Sunday, June 16, 2019 06:37 PM

षोडशी रामायण के रहस्य

षोडशी ‘रामायण के रहस्य’ एक ऐसा अद्भुत ग्रंथ है, जिसका सुदृढ़ ताना-बाना दक्षिण भारत के महान कवि शेषेंद्र शर्मा ने बड़े जतन से बुना है। ग्रंथ में काव्यात्मक और आध्यात्मिक पहलुओं का तुलनात्मक अध्ययन अद्वितीय है। शेषेंद्र शर्मा ने षोडशी के जरिए पाठक के सामने रामायण काल के समय के काव्य, काव्य रस और भावार्थों का जो विवेचन किया है, उससे भावी पीढि़यों को पुरातन साहित्य सभ्यता को समझना भी आसान बनाया गया है। वे कहते हैं कि काव्य रचना कल्पनाओं में जन्मे शब्द तो कदापि नहीं हो सकता। वे हर रचना में रस और सत्व की बात बार-बार इसलिए दोहराते हैं, क्योंकि वे पाठक को इहलोक से परलोक के काव्य रहस्यों से भी परिचित करवाना चाहते हैं। बुद्धि से परे की सैर का मार्ग प्रशस्त करता यह ग्रंथ कई तंत्र रहस्यों को भी समेटे हुए है। कविवर रावण-सीता के मध्य हुए संवाद को कुछ ऐसे प्रस्तुत करते हैं, ताकि वाक्य विन्यास या काव्य लय क्या होता है, इसे भी समझा जा सके। संवाद इस तरह है- रावण सीता को मारने की धमकी देता है - ‘सूर्य अपने तेज से जिस प्रकार संध्या को मार डालता है, उस प्रकार मैं तुम्हें मार डालूंगा’, कहता है। बिल्ली जिस प्रकार चूहे को मारती है-नहीं कहा। रामायण की उपमाओं के सृजन वाल्मीकि की रचना का बखान कुछ इस तरह से मिलता है कि संत ऋषि पर कहीं भी अहम आरूढ़ नहीं होता। शास्त्रार्थ के लिहाज से भी षोडशी में राम को जानने की नई दिशा मिलती है। कविता में रस की प्रधानता को कविवर ने विशेष महत्त्व दिया है। महाकवि शेषेंद्र शर्मा ने षोडशी में सुंदरकांड का जो विश्लेषण किया है वह विद्वता की कसौटी पर खरा उतरता है। सुंदरकांड में वे तंत्र-मंत्र-यंत्र और परापुर के भी कई मार्गों को प्रशस्त करते हैं। कविवर के अध्ययन की गति और गहराई वास्तव में ही काबिल-ए-तारीफ है। यह ग्रंथ संदर्भ ग्रंथ और काव्य इतिहास ग्रंथ के रूप में सहेजा जाना चाहिए। ऐसी मैं उम्मीद करता हूं।

षोडशी रामायण के रहस्य : शेषेंद्र शर्मा, गुंटूरु शेषेंद्र शर्मा मेमोरियल ट्रस्ट, हैदराबाद, 400 रुपए

-ओंकार सिंह

सप्तधारा (काव्यांजलि)

यादव किशोर गौतम का काव्य संग्रह ‘सप्तधारा (काव्यांजलि)’ पाठकों के समक्ष है। विषयों की विभिन्नता को देखते हुए इन कविताओं को सात खंडों में बांटा गया है। पहले खंड वंदन धारा में भगवान गणेश व माता सरस्वती की वंदना की गई है। ‘मोहे ढक्कन बना दो राम’ नामक दूसरी धारा में सामाजिक-पारिवारिक दिक्कतों को व्यंग्य के माध्यम से उजागर किया गया है। बरगद की पीर नामक तीसरी धारा परिचायक है समाज के विभिन्न वर्गों में व्याप्त पीड़ा की। ब्यार ये विकास की नामक चौथी धारा में राष्ट्रीय विकास से संबंधित मुख्य कल्याणकारी सरकारी कार्यक्रमों को विशेष स्थान दिया गया है। शक्ति के महत्त्व को दर्शाती कविताओं को शक्ति धारा नामक पांचवें भाग में समेटा गया है। खेती से जुड़े विभिन्न विषय कृषि धारा के तहत समेटे गए हैं। पर्यावरण धारा अंतिम खंड है जिसमें पर्यावरण से जुड़े मसलों को उकेरा गया है। इस काव्य संग्रह में दी गई कविताओं में कोई न कोई सामाजिक संदेश छिपा है। कविता संग्रह की भाषा सरल है। आशा है कि यह काव्य संग्रह पाठकों को पसंद आएगा।

सप्तधारा (काव्यांजलि): लेखक यादव किशोर गौतम, प्रकाशक ः यादव किशोर गौतम, नालागढ़, सोलन, 270 रुपए

                                      -फीचर डेस्क

समय की कीमत

कुल 31 पृष्ठों में सिमटी मंडी निवासी अमर सिंह शौल की किताब ‘समय की कीमत’ वास्तव में बाल कहानी संग्रह है। इसमें कुल सात बाल कहानियां पिरोई गई हैं जो बालमन को कोई न कोई सीख देती प्रतीत होती हैं। धूर्त लोमड़ी, समय की कीमत, बचत, नई चाल, मेहनत का फल, कल घर बनाऊंगी तथा चीनी और शक्कर नामक कहानियां बच्चों को सीख देने के साथ-साथ मनोरंजन भी करती हैं। ‘समय की कीमत’ नामक कहानी बताती है कि सफल वही होता है जो समय पर अपना कामकाज निपटाता है। इसमें एक बच्चे का मामा उसे एक किसान की कहानी सुनाता है जिससे बच्चे को सीख मिलती है कि अगर समय पर काम न निपटाया जाए तो नुकसान उठाना पड़ता है। ‘कल घर बनाऊंगी’ नामक बाल कहानी का सार भी यही है कि आलसपन हम सबका दुश्मन है। आज का काम आज ही कर लेना चाहिए, उसे कल पर नहीं छोड़ना चाहिए। इन कहानियों में कुछ बिल्कुल संक्षिप्त हैं, जबकि कुछ थोड़ी लंबी हो गई हैं। कहानियों की भाषा बिल्कुल सरल है तथा किताब में छपाई संबंधी अशुद्धियों का पूरा ख्याल रखा गया है। आशा है यह बाल कहानी संग्रह बच्चों को खूब पसंद आएगा।

समय की कीमत: अमर सिंह शौल, ग्रंथ सदन, शाहदरा, दिल्ली, 25 रुपए

                                             -राजेंद्र ठाकुर