Friday, December 06, 2019 09:55 PM

सरकाघाट प्रकरण…. देवता ने कहा यहां भूत-प्रेत हैं… और फेंक दी भगवान की मूर्तियां

सरकाघाट के समाहल में और भी कई हुए राजदेई सी क्रूरता के शिकार

 86 वर्षीय मुख्याध्यापक ने सुनाई आपबीती

सरकाघाट -सरकाघाट की गाहर पंचायत के समाहल गांव में देवता के नाम पर 81 वर्षीय वृद्धा के साथ हुई क्रूरता के मामले में हुई पुलिस की कड़ी कार्रवाई के बाद अब कई और पीडि़त भी सामने आ रहे हैं, जिन्हें देवता के आदेश व डर दिखाकर प्रताडि़त किया गया। देवता के नाम पर समाहल गांव में न सिर्फ लोग प्रताडि़त किए गए, बल्कि वहां भगवान को भी नहीं बख्शा गया। इस मामले में अब तक की सबसे हैरान करने वाली घटना सामने आई है। गांव के एक व्यक्ति द्वारा बनाए गए मंदिर में रखी गई भगवान राम चंद्र और भगवान विष्णु सहित अन्य मूर्तियों को देवता के आदेश पर बाहर फेंक दिया गया। यही नहीं देवता की पुजारिन यहां तक कह दिया गया इन मूर्तियों में भगवान नहीं, भूत बसे हुए हैं। ये सब आरोप अब पट्टा गांव के 86 वर्षीय सेवानिवृत्त मुख्याध्यापक मोहन सिंह ने समाजसेवी संजय शर्मा के साथ मीडिया के सामने लगाए हैं। उन्होंने बताया कि सबसे पहने छह नवंबर को राजदेई से पहले वह मंदिर की पुजारिन निशू और उसके दो भाइयों की प्रताड़ना का शिकार हुए थे। पहली नवंबर को जब वह देवता के मंदिर में गए, तो उन्हें तीन सौ लोगों के सामने प्रताडि़त किया गया और गांव से बाहर करने के आदेश दे दिए गए। इसके बाद सात नवंबर को देवता की पुजारिन और उसके भाइयों समेत अन्य लोगों ने देवता का रथ उन पर चढ़ाया और उन्हें धक्का दिया, जिससे वह वह जमीन पर गिर गए। इससे उन्हें पीठ पर चोटें आई हैं। इतना ही नहीं, हमारे परिवार द्वारा गांव में बनाए मंदिर में भी तोड़फोड़ की गई और भगवान कृष्ण, भगवान रामचंद्र, सीता माता, भगवान विष्णु और कुल देवी आदि की मूर्तियों को मंदिर से निकालकर बाहर फेंककर तोड़ दिया गया और कहा कि यह भूत प्रेत हैं। पुजारिन ने देवता की तरफ से आदेश दिए कि इन्हें मत मानो और न ही इनका पूजा अर्चना की जाए। यह सब करने के बाद उन्हें धमकी दी गई कि अगर वह गांव से बाहर निकले, तो उनको जान से मार दिया जाएगा। वह घर में अकेले 80 वर्षीय वृद्ध पत्नी और एक अपंग बेटी के साथ रहते हैं।

भूत का हवाला देकर कटवा दिया पेड़

सात नवंबर को मूर्तियां तोड़ने के बाद मंदिर के पास तीन पेड़ों में से एक पेड़ को भी कटवा दिया गया और कहा गया कि इस पेड़ में भूत हैं।

गांव में नशेडि़यों का बोलबाला

गांव में नशेडि़यों और उपद्रवियों का बोलबाला है। मोहन सिंह ने आगे बताया कि जब भी वह गांव में नशेडि़यों का विरोध करते हैं, तो उन्हें धमकियां दी जाती हैं। 86 वर्षीय मोहन सिंह ने प्रशासन और पुलिस से सुरक्षा की मांग की है। समाजसेवी संजय शर्मा ने सरकार से मांग करते हुए कहा कि मंदिर की पुजारिन व कारकूनों के खिलाफ कड़ी कारवाई की जाए और सरकार अपने स्तर पर अंधआस्था के खिलाफ  जागरुकता अभियान चलाए।

राजदेई के साथ क्रूरता के बाद भी नहीं मानी मंदिर की पुजारिन

राजदेई के साथ क्रूरता के बाद भी देवता की पुजारिन और अन्य लोगों की प्रताड़ना का सिलसिला नहीं रुका था, बल्कि छह नवंबर की घटना के बाद हौंसला बुलंद कर सात नवंबर को गांव के मंदिर में भगवान की मूर्तियों तक को नहीं बख्शा गया।

पछता रहे जेल में बंद लोग

सरकाघाट। समाहल गांव में वृद्धा से हुई क्रूरता और अन्य लोगों को प्रताडि़त करने की घटनाओं के बाद पंचायत के लोग अपने किए पर पछता भी रहे हैं। इस मामले में सलाखों के पीछे बंद 24 लोगों को भी अब पछतावा हो रहा है। लोगों को इस बात अफसोस है कि सब लोग चंद लोगों की बातों में आकर देवता के नाम के आदेश मानते रहे। इन सारे हालातों के बाद फिर से नई शुरुआत और आगे का रास्ता मांगने के लिए पंचायत के लोगों ने देवता मांहूनाग के मूल मंदिर तरौर जाने का निर्णय लिया है, ताकि अब हालातों को आगे के लिए ठीक किया जा सके। मूल स्थान जाकर लोग देवता से एक उचित पुजारी नियुक्ति करने का भी आग्रह करेंगे।

बस वालों से भी लिए बयान

राजदेई को जिस बस में कुछ लोगों ने बिठाया था, उस बस के चालक-परिचालक के बयान पुलिस ने ले लिए हैं। दोनों ने राजदेई के मुंह पर कालिख लगी हुई देखी थी। जांच में यह भी पता चला कि गांव के ही कुछ लोगों ने किराए के पैसे भी दिए थे और इस दौरान देवता का रथ बस के आगे खड़ा रहा था।

कार्रवाई से मना करते रहे लोग, नहीं तो पुलिस यहां तक पहुंचने नहीं देती बात

मंडी -सरकाघाट के समाहल गांव में देवता के नाम पर दिए गए आदेशों और चंद लोगों द्वारा दी गई प्रताड़ना का शिकार न सिर्फ 81 वर्षीय राजदेई बनी है, बल्कि कई और लोगों को भी देवता के नाम पर निशाना बनाया गया, लेकिन हर बार शिकायतकर्ता देवता के डर से पुलिस को ही कार्रवाई करने से मना करते रहे। अगर शिकायकर्ता या उनके परिजन ऐसा नहीं करते, तो शायद समाहल गांव का मामला यहां तक नहीं पहुंचता। सरकाघाट पुलिस की भूमिका व लापरवाही को लेकर उठ रहे सवालों के बीच अब मंडी पुलिस ने भी अपना यह पक्ष जाहिर किया है। सरकाघाट पुलिस की भूमिका को लेकर पहले ही एसपी मंडी जांच करवा रहे हैं और जांच पूरी होने तक सरकाघाट एसएचओ व एक हैडकांस्टेबल को भी पुलिस लाइन हाजिर कर दिया गया है।  एसपी मंडी गुरदेव शर्मा ने बताया कि करवाचौथ के दिन राजदेई के साथ क्या हुआ, इसकी कोई शिकायत पुलिस के पास नहीं आई थी, जबकि 23 अक्तूबर को राजदेई के दामाद की शिकायत पुलिस को मिली। इसके बाद 24 अक्तूबर को पुलिस मौके पर भी गई थी और पंचायत प्रधान के सामने पूछताछ की, लेकिन राजदेई के दामाद ने लीगत कार्रवाई करने से इनकार कर दिया। इसके बाद छह नवंबर को पुलिस को एक फोन आया कि राजदेई से मारपीट की जा रही है। जब पुलिस मौके पर गांव पहुंची, तो राजदेई तलाश करने के बाद भी नहीं मिली। उसके अगले दिन पुलिस ने राजदेई को बरच्छवाड़ और तत्ताहर में जाकर तलाश किया, लेकिन इस बार भी राजदेई के दामाद योगराज ने कोई कार्रवाई करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि जयगोपाल के मामले में भी पुलिस ने जांच की है। जयगोपाल ने पुलिस से अपनी शिकायत में मौके पर साथ चलने को कहा, लेकिन कोई कार्रवाई न करने की बात कही है। इसके बाद पुलिस देवता के पास प्रधान व पंच को लेकर साथ गई। यहां जयगोपाल ने फिर से कहा कि कोई कार्रवाई नहीं करनी है। एसपी मंडी ने बताया कि जयगोपाल की लिखित शिकायत पर प्रधान व पंच के भी हस्ताक्षर हैं। ऐसे ही हर बार शिकायतकर्ता ही पुलिस को कार्रवाई करने से रोकते रहे और पुलिस को जब सबूत के रूप में वायरल वीडियो मिला, तो फिर कार्रवाई अमल में लाकर सभी आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। अभी जांच रिपोर्ट नहीं आई है। रिपोर्ट में अगर किसी भी पुलिस कर्मी की लापरवाही सिद्ध हुई, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। एसपी मंडी गुरदेव ने कहा कि देवी-देवता के नाम पर गलत काम करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।