Tuesday, September 17, 2019 03:47 PM

सरकार की पॉलिसी से हाई कोर्ट हैरान

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को सालाना 15 हजार रुपए देने की नीति पर अदालत ने की टिप्पणी

शिमला -हिमाचल में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और हेल्पर के पद भरने के लिए राज्य सरकार द्वारा बनाई गई पॉलिसी के बारे में प्रदेश हाई कोर्ट ने कड़ी प्रतिकूल टिप्पणी दर्ज की है। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान ने राज्य के मुख्य सचिव को आदेश दिए हैं कि वह सभी संबंधित अधिकारियों से मीटिंग करें और नई पॉलिसी बनाने के लिए संभावनाए तलाशें, जो कि व्यावहारिक और तर्कपूर्ण हो। राज्य सरकार द्वारा बनाई गई आंगनबाड़ी पॉलिसी में रखे गए प्रावधानों पर हाई कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि राज्य सरकार द्वारा आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और हेल्पर के लिए वार्षिक आय पंद्रह हजार रुपए रखी गई है, जो कि प्रतिदिन के हिसाब से मात्र 41 रुपए आंकी जा सकती है। अदालत ने आश्चर्य जताते हुए अपने आदेशों में कहा कि राज्य सरकार के अधिकारी किस तरह इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि एक परिवार एक दिन में मात्र 41 रुपए में गुजारा कर सकता है। पॉलिसी में दी गई अपील के प्रावधान पर भी अदालत ने प्रतिकूल टिप्पणी दर्ज की है। पॉलिसी में दिए प्रावधानों के तहत आंगनबाड़ी कार्यकर्ता या हेल्पर की नियुक्ति को चुनौती सिर्फ पंद्रह दिन के भीतर ही दी जा सकती है। यही नहीं, अपील निपटाने के लिए भी पंद्रह दिन का ही समय दिया गया है, जो कि व्यावहारिक और तर्कपूर्ण नहीं है। अदालत ने अपने आदेशों में स्पष्ट किया कि हिमाचल प्रदेश की भौगोलिक स्थिति और प्रार्थियों कि वित्तीय स्थिति के नजरिए से अपील दायर करने के लिए उचित समय नहीं दिया गया है, जिससे प्रार्थियों का अपील दायर करने का अधिकार लगभग समाप्त कर दिया गया है। एडीएम ने प्रार्थी की याचिका को यह कहकर खारिज कर दिया था कि प्रार्थी ने अपील पंद्रह दिन के भीतर दायर नहीं की है। हालांकि प्रार्थी ने दलील दी थी कि चूंकि अपील दायर करने के लिए कम समय का प्रावधान रखा गया है फिर भी उसने समय रहते अपील दायर कर दी थी। अदालत ने मामले से जुड़े तमाम रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद पाया कि प्रार्थी ने पंद्रह दिन के भीतर डीसी को अपील डाक के माध्यम से भेज दी थी और यह भी पाया कि प्रार्थी की अपील पंद्रह दिन के भीतर डीसी कार्यलय में पहुंच गई थी। डीसी ने अपील का निपटारा करने के लिए एडीएम को शक्ति दी और अपील डाक के माध्यम से भेजी। अदालत ने पाया कि डीसी और एडीएम एक भी भवन में स्थापित हैं, फिर भी प्रार्थी कि अपील को डाक के माध्यम से भेजा गया, जिस कारण प्रावधान के अनुसार अपील पंद्रह दिन के भीतर एडीएम कार्यालय नहीं पहुंची। हाई कोर्ट ने डीसी और एडीएम की लचर कार्यप्रणाली पर प्रतिकूल टिप्पणी की है।

एक भवन में डाक से पत्राचार

न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान के राज्य सरकार के उन कर्मचारियों और अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी कड़ी प्रतिकूल टिप्पणी की है, जो एक ही छत के नीचे स्थापित हैं और उसी भवन में स्थापित दूसरे दफ्तर के लिए डाक के माध्यम से पत्राचार करते हैं, जिससे कि सेवादार के जरिए और ई-मेल या अन्य माध्यम से भेजा जा सकता है। इससे समय और सरकारी खजाने दोनों की ही बचत होगी। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान ने ये आदेश प्रार्थी संगीता द्वारा दायर याचिका को स्वीकार करते हुए पारित किए।