Monday, April 06, 2020 06:35 PM

श्रीगोपाल सहस्रनाम स्तोत्रम्

-गतांक से आगे...

यमुनावेगसंहारी नीलाम्बरधरः प्रभुः।

विभुः शरासनो धन्वी गणेशो गणनायकः।। 26।।

लक्ष्मणो लक्षणो लक्ष्यो रक्षोवंशविनशनः।

वामनो वामनीभूतो बलिजिद्विक्रमत्रयः।। 27।।

यशोदानन्दनः कर्ता यमलार्जुनमुक्तिदः।

उलूखली महामानी दामबद्धाह्वयी शमी।। 28।।

भक्तानुकारी भगवान केशवोचलधारकः।

केशिहा मधुहा मोही वृषासुरविघातकः।। 29।।

अघासुरविनाशी च पूतनामोक्षदायकः।

कुब्जाविनोदी भगवान कंसमृत्युर्महामखी।। 30।।

अश्वमेधो वाजपेयो गोमेधो नरमेधवान।

कन्दर्पकोटिलावण्यश्चन्द्रकोटिसुशीतलः।। 31।।

रविकोटिप्रतीकाशो वायुकोटिमहाबलः।

ब्रह्मा ब्रह्माण्डकर्ता च कमलावांछितप्रदः।। 32।।

कमली कमलाक्षश्च कमलामुखलोलुपः।

कमलाव्रतधारी च कमलाभः पुरन्दरः।। 33।।

सौभाग्याधिकचित्तोयं महामायी महोत्कटः।

तारकारिः सुरत्राता मारीचक्षोभकारकः।। 34।।

विश्वामित्रप्रियो दान्तो रामो राजीवलोचनः।

लंकाधिपकुलध्वंसी विभिषणवरप्रदः।। 35।।