शिक्षक भर्ती का रिकार्ड भेजें कालेज

यूजीसी ने एचपीयू सहित सभी संस्थानों से मांगा ब्यौरा, आदेशों की अनदेखी पर होगी कार्रवाई

शिमला - प्रदेश के शिक्षण संस्थानों को शिक्षकों की भर्तियों का पूरा ब्यौरा भेजना होगा। इसके अलावा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने सभी शिक्षण संस्थानों को खाली पदों का ऑनलाइन ब्यौरा भेजने के निर्देश जारी किए हैं। यूजीसी ने विश्वविद्यालय व ऐफिलिएटेड कालेजों को इस दायरे में लाया है। इस दौरान यूजीसी की ओर से स्पष्ट कहा गया है कि 20 सिंतबर से पहले इस बाबत जानकारी यूजीसी के ऑनलाइन मॉनिटरिंग पोर्टल पर भेजी जाए। ऐसे में अब प्रदेश विश्वविद्यालय व 127 सरकारी कालेजों में खाली पड़े प्रोफेसर के पदों का ब्यौरा शिक्षा विभाग को भेजना होगा। गौर हो कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग देश भर से सभी शिक्षण संस्थानों के खाली पदों का ब्यौरा लेकर इसका आकलन करेगा। जिस राज्य के  शिक्षण संस्थानों में सबसे ज्यादा पद प्रोफेसर के खाली होंगे, उनसे जवाबदेही ली जाएगी। अहम यह है कि जिन शिक्षण संस्थानों में बजट होने के बाद भी प्रोफेसर्ज के पद खाली होंगे, तो ऐसे में उनका अगला बजट भी रोका जा सकता है। यूजीसी ने साफ किया है कि उच्च शिक्षा में सुधार करने के लिए विश्वविद्यालय व सभी कालेजों में खाली पदों को भरना जरूरी है। इस दौरान शिक्षण संस्थानों को यूजीसी को अभी तक भरे गए  पदों की भी जानकारी देनी होगी। इसके साथ ही यह भी बताया होगा कि संस्थान में शिक्षाविदों के भर्ती का प्रोसेस क्या रहा, वहीं इंटरव्यू किस अधार पर लिए गए व एक साल में कितने प्रोफेसर के पद भरे गए। पदों को भरने के लिए सरकार की मंजूरी ली गई है या नहीं, इस बारे में भी पूरी जानकारी देने के आदेश भी यूजीसी ने जारी किए हैं। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने पहली मर्तबा शिक्षण संस्थानों से इस तरह की जानकारी मांगी है। इससे अब विश्वविद्यालयों और कालेजों में छात्रों को दी जाने वाली शिक्षा पर यूजीसी खुद नजर रखेगा। यूजीसी ने शिक्षण संस्थानों को आदेश दिए हैं कि अगर लंबे समय से शिक्षाविदों के पद खाली चले हुए हैं, तो वे इन पदों को न भरने का कारण भी बताएं। वहीं यह भी साफ किया गया है कि जिस विश्वविद्यालय व कालेजों से शिक्षाविदों के खाली पदों का ब्यौरा नहीं आएगा, नोटिस के बाद उनके बजट पर भी रोक लगा दी जाएगी।

गे्रड के लिए पद भरना जरूरी

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग का तर्क है कि नैक से सही ग्रेड लेने के लिए शिक्षण संस्थानों को शिक्षकों के  सभी पदों को भरना जरूरी है। यही वजह है कि यूजीसी ने सभी शिक्षण संस्थनों से इस बाबत जानकारी मांगी है।

एचपीयू में 200 प्रोफेसर कम

एचपीयू में अकेले 200  प्रोफेसर के पद खाली हैं। वहीं, 60 खुले नए कालेजों में तो प्रोफेसर ही नहीं हैं। यूजीसी ने शिक्षण संस्थानों से यह भी जवाब मांगा है कि जहां पर शिक्षक नहीं हैं, वहां पर शिक्षा प्रणाली कैसे चल रही है।

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