Monday, June 01, 2020 02:33 AM

श्रीगोपाल सहस्रनाम स्तोत्रम्

-गतांक से आगे...

वेदान्तवेद्यः संवेद्यो वैधब्रह्माण्डनयकः।

गोवर्धनधरो नाथः सर्वजीवदयापरः।। 116।।

            मूर्तिमान सर्वभूतात्मा आर्तत्राणपरायणः।

            सर्वज्ञः सर्वसुलभः सर्वशास्त्रविशारदः।। 117।।

षडगुणैश्चर्यसम्पन्नः पूर्णकामो धुरन्धरः।

महानुभावः कैवल्यदायको लोकनायकः।। 118।।

            आदिमध्यान्तरहितः शुद्धसात्त्विकविग्रहः।

            आसमानसमस्तात्मा शरणागतवत्सलः।। 119।।

उत्पत्तिस्थितिसंहारकारणं सर्वकारणम।

गंभीरः सर्वभावज्ञः सच्चिदानन्दविग्रहः।। 120।।

            विष्वक्सेनः सत्यसन्धः सत्यवान्सत्यविक्रमः।

            सत्यव्रतः सत्यसंज्ञ सर्वधर्मपरायणः।। 121।।

आपन्नार्तिप्रशमनो द्रौपदीमानरक्षकः।

कन्दर्पजनकः प्राज्ञो जगन्नाटकवैभवः।। 122।।

            भक्तिवश्यो गुणातीतः सर्वैश्वर्यप्रदायकः।

            दमघोषसुतद्वेषी बाण्बाहुविखण्डनः।। 123।।

भीष्मभक्तिप्रदो दिव्यः कौरवान्वयनाशनः।

कौन्तेयप्रियबन्धुश्च पार्थस्यन्दनसारथिः।। 124।।

            नारसिंहो महावीरस्तम्भजातो महाबलः।

            प्रह्लादवरदः सत्यो देवपूज्यो भयंकरः।। 125।।