Monday, October 21, 2019 01:21 AM

संकल्पों के ‘सरदार’

यह चित्र भावुक करता है और मार्मिक भी है। प्रधानमंत्री मोदी का जन्मदिन था, लिहाजा वह मां से मिलने गए थे। प्रधानमंत्री और मां, एक बेटा और मां...! बेशक मां से मिलकर प्रधानमंत्री मोदी भी कुछ क्षणों के लिए बाल-भाव में डूब गए होंगे! उन्होंने श्रद्धा और सम्मान से झुक कर मां को नमन किया और बूढ़ी मां ने कांपते हाथ बेटे के सिर पर रख दिए। प्रधानमंत्री-पुत्र को आशीर्वाद..! दरअसल ऐसा चित्र बीते 30-35 सालों के दौरान हमने नहीं देखा कि प्रधानमंत्री भी अंततः बेटा होता है, एक अदद व्यक्ति होता है, शासक भी विनीत हो सकता है। छोटे भाई पंकज के घर पर मां हीराबेन के साथ भोजन करने के ममत्व भरे पल...! वाकई प्रधानमंत्री भी बेटा और परिजन होता है। इन चित्रों और दृश्यों के ढेरों मायने हैं। जिस प्रधानमंत्री के मंच को अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड टं्रप साझा करेंगे और ह्यूस्टन में बसे भारतवंशियों के जरिए पूरा विश्व झूम उठेगा, तालियां बजाने लगेगा, वह कोई सामान्य शख्स नहीं हो सकता। सिर्फ  एक देश का प्रधानमंत्री नहीं है, बल्कि विश्व नेता की छवि हासिल करने वाला व्यक्तित्व है। पाकिस्तान की कंपकंपी छुड़ाने वाला ‘सरदार’ है, जिसके संकल्प तय हैं और मिशन की पगडंडियां भी समतल हो गई हैं। जो इतने विराट देश का प्रधानमंत्री है, उसे मां ने 501 रुपए की जेबखर्ची दी है। ममता की कैसी मिसाल है? प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन के समारोह और असंख्य दुआओं, शुभकामनाओं के मद्देनजर लगता है कि हमें अपने राष्ट्रीय नेताआें और प्रधानमंत्रियों के जन्मदिन एक उत्सव की तरह मनाने चाहिए। इस मौके पर एक जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कई बातें कही हैं, लेकिन सबसे महत्त्वपूर्ण उन्होंने यह कहा कि आजादी के बाद जो मिशन अधूरे रह गए थे, उन्हें पूरा करने का काम यह सरकार करेगी। प्रधानमंत्री ने अपनी पूर्ववर्ती सरकारों और प्रधानमंत्रियों पर सवाल नहीं उठाए, बल्कि अधूरेपन की सचाई बयां की है। यह स्वाभाविक भी है। प्रधानमंत्री मोदी ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को समाप्त किया, जो काले कलंक की तरह देश की व्यवस्था से चिपका था। मोदी सरकार ने संसद से पारित करा तीन तलाक का कानून बनाया और ऐसा तलाक कहने वाले मर्द को ‘आपराधिक’ करार दे दिया। यह समाधान मोदी की पूर्ववर्ती सरकारें क्यों नहीं कर पाईं? 10 बैंकों का विलय कर एनपीए को कम करने की कोशिश की और एक भी कर्मचारी ‘बेरोजगार’ नहीं हुआ। जीएसटी और नोटबंदी को नकारात्मक निर्णय के तौर पर लिया जाता है, लेकिन एकांत में बैठकर विरोधी इन योजनाओं का भी आकलन करेंगे, तो समझ आ जाएगा कि उनके पीछे संकल्प क्या थे? बीते 5 साल में करीब 50 बड़े फैसले लिए गए। किसान सम्मान निधि के तहत 6000 रुपए की जेबखर्ची दी जा रही है, छोटे दुकानदारों और असंगठित मजदूरों की पेंशन योजना शुरू की गई है, 2022 तक देश के लगभग सभी गरीबों को पक्का मकान नसीब हो सकता है, घर-घर पेयजल की योजना शुरू की है और उसके लिए ‘जलशक्ति मंत्रालय’ का गठन किया गया है, गरीबों और युवाओं के लिए मुद्रा योजना में 50,000 रुपए से 10 लाख रुपए तक के कर्ज उपलब्ध हैं और बेहद आसान हैं, स्वास्थ्य के तहत ‘आयुष्मान भारत’ सरीखी कल्याणकारी योजना नहीं हो सकती। इनके अलावा 36 करोड़ बैंक खाते, 8 करोड़ गैस सिलेंडर, 10 करोड़ घरों को शौचालय से जोड़ना, गांव-गांव में बिजली पहुंचाई गई है। प्रधानमंत्री सौर ऊर्जा, जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण, स्वच्छता आदि की वैश्विक स्तर पर चर्चा करते हैं और इन्हें भारत में लागू कर रहे हैं। नया संकल्प ‘सिंगल यूज प्लास्टिक’ से देश को मुक्त कराने का है। राष्ट्रीय सुरक्षा के स्तर पर मोदी सरकार ने जिस तरह सर्जिकल स्ट्राइक और फिर पुलवामा आतंकी हमले के बाद बालाकोट एयर स्ट्राइक के फैसले लिए, क्या उनकी तुलना की जा सकती है? आज पाक अधिकृत कश्मीर की चर्चा है। विदेश मंत्री एस.जयशंकर के मुताबिक पीओके भारत का ही भौगोलिक हिस्सा अधिकृत तौर पर होगा। यदि पीओके को दोबारा हासिल करने में हम कामयाब रहे, तो क्या यह ऐतिहासिक मिशन की प्राप्ति नहीं होगी? यदि संयुक्त राष्ट्र ने हमारे प्रधानमंत्री को ‘चैंपियन आफ  द अर्थ’ सम्मान दिया है, तो उसके बेहद गंभीर मायने हैं। दूसरे देशों के सर्वोच्च सम्मानों को कुछ भी कहा जा सकता है, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी अब विश्व नेताओं की पंक्ति में खड़े हैं। बेशक उनका 5 ट्रिलियन डालर की अर्थव्यवस्था का संकल्प सवालिया हो सकता है, क्योंकि फिलहाल आर्थिक सुस्ती का दौर है। लेकिन प्रधानमंत्री दूसरों के सुझाव सुनते हैं और अपनी कमियों को सुधारने की लगातार कोशिश करते हैं। ऐसा ही अर्थव्यवस्था के संदर्भ में किया जा रहा है। उम्मीद की जानी चाहिए कि जो आर्थिक संकट अभी सामने हैं, वे बहुत जल्द ही हल हो जाएंगे, लेकिन संकल्पों के इस सरदार को हमारी शुभकामनाएं....! भारत नंबर एक बने, अर्थव्यवस्था की विकास दर नंबर एक बने और प्रधानमंत्री मोदी भी नंबर एक विश्व नेता की पंक्ति में खड़े रहें।