Monday, September 23, 2019 01:46 AM

समृद्धि के नए द्वार

पीके खुराना

वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार

अमीरी एक बुनियादी मानवाधिकार है, पर कोई आपको इसे तश्तरी में पेश नहीं करेगा। इसके लिए स्वयं आपको ही प्रयत्न करना होगा और जोखिम भी उठाना पड़ेगा। अमीरी का अधिकार मांगने से नहीं मिलता, इसे कमाना पड़ता है। भारतीय आम आदमी के अमीर बनने में दो बड़ी अड़चनें हैं। पहली अड़चन है सही ज्ञान का अभाव और दूसरी अड़चन है गलत अथवा अस्वस्थ नजरिया ...

देश में एक स्थायी और मजबूत सरकार है जो वंचितों के लिए कई जनहितकारी योजनाएं लेकर आई है। सवाल यह है कि क्या गरीबों के लिए खैरात ही काफी है और क्या मध्य वर्ग के आम आदमी के लिए गरीबी के जंजाल से मुक्त होकर समृद्धि, यानी अमीरी के रास्ते पर आगे बढ़ने का कोई तरीका है। क्या एक आम आदमी अमीरी के लिए सिर्फ सरकारी खैरात पर ही निर्भर है। लोकतंत्र में नागरिक अधिकार हमें संविधान से मिलते हैं लेकिन अमीरी का अधिकार हम अपनी मेहनत से कमाते हैं। राजनीति रोजगार नहीं दे सकती। राजनीति समृद्धि नहीं ला सकती। हां सरकार ऐसे नियम बना सकती है कि व्यवसाय फले-फूले और नए रोजगार पैदा हो सकें और समाज में समृद्धि आए। यह सच है कि अमीरी एक ऐसा मानवाधिकार है जिसकी चाहत हर किसी को है। इन्सान ही नहीं दुनिया का कोई भी जीव दुख नहीं उठाना चाहता।

हम में से कोई भी गरीबी और अभावों में नहीं जीना चाहता। पैसे से चाहे हर सुख न खरीदा जा सकता हो पर बहुत से सुख पैसे से खरीदे जा सकते हैं और यह भी सच है कि धन का अभाव बहुत से दुखों का कारण बन जाता है, यहां तक कि गरीबी कई बार आत्महत्याओं तक का कारण बन जाती है, फिर कौन चाहेगा कि वह अभावों भरा जीवन जिए या फिर जीवन भर दूसरों की कृपा का मोहताज बना रहे। अमीरी एक बुनियादी मानवाधिकार है पर कोई आपको इसे तश्तरी में पेश नहीं करेगा। इसके लिए स्वयं आपको ही प्रयत्न करना होगा और जोखिम भी उठाना पड़ेगा। अमीरी का अधिकार मांगने से नहीं मिलता, इसे कमाना पड़ता है। भारतीय आम आदमी के अमीर बनने में दो बड़ी अड़चनें हैं। पहली अड़चन है सही ज्ञान का अभाव और दूसरी अड़चन है गलत अथवा अस्वस्थ नजरिया। अक्सर हम गरीब लोगों को अमीरों की आलोचना करते हुए या उनका मजाक उड़ाते हुए और यहां तक कि उन पर दया दिखाते हुए पाते हैं। भारतवर्ष मूलतः एक धर्म-परायण देश है और आम आदमी धर्म-भीरू है। धर्म की हमेशा से संतोषी जीवन जीने की सीख रही है। इस सीख की आड़ में हमने आलस्य को अपना लिया और अपनी गलतियां स्वीकार करने के बजाय गरीबी को महिमा मंडित करना आरंभ कर दिया।

 अमीरी से घृणा करके और अमीरों को शोषक मानकर हम प्रगति नहीं कर सकते। अब हम जानते हैं कि नई अर्थव्यवस्था के इस युग में ज्ञान का पूंजी बनाकर धन-संपदा कमाना कोई अजूबा नहीं है। अगर हम सिर्फ  इस तथ्य को समझ लें तो हम गरीबी के कारणों का विश्लेषण करके अमीरी की ओर मजबूत कदम बढ़ा सकते हैं। एक और जानने योग्य तथ्य यह है कि भारतवर्ष एक गरीब देश है लेकिन यहां सोने की खरीद सबसे ज्यादा होती है। शादियों के सीजन में सोने का भाव तेजी से चढ़ जाता है और फिर अक्सर नीचे नहीं आता, तो भी सोने की खरीद की रफ्तार में कोई कमी नजर नहीं आती। रुपए का अवमूल्यन हो रहा है लेकिन सोने का रेट बढ़ रहा है। इसलिए जनता में सोने के प्रति लगाव कम नहीं हो रहा है। दरअसल बचत, निवेश और पूंजी निर्माण को लेकर हम अब भी पुरानी अर्थव्यवस्था के हिसाब से चल रहे हैं। बदलते जमाने की जरूरतों को समझे बिना हम पुरानी आदतों से चिपके हुए हैं और खुद को बदलने को तैयार नहीं हैं। बहुत से लोग अमीर होते हैं पर वे अमीर नहीं दिखते, बहुत से लोग गरीब होते हैं पर वे गरीब नहीं दिखते और बहुत से मध्यवर्गीय लोग वास्तविक अमीरी को जाने बिना अमीर दिखने की कोशिश में जुट जाते हैं और इस कोशिश में अक्सर कर्ज के जाल में फंस जाते हैं। यदि आपकी प्रमोशन हो जाए या ज्यादा बढि़या तनख्वाह वाली नई नौकरी मिल जाए या आपका बिजनेस अच्छा चल जाए तो आपको विलासिता की वस्तुएं जुटाने और अमीर दिखने के बजाय ऐसे निवेश करने चाहिएं जो आपके लिए अतिरिक्त आय का स्रोत बन सकें। यहां निवेश से मेरा आशय म्यूचुअल फंड या शेयरों की खरीदारी से नहीं है। यदि आपको इनकी बारीक जानकारी नहीं है तो शेयर मार्केट से दूर रहिए।

 यह निवेश ऐसे काम में होना चाहिए जहां आपकी व्यक्तिगत उपस्थिति आवश्यक न हो। ऐसे निवेश के कई तरीके हैं। आप कोई छोटा-सा घर या दुकान खरीद कर किराए पर उठा सकते हैं, रिक्शा, ऑटो-रिक्शा और कार आदि खरीद कर किराए पर दे सकते हैं। कोई ऐसा व्यवसाय कर सकते हैं जहां आपके कर्मचारी ही सारा काम संभाल लें और आपको उस व्यवसाय से होने वाला लाभ मिलता रहे। पुस्तकें लिख सकते हैं जिसकी रायल्टी मिलती रहे, मकान, दुकान या कार्यालय पर मोबाइल कंपनी का टावर लगवा सकते हैं जिसका किराया आता रहे। इससे होने वाली आय पेंशन की तरह है जहां काम भी नहीं करना पड़ता और लगातार आय का साधन भी बन जाता है। यह आपकी समृद्धि ओर छोटा-सा पहला कदम है। धीरे-धीरे योजनाबद्ध ढंग से ऐसे निवेश बढ़ाते रहेंगे तो आपकी आय इतनी बढ़ जाएगी कि इससे आपका पूरा खर्च निकलने लगेगा। जब समस्याएं नई हों तो समाधान भी नए होने चाहिए, पुराने विचारों से चिपके रहकर हम नई समस्याओं का समाधान नहीं कर सकते। इसके लिए हमें नए विचारों का स्वागत करना होगा, समस्याओं का हल नए सिरे से खोजना होगा और स्वयं को शिक्षित करना होगा। यह परिवर्तन की एक ऐसी मानसिक यात्रा है जिस पर हम खुद ही आगे बढ़ेंगे। हमें यह समझना चाहिए कि परिवर्तन दिमाग से शुरू होते हैं या यूं कहें कि दिमाग में शुरू होते हैं। नई स्थितियों में नई समस्याएं हैं और उनके समाधान भी पुरातनपंथी नहीं हो सकते। यदि हमें गरीबी से पार पाना है तो हमें इस मानसिक यात्रा में भागीदार होना पड़ेगा जहां हम नए विचारों को आत्मसात कर सकें और जमाने के साथ कदम मिलाकर चल सकें। इस योजना पर काम करने से आप सिर्फ  अमीर दिखेंगे ही नहीं, सचमुच के अमीर हो जाएंगे। यदि आपको लाटरी से कौन बनेगा करोड़पति जैसे किसी शो से अमीर जीवनसाथी से विवाह से या किसी अमीर रिश्तेदार की विरासत मिलने की उम्मीद नहीं है तो असली अमीरी और स्थायी समृद्धि के लिए आपको इसी योजना पर काम करना चाहिए। स्थायी समृद्धि का यही एक मंत्र है जो विश्वसनीय भी है और अनुकरणीय भी।

ई-मेलःindiatotal.features@gmail