शिमला से निकली बालीवुड की प्रीति

शिमला के छोटे से कस्बे से निकल कर बालीवुड में पहचान बनाने वाली अभिनेत्री प्रीति सूद ने जानवरों के प्रति इनसान के प्यार को उजागर करने वाली शार्ट फिल्म ‘अंतु की अम्मा’ को निर्देशित किया है। बता दें इससे पहले वह ‘फ्रॉड संईया’ जैसी बेहतरीन फिल्मों में नजर आ चुकी हैं। उनकी नई फिल्म के बारे में  उनसे हुई बातचीत के मुख्य अंश पेश हैं...

आपने फिल्म ‘अंतु की अम्मा’ को डायरेक्ट किया है, लोगों को इस फिल्म में क्या नया देखने को मिलेगा?

एक एक तीस मिनट की शार्ट फिल्म है यह फिल्म समाज के लिए मैसेज है और एक पशु के रिलेटेड यह फिल्म है, मैं एक शब्द को बहुत न पसंद करती हूं जब लोग कहते हैं आवारा पशु, जो सडक पर घूमते हैं मेरा यह मानना है कि पशु कभी आवारा नहीं होते वे बेसहारा होते हैं, आवारा इनसान हो सकते हैं पशु-पक्षी कभी आवारा नहीं हो सकते।

इस फिल्म के लिए आपको लोगों की ओर से कैसी प्रतिक्रिया मिल रही है, खासकर अपने पहचान वालों की ओर से?

जब मैंने इस फिल्म को पूरा किया तब लोगों की ओर से अच्छी प्रतिक्रिया आनी शुरू हो गई थी। और मीका सिंह को इसका ट्रेलर दिखाया तो उनको इतना अच्छा लगा है वह बोले में इस फिल्म को प्रेजेंट करना चाहता हूं। और इस फिल्म में बहुत अच्छी कास्ट है और में हमेशा नई जगह पर शूट करती हूं और मेरी कोशिश रहती है कि नई टैलेंट को मौका देती हूं। वहां के लोगों को और बच्चों को जो मुंबई जैसे शहर में आकर संघर्ष नहीं कर सकते। मेरी कोशिश होती है कि कहीं न कहीं उनको अहमियत दंू।

आपने हाल ही में कश्मीर का टूर किया बल्कि जो जम्मू-कश्मीर में बदलाव आया है आर्टिकल 370 को लेकर उस बारे में आपका क्या कहना है?

तीस जुलाई को मैं वहां गई थी। और मेरा जो मिशन रहता है सो लो रहता है में अकेली जाती हूं, जिस दिन यह आर्डर आए थे। जिस दिन कहा गया था कि आप यहां से जाएं। उस दौरान में वहां सड़को पर जा रही थी और खासकर में जिन गाओ को विजिट किया तो मैंने देखा कि लोग जो हैं वे बहुत खुश थे। वे खुश इस लिए की उन्हें शांति चाहिए। मेरे हिसाब से यह बहुत बड़ा बदलाव है। एक देश है तो एक ही कानून होना चाहिए तो यह बहुत अच्छा बदलाव है।

आपने मुंबई में एक मानव-तस्करी रैकेट का पर्दाफश किया था, उस दौरान मन में किसी प्रकार का डर था?

मैंं यह काम कर रही थी डर नहीं था किसी प्रकार का, और जब इनसान सही काम करता है तो डरता नहीं है और डर किस चीज का ज्यादा से ज्यादा मौत का होता है अच्छे काम के लिए कभी डरना नहीं चाहिए।

आपने एक बिल्ली पाली है और अकसर उसके वीडियो और फोटो सोशल मीडिया पर पोस्ट करती हैं, आपने रियलाइज किया है कि जानवरों और इनसानों के बीच कितना स्ट्रांग रिलेशन होता है?

बहुत प्यारा होता है लोगों के लिए शायद बिल्ली होंगे, लेकिन मेरे लिए वे बच्चे हैं। और वे बहुत प्यारे हैं स्वीट हैं और मैं जब बाहर रहती हूं तो सबसे ज्यादा में उनको मिस करती हूं।जानवरों सबसे अच्छे होते हैं मुझे लगता है अगर आप प्यार चाहते हो तो जानवरों से करो वे आपको प्यार ही प्यार देगें। इनसानों को जितना भी प्यार करो शिकायतों को भंडार है।

आपका बचपन कैसा था, आप जिद्दी थीं?

मैंं छोटे से कस में की रहने वाली हूं, शिमला से मेरा घर बत्तीस किलोमीटर आगे है मेरा बचपन एक सामान्य लड़की की तरह था, नॉर्मल फैमिली थी, पढ़ाई लिखाई में अच्छी रही हूं और अलग करना चाहती थी जो महत्वाकांक्षी है जिसे अलग करना है जिंदगी में कुछ करने का जज्बा रखती हूं। जो भीड़ से अलग होते हैं जो भीड़ का हिस्सा बनना नहीं चाहते। हमारे स्कूल में नाटकों से लेकर कोई ऐसा कल्चर नहीं था। और में जिद्दी हूं जिसे बत्तमीजी वाली जिद्दी कहते हैं वह मैं थोड़ी सी हूं और माता-पिता से जिद थी पढ़ाई-लिखाई के बाद कुछ करने की। जिद्दी थी इसलिए बॉम्बे आ गई।  उस टाइम बॉम्बे जाना मतलब विदेश जा रहे हैं।

आपको किस फिल्म या कौन से प्रोजेक्ट ने एक अभिनेत्री की पहचान दिलाई है?

मुझे लगता है मेरे सामाजिक कार्य ने मुझे पहचान ज्यादा दिलाई है। और अदाकारी तो बहुत से लोग करते हैं और मुझे लगता है मेरी पहचान मानवीय कार्य से बनी है और ‘अंतु की अम्मा’ के बाद और एक वेब सीरिज भी कर रही हूं ओम प्रकाश झा की और मुझे लगता है वे भी मुझे एक अलग लेवल की पहचान दिला सकती है। इसके अलावा ‘फ्रॉड सैया’ से भी लोगो ने मेरे काम को पसंद किया है।

- दिनेश जाला

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