Monday, October 21, 2019 01:32 AM

सड़क पर नए कानून की आहट

वाहनों की बढ़ती तादाद, दुर्घटनाओं का हिसाब और ट्रैफिक नियमों के सख्त अंदाज के बीच हिमाचल अभी अपने दस्ताने पहन रहा है। कुछ समय के बाद मोटर व्हीकल एक्ट का इंतजार खत्म होगा, लेकिन इससे पहले इसके प्रारूप में जो गुंजाइश है, उसे समझने-परखने के लिए कानून विभाग ने कुछ अतिरिक्त समय दिया है ताकि तमाम औपचारिकताओं के साथ सड़क सुरक्षा के दावे पूरे हों। सारे देश से भिन्न परिस्थितियों में हिमाचल नए कानून के दायरे में सड़क सुरक्षा की जरूरतें कैसे पूरी करता है और पुलिस व्यवहार के मद्देनजर सड़क के नजारे क्या होते हैं, इससे पहले ही वाहन चालकों पर मनोवैज्ञानिक असर पड़ना शुरू हुआ है। खास तौर पर पर्यटक वाहनों के जरिए नए मोटर व्हीकल एक्ट का संदेश हिमाचल तक पहुंच चुका है या राज्य से बाहर जाते हिमाचली चालकों ने जो समझा, उसका असर दिखाई दे रहा है। मीडिया रिपोर्टों में दर्ज सख्ती का आलम कमोबेश हर वाहन चालक को सचेत कर रहा है, लेकिन इसकी वजह भारी जुर्माने की अदायगी है। ऐसे में हिमाचल की भी अपनी कसौटियां रहेंगी और जिनके तहत वाहनों के चालान पर जुर्माने की राशि का अंक गणित होगा। हिमाचल भी गुजरात राज्य की तरह जुर्माने की दरों में संशोधन करके इन्हें कम कर सकता है, जबकि कई प्रश्न सड़क सुरक्षा की दुष्टि से भविष्य में भी पूछे जाएंगे। खास तौर पर बढ़ते यातायात दबाव में सड़कों की स्थिति पर, मोटर व्हीकल एक्ट की सीमाएं रहेंगी। राष्ट्रीय हाई-वे प्राधिकरण के पास संसाधनों की कमी को देखते हुए हिमाचल में सड़कों का विस्तार धीमा हो रहा है। वर्षों से घोषित हाई वे तथा फोरलेन परियोजनाएं अनिश्चय की स्थिति में हैं, तो सड़क सुरक्षा की वांछित अधोसंरचना का निर्माण रुक सा गया है। हिमाचल मेें परिवहन का एकमात्र या यूं कहे कि अधिकतम दारोमदार सड़कों पर ही निर्भर है, लेकिन बढ़ते वाहनों ने इस क्षमता को कमजोर कर दिया है। मोटर व्हीकल एक्ट के परिदृश्य में सख्ती तो समझ आती है, लेकिन सड़क की स्थिति से उभरती परेशानी में यातायात को व्यवस्थित तथा सुरक्षित करने की चिंता कम नहीं होती। हिमाचल की आबादी से भी तीन गुना से अधिक पर्यटक आगमन के मायनों को मोटर व्हीकल एक्ट की नई परिभाषा क्या संदेश देती है, देखना होगा। बेशक कड़े कानून की संज्ञा में वाहन चालकों के आदर्श बदलेंगे और धार्मिक पर्यटन की आड़ में घूमते वाहनों की जांच शुरू होगी। माल वाहक गाडि़यों पर आते श्रद्धालुओं या बिना हेल्मेट के बाइक सवारों की बढ़ती तादाद को सुरक्षा का संदेश जरूरी है और इस लिहाज से नए कानून की फौलादी बांहें परंपरागत ढीले तंत्र को चुस्त कर सकती हैं। हिमाचल में ट्रैफिक नियमों का पालन अपने अति निम्न स्तर पर होता रहा है और पुलिस के साथ नजदीकी भाईचारे ने कड़क पद्धति से हमेशा किनारा ही किया। इसकी वजह ट्रैफिक व सामान्य पुलिस व्यवस्था में काफी हद तक अस्पष्टता, प्रशिक्षण की कमी तथा माकूल नफरी न होना रहा है। कई स्थानों पर सामान्य पुलिस से भी निचले स्तर पर होम गार्ड्स बिना ‘सीटी’ के ड्यूटी निभा रहे होते हैं। ऐसे में पुलिस पैट्रोलिंग तथा ट्रैफिक पुलिस व्यवस्था में निर्धारित मानदंडों के अनुरूप नफरी नहीं होगी, तो थानों की निगाहें सड़क पर लगी रहेंगी। हिमाचल को कड़े जुर्मानों के बजाय ट्रैफिक नियमों के प्रति व्यवहार की गंभीरता सिखाने के लिए सतर्क अभियान की जरूरत है, जबकि सड़क सुरक्षा के मानदंडों में टैक्सी-बस सेवाओं या सार्वजनिक परिवहन की व्यवस्था में सारे विकल्पों की नियमावलियों को सुदृढ़ करने की दिशा में एक साथ कई विभागों की समन्वित रणनीति व कार्य योजनाएं चाहिएं।