Friday, December 13, 2019 07:23 PM

संभावनाओं के बेहतर विकल्प

प्राणी विज्ञान में करियर संबंधित विस्तृत जानकारी प्राप्त करने के लिए हमने प्रो. सुषमा शर्मा से बातचीत की। प्रस्तुत हैं बातचीत के प्रमुख अंश...

प्रो. सुषमा शर्मा

जूलॉजी विभाग, हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी, शिमला

प्राणी विज्ञान में करियर का क्या स्कोप है?

आजकल जूलॉजी के छात्रों में वाइल्ड लाइफ  से संबंधित क्रिएटिव वर्क और चैनलों पर काम करने के प्रति काफी रुझान है, लेकिन यह आसान काम नहीं है। ऐसे काम की डिमांड अभी भी सीमित है। हालांकि इन दिनों निजी स्तर पर चलाए जा रहे फिश फार्म्स काफी देखने में आ रहे हैं। जूलॉजी के छात्रों के लिए यह एक बढि़या व नया करियर विकल्प हो सकता है, खासकर प्रॉन्स फार्मिंग शुरू करने का। ईको टूरिज्म, ह्यूमन जेनेटिक्स और वैटरिनरी साइंसेज के क्षेत्र खुल रहे हैं। जूलॉजी में डिग्री के बाद वैटरिनरी साइंसेज या एनिमल साइंस से संबंधित कोर्सेज किए जा सकते हैं।

इस क्षेत्र में करियर बनाने के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता क्या है?

प्राणी विज्ञान को करियर के रूप में अपनाने वाले अभ्यर्थी को साइंस संकाय (जीव विज्ञान) से दस जमा दो उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। इसके बाद इस क्षेत्र में बीएससी, एमएससी आदि उच्च डिग्रियों को किया जा सकता है।

प्राणी विज्ञान किस- किस विज्ञान से संबंध रखता है? 

प्राणी विज्ञान का विस्तार आज बहुत बढ़ गया है। सम्यक अध्ययन के लिए इसे कई शाखाओं में विभाजित करना आवश्यक हो गया है। ऐसे अंतर्विभागों में मुख्य हैं. आकारिकी, सूक्ष्म ऊतक विज्ञान, कोशिका विज्ञान, भू्रण विज्ञान, जीवाश्म विज्ञान, विकृति विज्ञान, वर्गीकरण विज्ञान, आनुवंशिक विज्ञान, जीव विकास पारिस्थितिकी और पंछी विज्ञान आदि।

रोजगार के असवर किन क्षेत्रों में उपलब्ध हैं?

जूलॉजी में कम से कम स्नातकोत्तर की डिग्री लेने के बाद छात्रों के सामने विभिन्न विकल्प हैं। सबसे पहला विकल्प है कि वे बीएड करने के बाद आसानी से किसी भी स्कूल में अध्यापक पद के लिए योग्य हो जाते हैं। इस क्षेत्र में विविधता की वजह से छात्रों के सामने काफी संभावनाएं मौजूद हैं। वे किसी जूलॉजिकल या बोटेनिकल पार्क, वन्य जीवन सेवाओं, संरक्षण से जुड़ी संस्थाओं, राष्ट्रीय उद्यानों, प्राकृतिक संरक्षण संस्थाओं, विश्वविद्यालयों, फोरेंसिक विशेषज्ञों, प्रयोगशालाओं, मत्स्य पालन या जल जगत, अनुसंधान एवं शोध संस्थानों और फार्मा कंपनियों के साथ जुड़ सकते हैं। इसके अलावा कई टीवी चैनल्स मसलन नेशनल ज्योग्राफिक, एनिमल प्लेनेट और डिस्कवरी चैनल आदि को अकसर शोध और डाक्यूमेंटरी फिल्मों के लिए जियोलॉजिस्ट की जरूरत रहती है।

आरंभिक आय इस फील्ड में कितनी होती है ? 

अगर आप शिक्षा जगत से जुड़ते हैं तो सरकारी और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की ओर से निर्धारित वेतन पर नौकरी करेंगे। आमतौर पर एक बीएड अध्यापक का वेतन 32 से 35 हजार रुपए प्रति माह होता है। एक फ्रेशर के रूप में अनुसंधान और शोध क्षेत्र में प्रति माह 10 से 15 हजार रुपए कमा सकते हैं।

इस फील्ड में आने वाले युवाओं को किन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है?

प्राणी विज्ञान के छात्रों के समक्ष आधुनिक लैब और आधुनिक उपकरणों की कमी के चलते उनके शोध कार्य पर असर पड़ रहा है और जीव जन्तुओं पर नियमों के तहत शोध न कर पाने से भी इस फील्ड में छात्रों के समक्ष चुनौतियां  बढ़ गई हैं। अब उन्हें डेमो के जरिए ही जीव जंतुओं की संरचना की जानकारी दी जा रही है ,जो इन छात्रों के लिए काफी नही है।

छात्रों के लिए सन्देश?

प्राणी विज्ञान के छात्रों को जीव जंतु और प्रकृति के करीब रहने व उसे और करीब से जानने का मौका मिलता है। इस दिशा में ज्ञान हासिल करने की कोई सीमा नहीं है। आप काफी आगे तक जानकारी के लिए देश-विदेश में शिक्षा हासिल कर सकते हैं। वही इस क्षेत्र में रोजगार के भी आपार संभावनाए हैं।  

 - प्रतिमा चौहान, शिमला