Wednesday, November 21, 2018 07:57 AM

सम्मानजनक करियर है  नृत्य

प्राचीन काल में नृत्य सीखना सम्मानजनक परिवारों में वर्जित था, लेकिन अब विश्वव्यापी स्तर पर मनोरंजन उद्योग के ग्लैमर एवं चमक-दमक के कारण युवा पीढ़ी के लिए नृत्य सम्मानजनक करियर बनता जा रहा है...

प्राचीन काल में नृत्य सीखना सम्मानजनक परिवारों में वर्जित था, लेकिन अब विश्वव्यापी स्तर पर मनोरंजन उद्योग के ग्लैमर एवं चमक-दमक के कारण युवा पीढ़ी के लिए नृत्य सम्मानजनक करियर बनता जा रहा है। आजकल म्यूजिक वीडियो भी छापे जा रहे हैं। फिल्मों में नृत्य के दृश्यों में वृद्धि होती जा रही है। इस वजह से करियर के रूप में नृत्य सभी परिवारों में स्वतंत्र रूप से अपनाया जा रहा है। मनोरंजन उद्योग में काफी उतार-चढ़ाव आया है। कला अब व्यक्ति की रचनात्मक प्रतिभा की संतुष्टि का माध्यम मात्र नहीं है बल्कि यह आजीविका का भी आकर्षक साधन बनकर उभरी है। प्राचीन काल में नृत्य सीखना सम्मानजनक परिवारों में वर्जित था, लेकिन अब विश्वव्यापी स्तर पर मनोरंजन उद्योग के ग्लैमर एवं चमक-दमक के कारण युवा पीढ़ी के लिए नृत्य सम्मानजनक करियर बनता जा रहा है। आजकल म्यूजिक वीडियो भी छापे जा रहे हैं। फिल्मों में नृत्य के दृश्यों में वृद्धि होती जा रही है। इस वजह से करियर के रूप में नृत्य सभी परिवारों में स्वतंत्र रूप से अपनाया जा रहा है। भारतीय शास्त्रीय नृत्य के साथ-साथ जाज, बैलेट, वाट्ज, जिवे तथा टैप डांस जैसे पश्चिमी नृत्यों की भी फिल्म एवं वीडियो क्षेत्र में धूम मची हुई है। अच्छी तरह से प्रशिक्षित शिष्य आगे चलकर अध्यापन क्षेत्र को चुन सकता है या किसी भी कोरियोग्राफी ग्रुप में शामिल हो कर करियर बना सकता है।

करियर  विकल्प

नृत्य आज बहुत बड़ा उद्योग बन गया है। नृत्य में करियर के बहुत विकल्प माजूद हैं, जिन्हें चुन कर युवा अपना करियर बना सकते हैं। आज कल टीवी चैनलों पर विभिन्न रियलिटी शोज उभरते नर्तकों को मौका दे रहे हैं। इसके अलावा अध्यापन के क्षेत्र में भी करियर की संभावनाएं हैं। सरकारी क्षेत्र में स्कूल-कालेज में अवसर हैं,  तो अपनी डांस अकादमी भी खोली जा सकती है।

नृत्य की उत्पत्ति

नृत्य मानवीय अभिव्यक्तियों का एक समय प्रदर्शन है। यह एक सार्वभौम कला है, जिसका जन्म मानव जीवन के साथ ही हुआ है। बालक जन्म लेते ही रोकर अथवा अपने हाथ-पैर मार कर अपने भाव अभिव्यक्त करता है कि वह भूखा है। इन्हीं आंगिक क्रियाओं से नृत्य की उत्पत्ति हुई।

व्यक्तिगत गुण क्या हों

नृत्य के क्षेत्र में करियर बनाने के लिए जिन व्यक्तिगत गुणों का होना आवश्यक है। उनमें सबसे पहला तो स्वस्थ होना जरूरी है। इसके अलावा परिश्रम, दृढ़ निश्चय और असफलताओं को स्वीकार करने की क्षमता, आत्मविश्वास तथा महत्त्वाकांक्षा प्रमुख हैं।

समारोह की शान

जब कोई खुश होता है, तो उस के मन में जो सबसे पहला ख्याल आता है, वह नृत्य ही है। हमारा कोई भी समारोह नृत्य-संगीत के बिना अधूरा माना जाता है। यही कहा जा सकता है कि नृत्य का संबंध समारोहों से है और नृत्य खुशी व्यक्त करने का सबसे बड़ा माध्यम है।

पश्चिम के प्रभाव में युवा पीढ़ी

यद्यपि पश्चिमी नृत्य भारतीय शास्त्रीय नृत्य के समक्ष नहीं है। फिर भी आज युवा पीढ़ी इस ओर आकर्षित हो रही है। क्योंकि इस क्षेत्र में पैसा अधिक मिलता है। पश्चिमी रचनात्मक नृत्यों का काफी ग्लैमर है। आजकल म्यूजिक एलबम तथा डांस वीडियो सर्वत्र छा रहे हैं। हिंदी पॉप एलबम तथा डिस्को में हाई पॉप सर्वाधिक लोकप्रिय नृत्य है।

फ्यूजन का फन

पश्चिमी नृत्य को भारतीय नृत्य से मिक्स कर के नई नृत्य शैलियों का निर्माण हुआ है। पारंपरिक रूप से सर्वाधिक लोकप्रिय नृत्य जाज है। इसकी अत्यधिक प्रशंसा की जाती है। जाज नृत्य सीखने में कम से कम दो वर्ष लगते हैं। बैलेट के बारे में भी समान स्थिति है। इसमें शास्त्रीय और आधुनिक दोनों रूप हैं। अनेक स्कूल खुल जाने के कारण पश्चिमी नृत्य लोकप्रिय हो चुके हैं। सर्वोपरि स्थान श्यामक डावर इंस्टीच्यूट ऑफ परर्फोमिंग आर्ट्स का है। दिल्ली और मुंबई में इसकी शाखाएं हैं। आज प्रशिक्षित पश्चिमी नर्तक-नर्तकी के लिए काम की कोई कमी नहीं है। भारत में यह नया क्षेत्र है। अतः इसमें अनेक संभावनाएं हैं। नर्तक-नर्तकी किसी भी कोरियोग्राफी टीम में शामिल हो सकते हैं, जो नियमित रूप से स्टेज पर प्रदर्शन करते हैं। म्यूजिक एलबम के अलावा फिल्मों में हमेशा कोरियोग्राफी की मांग रहती है।

विदेशों में भी सीखें

पश्चिमी नृत्य की जानकारी बढ़ाने के लिए आप विदेशी विश्वविद्यालय में जा सकते हैं। पॉल टेलर अकादमी,न्यूयॉर्क सर्वाधिक प्रतिष्ठित संस्था है। इसके अलावा मिल्स कालेज, कैलिफोर्निया प्राचीनतम संस्थाओं में से एक है। यहां सर्वाधिक प्रख्यात आधुनिक नृत्य शैलियां सिखाई जाती हैं।

इतिहास

भारतीय नृत्य का इतिहास बहुत प्राचीन है। नृत्य का प्राचीनतम ग्रंथ भरत मुनि का नाट्यशास्त्र है। नृत्य का उल्लेख वेदों में भी मिलता है, जिससे पता चलता है कि प्रागैतिहासिक काल में नृत्य की खोज हो चुकी थी। इतिहास की दृष्टि में सबसे पहले उपलब्ध साक्ष्य गुफाओं में प्राप्त आदिमानव द्वारा उकेरे गए चित्रों तथा हड़प्पा और मोहनजोदड़ो की खुदाई में प्राप्त मूर्तियां हैं। इन प्रमाणों के जरिए  पुरातत्त्ववेत्ता उस समय नृत्य होने का दावा करते हैं।

प्रमुख शिक्षण संस्थान

 बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी

 महाराजा सायाजी राव यूनिवर्सिटी, बड़ौदा

 गुजरात यूनिवर्सिटी

 नालंदा नृत्य कला महाविद्यालय, बिहार

 भारतीय विद्या भवन, बंगलूर

 गवर्नमेंट म्यूजिक कालेज अगरतला, त्रिपुरा

 रविंद्र भारती यूनिवर्सिटी कोलकाता, पश्चिम बंगाल

परिभाषा

नृत्य की सामान्य सी परिभाषा यह है कि यह शरीर का संगीत से संबंध जोड़ने की एक प्रक्रिया है। यानी कि हाथ, पैर, मुख व शरीर संचालन का समन्वय। संगीत के साथ शरीर का समन्वय स्थापित होना ही नृत्य है।

शैक्षणिक योग्यता

नृत्य के क्षेत्र में करियर बनाने के लिए वैसे किसी विशेष शैक्षणिक योग्यता की आवश्यकता नहीं है। फिर भी इस क्षेत्र में जाने के  लिए  कम से कम दस जमा दो की शिक्षा अनिवार्य है। नृत्य के क्षेत्र में करियर के लिए  सबसे जरूरी है कि आप की इस विषय में लगन होनी चाहिए, तभी आप इस क्षेत्र में आगे बढ़ सकते हैं।

असीमित आय

नृत्य के क्षेत्र में आय की कोई सीमा नहीं है। सरकारी क्षेत्र में अध्यापन करने पर 30-40 हजार रुपए महीना कमाया जा सकता है। अगर आप स्टेज शो करते हैं, तो यह कमाई एक महीने में लाखों में हो सकती है। फिल्म जगत में तो नृत्य का व्यवसाय करोड़ों में होता है। यानी नृत्य के क्षेत्र में पैसा और शोहरत दोनों हैं।

सीखने की ललक जरूरी

टेरेंस लूइस

प्रसिद्ध कोरियोग्राफर, मुंबई

डांसिंग में करियर संबंधी विस्तृत जानकारी प्राप्त करने के लिए हमने टेरेंस लूइस से बातचीत की। प्रस्तुत हैं बातचीत के मुख्य अंश..

वर्तमान में लोकप्रिय और प्रचलित नृत्य शैलियों के बारे में बताएं?

हिप-हॉप, पॉपिग एंड लॉकिंग, पार्लर डांसिंग और सालसा जैसी लैटिन स्टाइल आजकल काफी लोकप्रिय हैं। मेरे हिसाब से लोकनृत्य की लयात्मकता भी कोरियोग्राफर को प्रेरित करती है। रामलीला फिल्म के एक गाने में गुजराती लोकनृत्य गरबा का खूबसूरती से इस्तेमाल किया गया है।

किन नृत्य शैलियों में रोजगार की अधिक संभावनाएं हैं?

हिंदी फिल्मों में बॉली-हॉप और हिप-हॉप का काफी इस्तेमाल होता है। क्लासिकल नृत्य सीखने के बाद हर तरह की नृत्यशैली को आसानी से सीखा जा सकता है। इन्हीं क्षेत्रों में रोजगार की अच्छी संभावनाएं भी हैं।

क्या नृत्य भी फ्यूजन से प्रभावित हुआ है?

बिलकुल, आजकल मौलिक शैलियों को भी थोड़ा ट्विस्ट करके प्रस्तुत किया जा रहा है, लेकिन फ्यूजन को सही तरीके से प्रस्तुत करना जरूरी है, वरना वो अच्छा नहीं लगता। मैंने डांस इंडिया डांस के मंच पर भोजपुरी सालसा दिखाया था, जो काफी हिट हुआ।

नृत्य के क्षेत्र में करियर बनाने वाले को शैक्षणिक योग्यता क्या होना चाहिए?

नृत्य में करियर बनाने से पहले प्रशिक्षण हासिल करना जरूरी है। आजकल बहुत सारे अच्छे ट्रेनिंग स्कूल है, जहां आप डांस की बेसिक्स सीख सकते हैं। इसकी शुरुआत डिप्लोमा इन डांस कोर्स में प्रवेश लेकर की जा सकती है।

एक डांसर में किन मानसिक और शारीरिक विशेषताओं का होना जरूरी है?

किसी भी क्षेत्र में सीखने की चाह का होना बहुत जरूरी है। अगर हम दिमाग में ऐसी मानसिकता पालते हैं कि हमें सब कुछ आता है, तो हम आगे नहीं बढ़ पाते। किसी भी क्षेत्र में महारत हासिल करने के लिए  एक विद्यार्थी की तरह सीखते हुए आगे बढ़ना चाहिए।

भारत में कार्यरत प्रमुख नृत्य संस्थानों के बारे में बताएं?

पिछले 16-15 वर्षों में देश में कई डांस इंस्ट्च्यिट्स खुले हैं, जो देश में डांसिंग प्रतिभाओं को तराशने के लिए महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, जैसे... अटाकल्लरी, बंगलौर  टेरेंस लूइस अकादमी, मुंबई  ,यामक डावर इंस्टिच्यूट ऑफ परफोर्मिंग आर्ट्स, मुंबई । देश के कई विश्वविद्यालयों में भी आज डांसिंग से जुड़े कोर्सेज करवाए जाते है। इनमें प्रमुख हैं... बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी  रविंद्र भारती विश्वविद्यालय, कोलकाता  मुंबई विश्वविद्यालय, मुंबई।

  • पंकज सूद, सोलन