Monday, October 21, 2019 09:09 AM

सड़क हादसों की कैसे थमेगी रफ्तार

जीवन धीमान

लेखक, नालागढ़ से हैं

देवभूमि कहलाने वाले हिमाचल प्रदेश में प्रतिदिन सड़क दुर्घटनाएं बढ़ती जा रही हैं, जिनका मुख्य कारण है लापरवाही व सड़क के नियमों की अनदेखी। 75 प्रतिशत लोगों को सड़क के नियमों की जानकारी ही नहीं होती है। सड़क पर सुरक्षित ड्राइविंग करने के लिए सरकार ने कुछ नियम बनाए हैं, जिनका पालन करके रोड पर सावधानी रखी जा सकती है। हर रोज न्यूज पेपर और न्यूज चैनल  पर सड़क दुर्घटनाओं का कारण लापरवाही, ओवरटेकिंग, तेज गति, नशे में रहना और यातायात के नियमों का पालन न करना ही है...

हाल ही में नेशनल क्र ाइम ब्यूरो ने देश में एक रिपोर्ट  पेश की है जिसे देखने के बाद यह साफ हो गया है कि सड़क हादसों के मामले में भारत सबसे अव्वल है। देश का सबसे बड़ा राज्य उत्तर प्रदेश सड़क हादसों में नंबर एक पर है। आखिर इन बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं का जिम्मेदार कौन है, यह कहना काफी मुश्किल होगा। इन बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं को रोकना सिर्फ  सरकार का काम ही नहीं है, बल्कि हम लोग भी काफी हद तक इसके जिम्मेदार हैं। देवभूमि कहलाने वाले हिमाचल प्रदेश में प्रतिदिन सड़क दुर्घटनाएं बढ़ती जा रही हैं, जिनका मुख्य कारण है लापरवाही व सड़क के नियमों की अनदेखी। 75 प्रतिशत लोगों को सड़क के नियमों की जानकारी ही नहीं होती है। सड़क पर सुरक्षित ड्राइविंग करने के लिए सरकार ने कुछ नियम बनाए हैं, जिनका पालन करके रोड़ पर सावधानी रखी जा सकती है। हर रोज न्यूज पेपर और न्यूज चैनल  पर सड़क दुर्घटनाओं का कारण लापरवाही, ओवरटेकिंग, तेज गति, नशे में रहना और यातायात के नियमों का पालन न करना ही है। दूसरा सबसे बड़ा कारण है वाहन चलाते समय मोबाइल का इस्तेमाल करना। देश में पिछले 10 वर्षों में लगभग 11000 लोग सड़क दुर्घटनाओं में मारे जा चुके हैं। बसों में ओवरलोडिंग पर लगाम लगाने से ही सिर्फ  दुर्घटनाओं से मुक्ति तो नहीं मिल जाएगी। इसके लिए 50-60 प्रति किलोमीटर गाडि़यों की रफतार होनी चाहिए, ओवरटेकिंग खुली जगह पर होनी चाहिए। वर्तमान समय में कोई भी ऐसा दिन नहीं है, जब हम रोड़ एक्सीडेंट के बारे में न सुनें। आजकल छोटे बच्चे भी वाहन चलाते हैं, न उनके पास लाइसेंस हैं, न तो वो नियमों का पालन करते हैं, न उनको नियमों की समझ है। इन बच्चों के अभिभावक खुश होते हैं, कि उनके बच्चे छोटी उम्र में वाहन चलाते हैं। इसलिए वे अपने बच्चों को समझाने के बजाय उन पर गर्व करते हैं। मेरे पड़ोसियों का बेटा केवल मात्र तेरह साल का है, वह मोटरसाइकिल, कार सब चलाता है, वह भी काफी स्पीड में, क्योंकि इन बच्चों को तो अच्छे-बुरे की समझ नहीं हैं, परंतु मां-बाप को तो समझना चाहिए। इन बच्चों को तो केवल आगे निकलने की होड़ लगी रहती है। बच्चों के मां-बाप ज्यादातर पुलिसवालों को दोष देते हैं। अरे भाई! क्या पुलिसवाले जादूगर हैं कि वे हर एक का बता दें कि लाइसेंस है या नहीं या फिर यह बच्चा कम उम्र का है। जब मां-बाप ही अपने बच्चों का ख्याल नहीं रखते हैं तो कोई दूसरा क्या रखेगा।

 अगर व्यक्ति चाहे तो बस कुछ यातायात के नियमों का पालन करके खुद को तथा दूसरों को सुरक्षित रख सकता है। दोपहिया चलाते समय हेलमेट न लगाना लोग शान समझते हैं, वह यह नहीं जानते कि यह शान नहीं बल्कि खतरे में जान है। यातायात के नियमों का पालन न करने वालों को भारी जुर्माना होना चाहिए। हमारे देश में बाकी देशों की तुलना में जुर्माने की राशि 10 गुना कम है।  हमारे प्रदेश में तेज गति से वाहन चलाने पर 1000 रुपए जुर्माना है जबकि नार्वे में 52,734 रुपए जुर्माना है। नाबालिगोंके वाहन चलाने पर जुर्माना तथा अभिभावकों को सजा का प्रावधान होना चाहिए। हमारे देश में सड़क दुर्घटनाओं से 3 प्रतिशत जीडीपी कम होती है। हिमाचल की सड़कों में क्रैश बैरियर न होने से भी हादसे हो रहे हैं। सरकार ने हिमाचल की सड़कों पर थाई बीम क्रैश बैरियर लगाने का फैसला लिया है। अभी तक इसमें पहल नहीं की गई। इस क्रैश बैरियर की खासियत यह है कि अगर इनसे गाड़ी  टकरा जाती है तो गाड़ी पीछे हटती है। हिमाचल के अधिकांश क्षेत्रों में सीमेंट के पैराफिट लगे हैं जिनमें सीमेंट कम और रेत की मात्रा ज्यादा है। जब भी यू-टर्न पर हों तो आगे-पीछे टैफिक को देख लें, तभी सभी सुविधाओं को देखते हुए यू-टर्न लें। हमें यह बात ध्यान में रखनी चाहिए कि यू-टर्न ड्राइवर का अधिकार नहीं है, यह सिर्फ डाइवर की सुविधा के लिए बना होता है। वाहन चलाते समय सबसे बड़ा फैक्टर होता है गाड़ी की स्पीड़ का। अकसर देखा जाता है कि रोड़ अच्छे होने पर ड्राइवर के द्वारा स्पीड़ बढ़ा दी जाती है, परंतु ऐसा नहीं होना चाहिए। हमें ड्राइविंग करते समय लेन को फॉलो करना चाहिए। अकसर देखा गया है वाहन चालक दो-तीन लेन बना देते हैं जिससे भी दुर्घनाओं  के बढ़ने का खतरा रहता है। राज्य को दुर्घनाओं से मुक्त करने के लिए हमारे छोटे-छोटे प्रयास ही हितकारी हैं। जैसे कि यातायात के नियमों का पूर्ण रूप से पालन करना, नाबालिकों को वाहन चलाने से रोकना, नशे में वाहन न चलाना तथा पैदल चलने वालों को पहले सड़क पार कराना इत्यादि।

हिमाचली लेखकों के लिए

लेखकों से आग्रह है कि इस स्तंभ के लिए सीमित आकार के लेख अपने परिचय तथा चित्र सहित भेजें। हिमाचल से संबंधित उन्हीं विषयों पर गौर होगा, जो तथ्यपुष्ट, अनुसंधान व अनुभव के आधार पर लिखे गए होंगे। 

-संपादक