Tuesday, March 31, 2020 01:53 PM

साहब! तीन माह से नहीं मिला वेतन

ऊना - हिमाचल प्रदेश कोरोना वायरस के बीच हिमाचल प्रदेश में कार्य कर रहे 2600 एसएमसी शिक्षकों के परिवार पर आर्थिक संकट आ गया है। एसएमसी अध्यापक स्टेट यूनियन के मीडिया प्रभारी एवं ऊना जिला के प्रधान अनवर खान, उपप्रधान नवदीप कुमार, महासचिव चंद्र मोहन, सचिव पंकज, सहसचिव मुकेश कुमार, को-आर्डिनेटर सतीश कुमार, कैशियर प्रवेश कुमारी, चीफ एडवाइजर पूनम कुमारी, अंजना कुमारी और मोनिका द्विवेदी ने कहा कि दरअसल प्रदेश में बजट सत्र चल रहा था लेकिन कोरोना वायरस के चलते  सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किया गया है। सत्र में सरकार ने सभी सरकारी कर्मचारियों के भत्ते आदि भी बढ़ाए हैं। कोरोना वायरस के मध्य राहत राशि का भी प्रावधान किया है, लेकिन 2600 एसएमसी शिक्षकों के लिए न ही बजट सत्र में कोई प्रावधान किया गया है और न ही कोरोना वायरस के लिए विशेष राहत राशि प्रदान की गई है। यहीं नहीं दिसंबर माह के बाद अभी तक टीजीटी और सी एंड वी अध्यापकों को वेतन भी प्राप्त नहीं हुआ है। इसके बाद इनके परिवारों पर आर्थिक संकट आ गया है। कोरोना वायरस के चलते 2600 एसएमसी परिवार के अन्य लोग घर में कैद हो गए हैं। पिछले तीन महीने से वेतन न मिलने से परिवार आर्थिक समस्या से जूझने को मजबूर हो गए है। अन्य सरकारी स्कूल में कार्यरत अध्यापकों की तरह एसएमसी शिक्षक भी अपनी पूरी सेवाएं दे रहे है, लेकिन सरकार उनके साथ सौतेला व्यवहार कर रही है। अनवर खान ने कहा कि एसएमसी यूनियन द्वारा पिछले काफी समय से सरकार से गुहार लगाई जा रही है कि एसएमसी अध्यापकों के लिए उर्दू और पंजाबी अध्यापकों की तर्ज पर कांट्रैक्ट पालिसी बने लेकिन सरकार ने पिछले तीन महीने से वेतन भी नहीं दिया है। ऐसे में हमारे परिवारों पर आर्थिक समस्या आ गई है। उनका कहना है कि इस समय पूरा प्रदेश कोरोना वायरस को लेकर जूझ रहा है। 15 अप्रैल तक भारत में लॉकडाउन हो गया हैं, लेकिन इस बीच हमारे परिवार पर विपदा दोगुनी हो गई है। प्रदेश में एसएमसी के 2635 परिवार पर आर्थिक विपदा आ गई है। एसएमसी अध्यापकों ने मुख्यमंत्री जयराम सरकार से गुहार लगाई है कि कोरोना वायरस के इस आपदा के समय उन्हें तीन महीने की तनख्वाह सहित राहत राशि भी प्रदान करें।