Thursday, July 16, 2020 06:37 PM

शूलिनी विश्वविद्यालय ई-सेमिनार एडुवेब-2020 का आयोजन

नौणी-स्कूल ऑफ फार्मास्युटिकल साइंसेज, शूलिनी विश्वविद्यालय ने दि ऑफ इंटरडिसिप्लिनरी साइंसेज विटालिज फ्यूचर रिसर्च पर तीन दिवसीय ई-सेमिनार एडुवेब-2020 का आयोजन किया। ई-सेमिनार का उद्घाटन शूलिनी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर पीके खोसला ने किया। जिन्होंने प्रतिभागियों से इस अवसर का उपयोग सामान्य रुझानों से परे नवाचार और मन की शक्ति का विस्तार करने का आग्रह किया। इस ई-सेमिनार में 672 छात्रों, संकाय सदस्यों और यहां तक कि उन लोगों की भागीदारी देखी गई जो शूलिनी विश्वविद्यालय का हिस्सा नहीं हैं। ई-सेमिनार के पैनल में श्रीलंका, अमरीका और भारत के प्रख्यात वैज्ञानिक और शिक्षाविद शामिल थे। डा. चंदिमा विजयासिरीवर्दीना, अनुसंधान वैज्ञानिक, हर्बल प्रौद्योगिकी सीआईएसआईआर, कोलंबो, श्रीलंका ने प्रतिरक्षा के लिए आयुर्वेदिक सिद्धांतों की भूमिका और कोविड-19 के साथ मुकाबला करने पर जोर दिया। अमेरिका के पेनसिल्वेनिया विश्वविद्यालय के डा. माईको उमेरा ने अपने शोध को मनोभ्रंश के लिए न्यूरोपैथोलॉजी में मूल्यांकन के आधुनिक उपकरणों को शामिल करते हुए प्रस्तुत किया। सभी को इसकी आधुनिक मूल्यांकन प्रक्रिया के बारे में  बताया। डा. आशुतोष कुमार, एम्स, पटना, ने कोविड रोगियों के नैदानिक अध्ययन को साझा किया और निष्कर्ष निकाला कि कोविड जीआईटी, फेंफड़े और मस्तिष्क में भी रहता है। डा. एलिस, करुणा मेडिकल कालेज, कोयम्बटूर ने दवाओं पर केस स्टडी के साथ दवा के विकास का नैदानिक दृष्टिकोण दिया। डा. अमल कुमार, ड्रग कंट्रोलर, भारत सरकार, डा. हार्दिक, वासु रिसर्च सेंटर, बड़ोदरा, सुजल, आईएएस, कलेक्टर और मजिस्ट्रेट और भारत भूषण, एबट हेल्थकेयर, ने युवाओं को ड्रग्स के विकास और उपयोग के अवसर के बारे में बताया और हर्बल और प्राचीन प्रौद्योगिकी का अभ्यास करने का आग्रह किया और युवाओं को अपने सपनों का पालन करें का निर्देश दिया।