Wednesday, August 21, 2019 04:47 AM

संघर्ष से मुकाम तक 

- जोगिंद्र ठाकुर, भल्याणी, कुल्लू

तीन तलाक अब अपराध की श्रेणी में आ जाएगा। लोकसभा के साथ-साथ राज्यसभा ने भी मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण विधेयक को पास कर दिया है। राष्ट्रपति की मुहर के साथ यह बिल कानून बन जाएगा। यह बिल शाहबानों से लेकर सायराबानो तक के संघर्ष की कहानी है।  वोटों की राजनीति करने वाले नेताओं की ओछी मानसिकता पर एक करारी चोट हुई है। मुस्लिम महिलाओं से मजहबी परंपराओं के नाम पर उत्पीड़न किसी भी सभ्य समाज के लिए सही नहीं कहा जा सकता।  सरकार के इस इरादे को एक सामाजिक परिवर्तन और आगे बढ़ते भारत के रूप में देखा जा सकता है। तीन तलाक की अन्यायपूर्ण परंपरा अब इतिहास का हिस्सा बन कर रहने वाली है। तीन तलाक कानून महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा, ऐसी उम्मीद की जा सकती है। इसके विरोध में दिखने वाले लोगों को भी समय की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए व मुद्दे के मर्म को समझते हुए मुस्लिम महिलाओं के पक्ष में खड़ा होना ही चाहिए।