सल्तनत काल की अव्यवस्था से हिंदूर ने लाभ उठाया

1441 ई. से लेकर 1451 ई. तक दिल्ली पर सैयद वंश का राज रहा और 1451 से 1522 ई. तक लोधी वंश के सुलतानों  का राज रहा। इन वंशों के सुलतान के काल में अधिकांशतः अव्यवस्था फैली रही। इसलिए इनका ध्यान पहाड़ी रजवाड़ों की ओर से किसी सीमा तक दूर रहा। हिंदूर ने भी इस स्थिति से अवश्य लाभ उठाया होगा...

गतांक से आगे ...

 नारायण चंद : (1477-1522 ई.)

 अतः उसने अपनी पुत्री का विवाह नारायण चंद से करने की इच्छा प्रकट की। रानी ने तो इसे मान लिया परंतु हिंदूर के मंत्री ने इसका विरोध किया कि नूरपुर के राजा उच्च कुल से नहीं है। इस पर नूरपुर के राजा ने अपनी पुत्री का विवाह कहलूर के राजा के साथ कर दिया। उसने कहलूर को सतगढ़ का किला दे दिया। 1441 ई. से लेकर 1451 ई. तक दिल्ली पर सैयद वंश का राज रहा और 1451 से 1522 ई. तक लोधी वंश के सुलतानों  का राज रहा। इन वंशों के सुलतान के काल में अधिकांशतः अव्यवस्था फैली रही। इसलिए इनका ध्यान पहाड़ी रजवाड़ों की ओर से किसी सीमा तक दूर रहा। हिंदूर ने भी इस स्थिति से अवश्य लाभ उठाया होगा। नारायण चंद के  उपरांत उसका पुत्र राम चंद गद्दी पर बैठा। बहलोल लोदी ने 1451 ई. में दिल्ली में प्रथम अफगान (लोदी) वंश की नींव डाली इसके पहले के सुलतान तुर्क थे। इस वंश का अंतिम शासक इब्राहिम लोदी था, जिसने आगरा की गद्दी से 1517 से लेकर 1526 ई. तक शासन किया।

राम चंद : (1522-1568 ई.)

यह राजा बड़ा वास्तुकला प्रेमी था। उसने रामगढ़ के किले का निर्माण करवाया और रामशहर नगर को बसाया। बाद में रामशहर को अपनी गर्मी की राजधानी बनाया। कहते हैं कि वह प्रजा से उपज का आधा भाग कर के रूप में वसूल किया करता था रामचंद के राज्य काल में 1526 ई. में  बाबर ने दिल्ली पर अधिकार करके मुगल राज्य की नींव डाली। इस भाग-दौड़ में हुमायूं के कुछ सैनिकों  ने हिन्दूर की पहाडि़यों में प्रवेश करने का प्रयास भी स्थापित कर लिया और संभवतः अकबर ने अन्य पहाड़ी राजाओं  के साथ हिंदूर को भी अपने आधिपत्य में लिया होगा।

संसार चंद : (1568-1618 ई.)

 इस राजा ने नालागढ़ में एक बहुत सुंदर महल बनाया और एक प्राचीन ‘ सरोवर कला कुंड’ की मुरम्मत करवाई। इस समय दिल्ली की गद्दी पर मुगल सम्राट अकबर का शासन था, तथा उत्तरी भारत में सभी राज्य  केंद्रीय सत्ता के प्रति नतमस्तक थे। अकबर के सौतेले भाई मिर्जा हाकिम ने 1566-67 ई. में पंजाब पर आक्रमण कर दिया, लेकिन जब कई भगौडे़ सैनिक ‘ हिंदूर’  राज्य की सीमा में जान बचाने के लिए पहुंचे थे।

धर्म चंद : (1618-1701) ई.

 राजा संसार चंद के उपरांत पुत्र धर्म चंद गद्दी पर बैठा। इस राजा ने लोगों से लिए जाने वाले राजकर की आधा से घटा करके छठा हिस्सा कर दिया। कहलूर के इतिहास में उल्लेख मिलता है कि कल्याण चंद सन् 1630 ई. में  कहलूर की गद्दी पर बैठा। उसने हिंदूर की सीमा पर एक किला बनवाया।    - क्रमशः   

Related Stories: