Friday, September 20, 2019 12:28 AM

सरकार ने महकमे से मांगी असुरक्षित भवनों की रिपोर्ट

शिमला -शहरी विकास विभाग ने प्रदेश सरकार को नगर निगम शिमला सहित अन्य शहरी विकाय क्षेत्रों में असुरक्षित भवनों की रिपोर्ट नहीं दी। हैरानी की बात है कि मानसून के दौरान बार-बार ऐसे भवन कहर बन कर ध्वस्त हो रहे हैं। बावजूद इसके शहरी विकास विभाग अपनी सुस्त कार्यप्रणाली से बाज नहीं आ रहा है। बताया गया कि आरटीओ के समीप जो मकान गिरा वह असुरक्षित है। नगर निगम के दायरे में 84 असुरक्षित भवन हैं, जहां पर लोग जान जोखिम पर डाल कर रह रहे हैं। सूत्रांे से मिली जानकारी के मुताबिक नगर निगम शिमला ने ऐसे भवन मालिकों को नोटिस थमा कर भवन खाली करने को भी कहा है, लेकिन खाली नहीं हुए। ऐसी स्थिति को देखते हुए सरकार ने शहरी विकास विभाग से पूरी रिपोर्ट मांगी है। शिमला में 84 असुरक्षित भवनों में लोग रहे रहे हैं। यहां तक कि जिला शिमला के ठियोग में सात और कोटखाई में भी तीन भवन असुरक्षित हैं। नगर निगम शिमला के दायरे में भवन निर्माण पर एनजीटी के आदेश लागू हो चुके हैं, जिस पर भी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौति दी है। जिस पर सुनवाई अक्तूबर महीने में होनी है। ऐसे में अब अगामी तीन महीने बाद स्थिति साफ हो जाएगी कि शिमला में बहमंजिला भवनों के निर्माण पर क्या होगा। गौरतलब है कि पर्यावरण को बचाने के लिए और आपदा की दृष्टि को देखते हुए 16 जुलाई 2018 यानी पिछले साल नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने राजधानी शिमला में भवन निर्माण मामले में बड़ा फैसला सुनाया था। एनजीटी ने शिमला के कोर और ग्रीन एरिया में कंस्ट्रकशन पर पूरी तरह से रोक लगा दी है और कोर एरिया के बाहर भी सिर्फ अढ़ाई मंजिला भवन निर्माण हो सकते हैं। दिल्ली में 16 जुलाई 2018 को हुई सुनवाई के दौरान एनजीटी ने प्रदेश सरकार की रिव्यू पटिशन को खारिज कर अपना फैसला सुनाया था। इसके साथ-साथ कोर और ग्रीन एरिया में अब तक जितने भी अवैध भवन निर्माण हुए हैं उसे तोड़ने के भी आदेश दिए थे। एनजीटी ने प्रदेश के प्लानिंग एरिया में अवैध भवनों को रेगुलर नहीं करने का भी फैसला किया है। शिमला सहित पूरे प्रदेश में करीब तीन हजार अवैध भवन हैं।