Wednesday, July 17, 2019 09:13 PM

सरयाल क्षेत्र पर्वत चोटियों तक फैला हुआ है

सरयाल  क्षेत्र (डोभी, पिछलीहार, मंडलगढ़, रायसन, शिरढ़, मंदोराल, मंझलीहार, क्यासर, शिलीहार, जिंदौड़, सारी, बसतोरी आदि गांव) ब्यास नदी के दाएं छोर से आरंभ होकर आरंभ में ढलानदार और फिर सीधा चढ़ाई से होता हुआ ऊंची पर्वत चोटियों तक फैला हुआ है...

गतांक से आगे ...

सरयाल  क्षेत्र (डोभी, पिछलीहार, मंडलगढ़, रायसन, शिरढ़, मंदोराल, मंझलीहार, क्यासर, शिलीहार, जिंदौड़, सारी, बसतोरी आदि गांव) ब्यास नदी के दाएं छोर से आरंभ होकर आरंभ में ढलानदार और फिर सीधा चढ़ाई से होता हुआ ऊंची पर्वत चोटियों तक फैला हुआ है। दुर्गम क्षेत्रों और ऊंचे शिखरों के कारण यहां के अनेक पर्वत-शिखर मानव-पहुंच से बाहर हैं। सैंकड़ों किलोमीटर लंबी पर्वत-माला पर देवी फंुगणी का नियंत्रण है। ब्यास नदी के किनारे की किंचित समतल भूमि बड़ी  उपजाऊ है और सड़क के किनारे होने के कारण विदेशी निवासियों ने बहुत पसंद की है।  कैप्टन आर द वंडरलैंड हिमाचल प्रदेश  सीली ने  1870 ई. में पहली  बार बंदरोल में सेब का बागीचा लगाया था। वियिम हैनरी डोनाल ने डोभी में बागीचा लगाया और बंगला बनाया। उसने पहली बार 1927 ई. में कुल्लू में कार लाई जिसके कलपुर्जे मंडी में खोलकर मजदूरों द्वारा कुल्लू  पहुंचाया गया सन् 1928  में पहली बार छोटी गाडि़यां कुल्लू और मनाली के बीच चलना प्रारंभ हुई। कुल्लू शहर के सामने नदी के पार का खराहल क्षेत्र पुराने जमाने में भारत का राजपुताना (वर्तमान राजस्थान) कहलाता था। यह एक तरह का पूरा मरूस्थल था। देश की स्वतंत्रता उपरांत इस क्षेत्र ने काफी प्रगति की है। पूरा क्षेत्र फलदार पौधों के अधीन आ गया है और आज कोई नहीं कह सकता कि कभी  यह क्षेत्र मरूस्थल रहा हो। यहां ब्यास नदी के दाईं ओर डालपुर मैदान स्थित है। कुल्लू नगर के पास ब्यास नदी में सरवरी भूंतर में पार्वती और औट के पास लारजी नाम की  छोटी नदियां आ मिलती है औट से मंडी तक के भाग में पार्वती और  लारजी की तरह नाम की छोटी नदियां आ मिलती हैं। औट से मंडी तक के भाग में पार्वती और लारजी की तरह ‘बाखली और ‘जिरुणी नामक खड्डें पूर्वी पर्वतीय ढलानों से बहती हुई पंडोह में अलग-अलग स्थानों पर ब्यास  में आ मिलती है। पंडोह और मंडी नगर के बीच चौहार घाटी में से उत्तर की ओर से ऊलह नदी इस में समा जाती है। मंडी नगर के पास दक्षिण दिशा से बहकर आने वाली सुकेती खड्ड इसमें प्रवेश करती है। मंडी से हारसीपतन के बीच तुंगल सरकाघाट और धर्मपुर क्षेत्र के जल है।