छूट नहीं पा रहा। लेकिन न जाने उन बेसहारों और गरीबों का शाप, उन भ्रष्टाचारियों को क्यों नहीं लगता जो उनके हक पर डाका डालते हैं या आईएसआईएस और अन्य आतंकवादी संगठनों को क्यों नहीं डसता, जो दुनिया भर में आतंक फैलाते हैं। अचानक पंडित की बुद्धि पर पड़े पत्थर हट गए और वह कहीं भीतर उतर कर कहने लगे कि अमां यार! कहते तो तुम ठीक हो। अगर ऐसा हो तो जो नेता बार-बार झूठ बोलकर सदन में पहुंचते हैं वे तो कब के लटक लिए होते। पाकिस्तान तो न जाने कश्मीरी पंडितों के श्राप से कब का हवा में उड़ गया होता। पिछले कल ही तो पाकिस्तान के वजीरे-आजम 370 को लेकर, रो-रोकर भारत को कोस रहे थे, लेकिन भारत तो अब भी वैसा ही है। हालांकि उनकी एक बीवी तो घोषित पीर भी है। इसका मतलब शाप या मारण मंत्र से कुछ नहीं होता। यह तो हमारे मन का भय है, जो न जाने कितने जन्मों से हमारी हड्डियों में पसरा पड़ा है।