Friday, October 18, 2019 05:14 PM

सालों से संगीतमय फव्वारा ‘खामोश’

मंदिर न्यास ज्वालामुखी के लाखों रुपए से बने फव्वारे के न चलने से यात्री व स्थानीय लोग प्रशासन से खफा

ज्वालामुखी -मंदिर न्यास ज्वालामुखी के लाखों रूप्यों से बने संगीतमय फ व्वारे के पिछले कई सालों से बंद रहने से बाहर से आने वाले यात्री व स्थानीय लोग मंदिर न्यास व प्रशासन के उदासीन रवैये से बेहद खफा है। गौरतलब है कि लाखों की लागत से यह संगीतमय फ व्वारा मंदिर न्यास ने यात्री निवास के साथ बाहर से आने वाले यात्रियों व स्थानीय लोगों को आकर्षित करने के लिए बनाया था। उस दौरान इस फव्वारे पर लगभग बीस लाख रुपए खर्च किए गए थे। कई सालों तक यह फव्वारा यात्रियों व स्थानीय लोगों का स्वस्थ मनोरंजन करता रहा दूर-दूर तक इसकी चर्चा होने लगी, क्योंकि अपनी किस्म का यह एकमात्र संगीतमय फव्वारा हिमाचल प्रदेश में है, जो संगीत की धुनों पर अपने रंग बिखेरता है तथा पानी की लहरें संगीत के साथ मिल कर रंग-बिरंगी रोशनियों के साथ वे छटा विखेरती है कि मन बरबस ही सपनों में खो जाता है। राज्यपाल शासन में वर्ष 1993 में राज्यपाल के मुख्य सलाहकार रहे पीपी श्री वास्तव ने संगीतमय फव्वारे को मैसूर लैंपस के इंजीनियरों से तैयार करवाया था। साथ ही दीप सत्संग भवन के साथ इसकी महत्ता को और भी चार चांद लग गए थे। शाम ढलते ही लोग संगीतमय फव्वारे को देखने व संगीत की धुनों को सुनने के लिए निकल जाते थे और अपने शरीर की थकान व गमों को भूल कर पानी की रंग-बिरंगी तरंगों को देखकर संगीत की मीठी धुनों को सुन कर राहत पाते थे, परंतु इसके खराब हो जाने और इसकी मुरम्मत को नजरअंदाज कर देने के मंदिर न्यास व प्रशासन के रवैये से बाहर से आने वाले यात्री व स्थानीय लोग नाराज हो रहे है। इस संदर्भ में मंदिर अधिकारी तहसीलदार बीडी शर्मा का कहना है कि हमने कई कारीगरों को इस संदर्भ मंे बुला कर इसे चैक भी करवाया, परंतु ठीक नहीं हो पाया है, फिर भी प्रयास किया जाएगा कि यह जल्दी ठीक हो जाए और लोगों के मनोरंजन का साथी बन सके। वहीं, स्थानीय विधायक रमेश धवाला  ने कहा कि वे मैसूर लैंपस बालों से संपर्क करेंगे और विशेष इंजीनियर की टीम बुला कर इस धरोहर को जिंदा रखेंगे, ताकि यह लोगों को स्वच्छ मनोरंजन कर सके। और बाहर से आने वाले यात्रियों को भी इसका लाभ मिल सके।