Monday, October 21, 2019 12:48 AM

सतलुज नदी के पुनरुद्धार को मंथन

काजा में आयोजित परामर्शक बैठक के दौरान एडीसी ज्ञान सागर ने रखे विचार

केलांग -भारत सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट को सफल बनाने के लिए हिमालयन वन अनुसंधान संस्थान शिमला द्वारा मंगलवार को सिंधु नदी बेसिन की प्रमुख नदी सतलुज का वानिकी गतिविधियों के माध्यम से पुनरुद्धार करने के उद्देश्य से विस्तृत परियोजना रिपोर्ट डीपीआर बनाने के लिए परामर्शक बैठक का आयोजन काजा में किया गया। बैठक की अध्यक्षता अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी ज्ञान सागर नेगी ने की। इस दौरान श्री नेगी ने जल अधिग्रहण क्षेत्रों में वानिकी उपचारों के बारे में अपने विचार व्यक्त किए और कई उपयोगी सुझाव प्रस्तुत किए। हिमाचल प्रदेश में जल संरक्षण की विभिन्न प्रौद्योगिकियों के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की। उन्होंने कहा कि नदियों के साथ धार्मिक मान्यताएं जुड़ी हुई हंै, लेकिन मनुष्य के हस्तक्षेप के कारण आज नदियां काफी दूषित होती जा रही हंै। नदियों के कारण मनुष्य का जीवन चलता है। पर्यावरण का निर्धारण  नदियों के बिना पूरा नहीं हो सकता है। प्रदूषित पानी के कारण इनसान कई गंभीर बीमारियों की चपेट मे घिरता जा रहा है। इस मौके पर एसडीएम जीवन सिंह नेगी ने कहा कि  स्पीति में पिछले कुछ वर्षों में कुछ नालों के जल स्तर में काफी कमी पाई गई है। इसके साथ कई बार नालों के कारण भारी नुक्सान भी लोगों को उठाना पड़ता है। यहां के पर्यावरण पर भी प्रभाव पड़ रहा है। संस्थान के नोडल अधिकारी सिंधु नदी बेसिन संजीव ठाकुर ने कहा कि भारतीय वानिकी अनुसंधन शिक्षा परिषद देहरादून ने अपने क्षेत्रीय संस्थानों के माध्यम से देश भर में नौ नदी बेसिनों से संबंधित तेरह नदियों में ब्यास, चिनाव, झेलम, रावी, सतलुज, यमुना, ब्रहा्रपुत्र, महानदी, नर्मदा, कृष्णा, गोदावरी, कावेरी, लूनीद्ध को व्यावहारिक व समग्र रणनीतियों पर आधारित वानिकी गतिविधियों द्वारा पुनरुद्धार करने के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट बनाने को चिन्हित किया है तथा यह परामर्श बैठक इस दिशा में काफी सहायक सिद्ध होगी। विस्तृत परियोजना रिपोर्ट अवधारण प्रक्रिय मुद्दों व चुनौतियों तथा प्रयोज्यता पर बहुत ही विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। गौरतलब है कि सिंधु नदी बेसिन की प्रमुख नदियों की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट बनाने में गंगा की डीपीआर को मानक के रूप में प्रयोग किया जाएगा। सतलुज नदी बेसिन के युवा टीम लीडर अखिल शर्मा ने  सतलुज नदी बेसिन से संबंधित महत्वपूर्ण तकनीकी पहलुओं के बारे में अवगत करवाया।