सही मैनेजमेंट से मिलती है सफलता

मुर्गीपालन में करियर से संबंधित विस्तृत जानकारी प्राप्त करने के लिए हमने सुरेंद्र से बातचीत की। प्रस्तुत हैं बातचीत के प्रमुख अंश...

डा. सुरेंद्र कुमार कपिल

सहायक निदेशक, हिम हैचरी कुक्कुट प्रजनन केंद्र सुंदरनगर, मंडी

युवाओं के लिए मुर्गीपालन में करियर का क्या स्कोप है?

मुर्गीपालन में युवाओं के लिए काफी स्कोप है। कम निवेश में अधिक मुनाफा होता है। भूमि की भी कम जरूरत होती है। बाजार में अगर दाम अच्छे मिलें तो इस कारोबार के काफी सार्थक परिणाम सामने आते हैं।  

मुर्गीपालन के लिए कितना पढ़ा-लिखा होना जरूरी है?

मुर्गीपालन का कारोबार कम पढ़ा लिखा युवा भी कर सकता है। लेकिन फिर भी कम से कम पांच पास होना जरूरी है। ताकि वह तकनीकी तौर पर प्रशिक्षण प्राप्त करके दक्ष हो सके और मुर्गीपालन के कार्य को अच्छी और बेहतर ढंग से समझ कर परख सके।

इस करियर में क्या कोई विशेषज्ञ कोर्स किए जा सकते हैं?

मुर्गीपालन के करियर में बहुत से कोर्स होते हैं, लेकिन कारोबार सरकारी योजनाओं के अनुरूप चलाने के लिए 15 दिनों का कोर्स जरूरी होता है।

हिमाचल में मुर्गी पालन का प्रशिक्षण कहां दिया जाता है?

मुर्गी पालन का प्रशिक्षण मंडी जिला के सुंदरनगर और सिरमौर के नाहन के अलावा शिमला के  टुटीकंडी व चौंतड़ा में दिया जाता है। वैसे तो प्रशिक्षण कोई भी दे सकता है, लेकिन सरकार की ओर से प्रमाणित चार ही स्थान है। जिससे युवाओं को इसमें कारोबार करने से योजनाओं का भी लाभ मिलता है।

प्रशिक्षण लेने के बाद रोजगार के अवसर किन क्षेत्रों में उपलब्ध होते हैं?

प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद युवाओं को मुर्गीपालन के अलावा, मीट की दुकान, अंड्डे, कुक्कट गेम्ज व कुक्कट केंद्र से खाद का भी कारोबार युवा कर सकते हैं।

मुर्गीपालन में आमदनी किस हिसाब से और कितनी होती है?

मुर्गी पालन में आमदनी मुर्गे व मुर्गियों की किस्म के हिसाब से होती है। जिसमें बॉयलर के दाम बाजार में अच्छे मिलते हैं और लेयर के कम। इस लिहाज से युवाओं के ऊपर निर्भर करता है कि वह बॉयलर किस्म के मुर्गीपालन को तव्वजो दें तो अंड्डों के साथ- साथ मीट का भी अच्छा कारोबार होता है। वैसे 500 मुर्गीपालन पर एक माह में औसतन 10 हजार के करीब आमदनी होती है।

मुर्गियों को कौन-कौन सी बीमारियां लगती हैं और उनसे कैसे बचाव किया जा सकता है?

मुर्गियों को कीटाणु, पेट में कीड़े और डायरिया जैसी बीमारियां होती हैं। मुर्गियों को रोग मुक्त करने के लिए कुक्कट पालन केंद्र में अच्छा व उचित रखरखाव होना चाहिए। साफ- सफाई की उचित व्यवस्था होनी चाहिए। बीमारी का पता चलने पर पशु पालन विभाग के वैटरिनरी विशेषज्ञों से समय पर ही परामर्श कर लेना चाहिए।

इस करियर में युवाओं को किन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है?

बाजार में डिमांड के हिसाब से माल की खपत तो होती है, लेकिन दाम सही नहीं मिलने से कुछ समय के लिए चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। तकनीकी प्रशिक्षण, प्रतिस्पर्धा, बीमारियों की गिरफ्त में आने पर सारे का सारा प्लॉट खत्म होना, फीड के दाम ऊपर नीचे होना इस क्षेत्र में दिक्कतें पेश करते हैं। जिनका सामना धैर्य, साहस व हिम्मत से युवाओं को करके  आगे  बढ़ाना चाहिए।

जो युवा मुर्गीपालन में करियर बनाना चाहते हैं, उनके लिए सफल होने के कुछ टिप्स दें।

मेहनत से  ही हर काम को पूरा किया जा सकता है। इस करियर में घर द्वार  ही स्वरोगार के अवसर हैं। अच्छी ट्रेनिंग होना जरूरी है।  कम निवेश के साथ ही कम समय में बड़े मुनाफे का कारोबार है। बस मैनेजमेंट सही होनी चाहिए और सफलता आपके कदम चूमेंगी।

-जसवीर सिंह, सुंदरनगर

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