Monday, April 06, 2020 06:20 PM

समय का अर्थ

सद्गुरु  जग्गी वासुदेव

आप को सही संदर्भ में जानना चाहिए कि मृत्यु क्या है? ये कोई जीवन का विलोम, विपरीत नहीं है। जीवन जो हो रहा है, वो मृत्यु के कारण ही हो रहा है। अगर आप सही संदर्भ समझ लें तो आप दोनों को गले लगा सकते हैं। इस सृष्टि के अथवा इस पृथ्वी ग्रह के इतिहास में आप बहुत कम समय के लिए जीवित होते हैं...

समय का अर्थ कई लोगों के लिए कई प्रकार का होता है। कुछ लोग समय को एक बोझ की तरह ले कर घूमते हैं। एक बच्चे में और एक वयस्क में जो अंतर है। बच्चा एक भरा पूरा, उत्साही जीवन है, तो वयस्क एक गंभीर जीवन है, वो अंतर समय के बोझ का ही है। समय बोझ इसलिए बन जाता है क्योंकि हम ये जानते ही नहीं कि अपनी यादों को, अपनी स्मृतियों को किस तरह रखें? कुछ लोग इसे एक और साल की तरह देखेंगे, जिसे उन्हें अपनी पीठ पर बोझ की तरह ढोना है। पर एक साल क्या है, बस समय का एक माप ही तो है और वास्तविकता यही है कि साल पर साल बीते जा रहे हैं। एक साल बीत गया है, इसका अर्थ ये है कि अब आप को एक साल कम ढोना है। तो क्या ये आप को कुछ और हल्का नहीं बना देता है? आप नए वर्ष का उत्सव मना सकते हैं अथवा आप इस बात का उत्सव भी मना सकते हैं कि एक साल खत्म हो गया है और अपने जीवन में अब आप को एक साल कम संभालना है। मैं चाहूंगा कि आप अपने जीवन को भागीदारी की तीव्रता के संदर्भ में मापें। क्या बीता वर्ष जीवन के साथ शामिल होने का वर्ष था? अथवा क्या ये उलझनों, जटिलताओं, झंझटों का साल था? यही है जो आप को मापना है, क्योंकि मूल रूप से आप सिर्फ  जीवन और मृत्यु, इन दो बातों से ही संबद्ध हैं, आप को सिर्फ  इनकी ही चिंता होनी चाहिए। बाकी सब आकस्मिक है। अंग्रेजी शब्द डेथ (मृत्यु)एक बहुत ही नकारात्मक शब्द बन गया है। लोग समझते हैं कि मृत्यु खराब या भयंकर चीज है। आप जिस चीज को भयानक या खराब समझते हैं, उसे आप गले से नहीं लगा सकते है कि नहीं? आप को अपने मन में ये संदर्भ बदल देना चाहिए। आप को सही संदर्भ में जानना चाहिए कि मृत्यु क्या है? ये कोई जीवन का विलोम, विपरीत नहीं है। जीवन जो हो रहा है, वो मृत्यु के कारण ही हो रहा है। अगर आप सही संदर्भ समझ लें तो आप दोनों को गले लगा सकते हैं। इस सृष्टि के अथवा इस पृथ्वी ग्रह के इतिहास में आप बहुत कम समय के लिए जीवित होते हैं। बाकी के समय में आप मृत ही हैं। क्योंकि आप बहुत लंबे समय तक मृत रहे हैं, इसीलिए आप अभी चमक रहे हैं और ये चमक इसीलिए संभव है क्योंकि आप पुनः एक लंबे समय के लिए मृत हो जाएंगे। मूल रूप से जीवन के सभी स्तरों पर, चाहे वो पुरुष और स्त्री हों, जीवन और मृत्यु हों, अंधकार एवं प्रकाश हों या ध्वनि तथा मौन हों एक के बिना दूसरा संभव नहीं है। वे एक दूसरे के पूरक हैं, विपरीत नहीं हैं। आप अभी थोड़े समय के लिए जीवित हैं और आप बस, इस थोड़े से समय को ही गले लगाना चाहते हैं, बाकी के समय को नहीं, ये इस तरह से काम नहीं करता। क्योंकि ये सब एक ही है। ये वो मृत्यु है जो जीवित है। महत्त्वपूर्ण बात ये है कि आप यहां ऐसे रहें कि आप जीवन और मृत्यु, दोनों का अनुभव एक ही समय पर कर रहे हैं। यही अर्थ है जीवित मृत्यु का! आप के जीवन का मूल्य इसीलिए है क्योंकि आप मरने वाले हैं। अगर आप कभी मरने वाले न हों तो क्या आप इस जीवन की ओर ध्यान देंगे? जिएंगे सिर्फ  वही जो मरने वाले हैं।