Friday, December 13, 2019 07:24 PM

सफलता के लिए सच्चा व्यक्तित्व जरूरी, बनावटी नहीं

मेरा भविष्‍य मेरे साथ-12 करियर काउसिलिंग/कर्नल (रिटायर्ड) मनीष धीमान युद्ध समाप्ति पर, यूनिट परमानेंट लोकेशन पर आ गई और फिर से आम दिनचर्या शुरू हो गई। मुझे भी एसएसबी साक्षात्कार के लिए कॉल लैटर आ गया, तोपखाना बाजार के प्रसिद्ध दर्जी से लाइट ग्रे शर्ट व गहरी काली पैंट सिलाई करवा, काले शूज और बैल्ट ले मैंने तैयारी कर ली। सीओ साहब ने बुलाकर साक्षात्कार में कुछ बातें ध्यान में रखने को कहा। पहला आपका जवाब अगले प्रश्न की कड़ी बनता है, उसे अपनी पकड़ के दायरे में रखना, दूसरा साक्षात्कार आपका व्यक्तित्व जानने को होता है न कि आपका ज्ञान, तीसरा भाषा वह इस्तेमाल करना जिसमें आपकी अच्छी पकड़ हो और सबसे महत्त्वपूर्ण सफलता के लिए सच्चा व्यक्तित्व जरूरी है, बनावटी नहीं। एसएसबी इंटरव्यू के लिए रेलवे स्टेशन पर रिसेप्शन सेंटर पर लगी बस में बैठते वक्त दूसरों का सामान उठा मदद करते हुए कैंडिडेट अपना हेल्पफुल नेचर दिखा रहे थे। इंटरव्यू कैंपस में पहुंचने पर सामान गाड़ी से उतार एक साइड में रख सभी एक हॉल में बैठे जहां हमारा स्क्रीनिंग टेस्ट शुरू हुआ, जो चार दिन के एसएसबी इंटरव्यू का छोटा रूप था। करीब एक घंटे के टेस्ट के बाद हमें नतीजा बता दिया गया, जिसमें करीब 400 में से 350 को   रिजेक्ट कर वापस जाने का आदेश दे दिया । रेलवे स्टेशन से आते वक्त दिख रही हेल्पफुल नेचर अभी बिलकुल गायब थी। करीब 50 सिलेक्टेड कैंडिडेट, जिनमें मैं भी एक था, हमें बैरक्स में भेज अगले दिन की रूटीन के बारे में बता दिया गया। अगले चार दिन में अलग-अलग पैमानों पर परखने के अलावा मुख्य साक्षात्कार हुआ। अपनी बारी पर अच्छी तरह ड्रेसअप हो इंटरव्यू रूम में पहुंच सामने बैठे अधिकारियों को नमस्कार कर हर प्रश्र का उत्तर अपनी पकड़ के दायरे में रख सच्चाई से देने का मन मैंने बना लिया। मैंने शुरू में अंग्रेजी में जवाब देते हुए उनको बता दिया कि श्रीमान मैं साक्षात्कार में हिंदी भाषा बोलना चाहता हूं क्योंकि अंग्रेजी भाषा में मेरी पकड़ इतनी अच्छी नहीं और हो सकता है कि भाषा पर कमजोर पकड़ की वजह से मेरे जवाब के अर्थ गलत  प्रस्तुत हों। उन्होंने मेरा हौसला अफजाई करते हुए कहा कि हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा है और इसमें बात करना हमारे लिए गर्व की बात है। कुछ प्रश्नों के जवाब जो मेरे सच्चे व्यक्तित्व के प्रमाण थे, जैसे मेरे रोल मॉडल के बारे में प्रश्र जिसमें मैंने कहा मेरे रोल मॉडल मेरे पिताजी हैं जो खेती-बाड़ी कर हमारे पूरे परिवार को अच्छी शिक्षा और जिंदगी में सच्चाई के पथ पर चलने के लिए कहते हैं । मेरे पिताजी में एक काबिलीयत है कि पशुओं की बीमारी का वह देशी नुस्खे से इलाज करते हैं और दूर-दूर तक के गांव से लोग उनसे सलाह मशविरा और दवाई लेने आते हैं। बिना किसी लोभ-लालच के वह रात-दिन लोगों की मदद के लिए तैयार रहते हैं। मुझे पूछा गया पिताजी के अलावा दूसरा आदमी जिससे मैं प्रभावित हूं तो मैंने बताया कि मेरे गांव के रास्ते में आम के पेड़ के नीचे बैठा मोची है, जो चत्रु के नाम से मशहूर है। सारा दिन गरीब अमीर छोटे-मोटे सबके जूते बनाता है और उसमें एक खासियत है कि उसके बनाए जूते जंगल, खेत, पानी में इस्तेमाल से खराब नहीं होते और न ही उसमें से कभी कांटा या कील पार होती। उनके प्रसिद्ध व्यंजन के बारे में पूछने पर मैंने जैसे ही बताया कि मक्की की रोटी, तो सामने से उन्होंने कहा कि साथ में सरसों का साग, तब मैंने कहा सर मक्की की रोटी और सरसों का साग तो हर उत्तर भारतीय का पसंदीदा व्यंजन है। मुझे मजा मक्की की रोटी के साथ पल्दा या रेड़ू जो कि लस्सी में थोड़ी हल्दी, नमक, मिर्च डालकर गर्म करने से ही बन जाता है। मक्की की रोटी को उसमें मैश करके खाने में अलग ही स्वाद आता है। मेरी सादी व सच्ची बातें सुन वह प्रभावित हुए, मुझे अंग्रेजी भाषा पर पकड़ मजबूत करने की बात कर जाने को कहा। एसएसबी साक्षात्कार में अतिआवश्यक बात होती है, पर्सनल इन्फॉर्मेशन क्वश्चनीयर वह मतलब प्रश्र पत्र अगर सच्चाई से भरा होगा तो इंटरव्यू में कोई दिक्कत नहीं आती क्योंकि हर प्रश्र उसी पर आधारित होता हैै।