Monday, November 19, 2018 05:36 PM

सरकार ने दस महीने में उठाया 2300 करोड़ का कर्ज

आरबीआई से इस बार कम ब्याज दर देख 500 करोड़ लोन, अगले महीने भी इतना ही ऋण लेने की तैयारी

शिमला - जयराम सरकार अपने अभी तक 10 महीने के कार्यकाल में 2300 करोड़ रुपए कर्ज उठा चुकी है। मुख्यमंत्री ने पहले ही यह कहा है कि कर्ज की बैसाखियों से ही सरकार चलेगी, लिहाजा कर्जा तो लेना ही होगा, लेकिन साथ ही यह भी कहा था कि सरकार अपने सीमित संसाधनों में काम करेगी। शायद इस बात को भूलाया जा चुका है। प्रदेश सरकार ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया से 500 करोड़ रुपए का कर्ज शनिवार को लिया है और पुख्ता सूत्रों के अनुसार अगले महीने नवंबर में भी सरकार 500 करोड़ रुपए का और कर्ज लेने को तैयार है। बताया जाता है कि इस बार सरकार ने जो कर्ज लिया है वह केवल कम ब्याज दर को देखते हुए लिया गया है। ये कर्जा साढ़े आठ फीसदी की ब्याज दर पर मिल रहा था, लिहाजा प्रदेश सरकार ने न चाहते हुए भी पैसा ले लिया, जबकि उसे जरूरत नहीं थी। अमूमन सरकार विकास कार्यों को अंजाम देने के लिए कर्जा उठाती है, परंतु इस दफा कम ब्याज दर को देखते हुए कर्ज लिया गया है। हर बार उसे नौ फीसदी से ऊपर की ब्याज दर पर आरबीआई से पैसा मिलता है। राज्य सरकार को इस वित्त वर्ष में 4500 करोड़ रुपए के कर्ज की लिमिट है, जिसमें से अभी तक 2300 करोड़ रुपए का कर्जा सरकार उठा चुकी है। इसमें शनिवार को लिए गए 500 करोड़ रुपए भी शामिल हैं। अभी वह 2200 करोड़ रुपए का और कर्जा उठा सकती है। माना जा रहा है कि लिमिट से शेष बची राशि में से ज्यादा ही तो 1500 करोड़ रुपए का और कर्ज सरकार मार्च महीने तक लेगी और शेष राशि का कर्ज नहीं लिया जाएगा। क्योंकि वर्तमान सरकार को वित्तीय प्लेटफार्म पर फिलहाल ज्यादा दिक्कतें नहीं हैं। वित्त विभाग ने इस पर विस्तार से स्टडी किया है, जिसने सरकार को भी कहा है कि पूरी लिमिट के मुताबिक इस बार कर्जा नहीं लेना पड़ेगा। बता दें कि पंजाब में कर्मचारियों का नया वेतनमान इस साल भी नहीं आ रहा है। इस संबंध में भी हिमाचल सरकार की बातचीत पंजाब के अधिकारियों के साथ हो चुकी है, लिहाजा यहां पर सरकार केवल अंतरिम राहत या महंगाई भत्ता ही अपने कर्मचारियों को एक दफा फिर से देगी।

बोर्ड-निगमों में अभी और तैनातियां

हाल ही में सरकार ने बोर्ड व निगमों में नियुक्तियां की हैं, जिससे भी अतिरिक्त बोझ सरकार पर पड़ेगा। आने वाले दिनों में इसका भी पूरा आकलन होगा कि इन पर कितना अतिरिक्त खर्चा होना है। अभी कुछ और बोर्डों व निगमों में भी तैनातियां की जानी हैं।

संसाधन बढ़ाने पर कोई काम नहीं

प्रदेश सरकार पर अब तक 50 हजार करोड़ रुपए के करीब का कर्जा हो चुका है। कर्ज को महालेखाकार भी अपनी टिप्पणियों में अंकित करते रहे हैं। प्रदेश को संसाधन बढ़ाने के लिए कहा गया है, लेकिन इस तरफ अभी कोई कदम नहीं उठाया गया है।