Monday, September 21, 2020 08:54 PM

समाज सेवा था सपना, इसी चाहत ने बना दिया एचएएस

प्रोफाइल

नाम  : ज्योति राणा

पिता : जगजीत कुमार

माता : स्वर्गीय हरिंदर कौर

पति : ब्रिगेडियर इंद्रवीर राणा

बच्चे : एक बेटी, एक बेटा

जन्म तिथि : 14 नवंबर, 1974 

जन्म स्थान : मंडी (बल्ह)

शिक्षा :  स्कूल की पढ़ाई हिमाचल के अलग- अलग स्कूलों से हुई है। कालेज की पढ़ाई  पोस्ट ग्रेजुएट गवर्नमेंट कालेज  चंडीगढ़, एमए  (पोलिटिकल साइंस) पंजाब यूनिवर्सिटी से

बैच : एचएएस- 2012 

अब तक किन-किन पदों पर काम

तहसीलदार शिमला, डीआरओ सिरमौर, एसडीएम नाहन, एसडीएम मनाली, एसी टू डीसी शिमला, सचिव एचपीबीओसीडब्ल्यू कल्याण बोर्ड, वर्तमान में ज्वाइंट डायरेक्टर, एचपी इंस्टीच्यूट ऑफ  पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन फेयरलाँस

उपलब्धियां

मिस चंडीगढ़ 1993,  फेमिना मिस इंडिया फाइनलिस्ट 1996, राष्ट्रीय स्तर  पर मॉडलिंग की ।  पर मैं हिमाचल में कुछ करना चाहती थी, इसलिए एचएएस बनी।

पुरस्कार

हिमाचल श्री- 2011, राज्यसभा पुरस्कार -2011, राष्ट्रीय  जनगणना के लिए राष्ट्रपति पुरस्कार -2011, विधानसभा चुनाव के लिए सर्वश्रेष्ठ रिटर्निंग अधिकारी 2017

ग्लैमर की दुनिया में पहुंच कर भी मन में और कुछ करने की चाहत रखने वाली मंडी (बल्ह ) की ज्योति राणा ने अपने सपने को पूरा करके ही दम लिया। जी हां, 14 नवंबर, 1974 को पिता जगजीत कुमार और माता हरिंदर कौर के घर मंडी (बल्ह) में जन्मी ज्योति राणा बचपन से ही जिद्दी स्वभाव की हैं और जो ठान ले वह करके ही दम लेती हैं। उनका कहना है कि उनके सपने को पूरा करने में उनके परिवार और पति ब्रिगेडियर इंद्रवीर राणा ने पूरा सहयोग दिया। ज्योति राणा का मानना है कि सपनों को पूरा करने में परिवार का सहयोग बहुत मायने रखता है, क्योंकि अपनों का सहयोग ही है, जो हमें आराम से सपने को पूरा करने देता है। 2016 में, इन्होंने चंद्राखनी में आठ लड़कों को बचाने के लिए भी तीन दिन लगातार अपनी टीम का साथ दिया और उन लड़कों को सुरक्षित घर पहुंचाया।

 मुलाकात  सेल्फ स्टडी  पर  ज्यादा ध्यान केंद्रित करें अभ्यर्थी ...

 प्रशासनिक अधिकारी बनने का क्या मतलब होता है?

प्रशासनिक अधिकारी बनने का मतलब है, खुद से पहले जनता और समाज की भलाई सोचना और उस दिशा में काम करना। क्योंकि लोग सबसे पहले प्रशासन पर विश्वास करते हैं, उस विश्वास को निभाना अधिकारी का फर्ज होता है।

आपने स्कूली शिक्षा और कालेज व विश्वविद्यालय की पढ़ाई कहां से पूरी की?

स्कूल की पढ़ाई हिमाचल के अलग- अलग स्कूलों से हुई है। कालेज की पढ़ाई पोस्ट ग्रेजुएट गवर्नमेंट कालेज  चंडीगढ़, एमए  पोलिटिकल साइंस पंजाब यूनिवर्सिटी से की।

 खुद पर कितना विश्वास है और इसकी ताकत कहां से आती है। पढ़ाई की उपलब्धियां क्या रहीं?

खुद पर विश्वास हो, तभी दुनिया आप पर विश्वास करेगी। जिन संस्कारों से मेरी परवरिश हुई, उनसे मुझे ताकत आती है। मेरा परिवार, मेरे पति, मेरे बच्चे मेरी ताकत हैं, जो हर परिस्थिति में मेरे साथ खड़े रहे हैं।

कितने प्रयास के बाद एचएएस के लिए चुनी गईं और इसके पीछे प्रेरणा।

23 साल की उम्र में मैंने पहला एचएएस एग्जाम पास किया था। मेरी प्रेरणा थी समाज सेवा। इसलिए मैंने ग्लैमर का पैसा व वहां की शोहरत को छोड़ दिया।

यह कब और कैसे सोचा कि आपको एचएएस अफसर ही बनना है?

सोचा तो शुरू से ही था कि अधिकारी बनूंगी, लेकिन कालेज समय में ब्यूटी कंटेस्ट जीत लिए, तो कुछ समय के लिए मॉडलिंग की तरफ चली गई। पर मन में फिर भी चाहत समाजसेवा की ही थी, क्योंकि मेरे पिता पुलिस आफिसर थे। शादी हुई तो पति आर्मी में, तो प्रेरणा फिर से जाग गई।

आपने सिविल सेवा परीक्षा के दौरान कौन से विषय चुने ?

हिस्ट्री और पोलिटिकल साइंस।

 सामान्यतः यहां तक पहुंचने के लिए आपकी दिनचर्या क्या रही?

एक साल तक दिन में आठ-नौ घंटे पढ़ाई की क्योंकि मुंबई में रहते हुए ज्यादा समय पढ़ाई को नहीं दे पाती थी।

वैसे तैयारी में किताबों के अलावा और किस-किस सामग्री का सहारा मिला?

‘अलौकिक हिमाचल प्रदेश’ किताब पढ़ी और न्यूज पेपर हर रोज पढ़ती थी, साथ में जीके मैग्जीन।

आजकल कोचिंग क्लासेज का चलन बढ़ रहा है। क्या सफलता पाने के लिए कोचिंग क्लास जरूरी है अथवा हम खुद भी सफलता पा सकते हैं?

कभी कोचिंग नहीं ली , सेल्फ स्टडी ही की। पर इंटरव्यू और व्यक्तित्व विकास के लिए कोचिंग जरूरी हो सकती है। बाकी सेल्फ स्टडी जरूरी है। यह मैं इसलिए बोल रही हूं क्योंकि मैं एचआईपीए में, एचएएस/ आईएएस आफिसर को ट्रेंड करती हूं, जो हाल में चयन हुए हैं। वे सब भी सेल्फ स्टडी को ज्यादा जरूरी मानते हैं।

आपकी कार्यशैली आम ऑफिसर की तरह ही है या कि कुछ हटके है?

मेरा काम ज्यादातर लोगों ने सराहा है। मेरा मानना है कि जरूरतमंद के काम को प्राथमिकता पहले मिलनी चाहिए और यह वक्त पर होना चाहिए। मैंने अपनी टीम को हमेशा आगे रखा है। चाहे वह कानून या व्यवस्था की स्थिति हो या कल्याण का काम। 2016 में चंद्राखनी में आठ लड़कों के बचाव के लिए भी मैं अपनी टीम के साथ रही, तीन दिन घर नहीं गई थी, आखिरकार सबको सुरक्षित बचाया गया।

 जो युवा एचएएस अफसर बनने का सपना देख रहे हैं, उनको आप क्या सुझाव देना चाहेंगी?

कड़ी मेहनत, लक्ष्य, आत्मविश्वास, दृढ़ निश्चय तथा अपनी इज्जत करना सीखें यानी खुद को भी समय-समय पर परखें।

प्रतिमा चौहान, शिमला