Monday, April 06, 2020 06:26 PM

सारंगपाणि स्‍वामी मंदिर

कुंभकोणम तमिलनाडु प्रदेश में कावेरी नदी के तट पर मायावरम से  32 किमी. की दूरी पर स्थित एक प्राचीन नगर है। प्राचीन समय में यह नगर शिक्षा का महान केंद्र हुआ करता था। यह स्थान दक्षिण भारत के प्रमुख तीर्थ स्थलों में से एक है। यहां पर कुंभ मेले का आयोजन भी होता है...

मान्यता- कुंभकोणम को संस्कृत में कुंभघोणम कहा जाता है। दक्षिण भारत की इस पावन भूमि पर प्रत्येक बारह वर्ष के पश्चात कुंभ मेले का आयोजन किया जाता है। एक मान्यता के अनुसार यह माना जाता है कि ब्रह्मा ने अमृत से भरे कुंभ को इसी स्थल पर रखा था। इस अमृत कुंभ से कुछ बूंदे बाहर छलक कर गिर गई थीं, जिस कारण यहां की भूमि पवित्र हो गई। इसलिए इस स्थान को कुंभकोणम के नाम से भी जाना जाता है।

सारंगपाणि कुंभकोणम प्रसिद्ध तीर्थ : तमिलनाडु के इस प्रसिद्ध तीर्थ स्थल के समीप अनेक मंदिरों को देखा जा सकता है। यहां पर सौ से भी ज्यादा मंदिर स्थापित हैं। इनमें से कुछ प्रमुख मंदिर जैसे कि नदी के तट पर ही महाकालेश्वर तथा अन्य कई देव मंदिर हैं, जिसमें सुंदरेश्वर शिवलिंग तथा मीनाक्षी जो मां पार्वती का रूप है की सुंदर प्रतिमाएं स्थापित हैं। इसके समीप ही महामाया का मंदिर है। लोगों की विचारधारा अनुसार महामाया के मंदिर में स्थापित मूर्ति स्वयं प्रकट हुई थी।

मुख्य दर्शनीय स्थल : महाधर्म सरोवर में कुंभेश्वर मंदिर के पास ही नागेश्वर मंदिर स्थापित है। इस मंदिर में भगवान शंकर लिंग रूप में प्रतिष्ठित हैं। यहां के परिक्रमा मार्ग में अन्य मूर्तियां भी हैं, जो सभी को आकर्षित करती हैं। यहां सूर्य भगवान का मंदिर भी स्थापित है। किंवदंती है कि भगवान सूर्य ने यहां भगवान शिव की आराधना की थी, जिसका एक चमत्कारी पहलू देखने को मिलता है, जिसमें नागेश्वर लिंग पर वर्ष के एक दिन सूर्य की किरणें पड़ती हुई देखी जा सकती हैं। यहां के दर्शनीय स्थलों में प्रमुख हैं महाधर्म सरोवर, रामस्वामी मंदिर, वेदनारायण मंदिर। सारंगपाणि कुंभकोणम में इन मंदिरों के अलावा कालहर्सीश्वर, बाणेश्वर, गौतमेश्वर, सोमेश्वर आदि मंदिर भी स्थापित हैं।