Wednesday, September 26, 2018 11:57 AM

श्रीगोपाल सहस्रनाम स्तोत्र

-गतांक से आगे...

भक्ताधीनमनाः पूज्यो भक्तलोकशिवंकरः।

भक्ताभीष्टप्रदः सर्वभक्ताघौघनिकृंतनः।। 141।।

अपारकरुणासिंधुर्भगवान भक्ततत्परः।। 142।।

इति श्रीराधिकानाथसहस्त्रं नाम कीर्तितम।

स्मरणात्पापराशीनां खंडनं मृत्युनाशनम।। 143।।

वैष्णवानां प्रियकरं महारोगनिवारणम।

ब्रह्महत्यासुरापानं परस्त्रीगमनं तथा।। 144।।

परद्रव्यापहरणं परद्वेषसमन्वितम।

मानसं वाचिकं कायं यत्पापं पापस भवम।। 145।।

सहस्त्रनामपठनात्सर्व नश्यति तत्क्षणात।

महादारिर्द्ययुक्तो यो वैष्णवो विष्णुभक्तिमान।। 146।।

कार्तिक्यां स पठेद्रात्रौ शतमष्टोत्तर क्रमात।

पीता बरधरो धीमासुगंधिपुष्पचंदनैः।। 147।।

पुस्तकं पूजयित्वा तु नैवेद्यादिभिरेव च।

राधाध्यानाड़कितो धीरो वनमालाविभूषितः।। 148।।

शतमष्टोत्तरं देवि पठेन्नामसहस्त्रकम।

चैत्रशुक्ले च कृष्णे च कुहूसंक्रांतिवासरे।। 149।।

पठितव्यं प्रयत्नेन त्रौलोक्यं मोहयेत्क्षणात।

तुलसीमालया युक्तो वैष्णवो भक्तित्परः।। 150।।

-क्रमशः