Tuesday, October 15, 2019 10:08 AM

‘शिक्षक और पुरस्कार’

-नागेंद्र गौतम, सुंदरनगर

हिमाचल प्रदेश के लोकप्रिय अखबार ‘दिव्य हिमाचल’ में दिनांक चार सितंबर के अंक में प्रकाशित ‘सरकार एवं शिक्षक पुरस्कार’ संपादकीय पढ़ा, बहुत सराहनीय था। लेखक ने पुरस्कारों के संबंध में सही अवलोकन किया है। यह सच है कि कर्मठ, सत्यानिष्ठा से सेवा करने वाले अध्यापक पुरस्कारों को प्राप्त करने के उद्देश्य से अपना नाम स्वयं प्रस्तुत करने में अपनी शानो-शौकत के विरुद्ध समझते हैं, क्योंकि इस तरह इनाम प्राप्त करने को लेकर अपने आप को ठगा-ठगा महसूस करते हैं जो हकीकत से कोसों दूर है जिसमें कोई सच्चाई नहीं होती है। विभाग को चाहिए कि वह योग्य शिक्षकों को उनकी उत्कृस्ट सेवाओं के लिए स्वयं नाम का चयन करे ताकि सही हकदार को इस सम्मान से नवाजा जा सके। स्कूलों में सही निरीक्षण हो जिसमें स्कूल प्रबंधन कमेटी, हलके का प्रधान, बच्चों के अभिभावक की स्वीकृति लेनी अनिवार्य हो। इससे जाहिर होगा कि शिक्षक की पढाई को लेकर कितनी लोकप्रियता है। यह विभाग को चिंतन करना होगा अन्यथा काबिल शिक्षक अंधेरे की दुनिया में गुमनाम होकर रह जाएंगे।