Saturday, May 30, 2020 09:00 AM

साहसी भारतवासी

हर मोर्चे पर उतरा है खरा

सर पर कफन बांध

डटा है साहसी भारतवासी

साहस का निवाला है डर

यह पुलाव नहीं है ख्याली

डर को पछाड़ देशभक्तों ने

खतरे में पड़ी आजादी है निकाली

लहू और लहूलुहान ओढ़े हैं भारतमाता ने

गुलामी की बेडि़यां यूं ही नहीं

कटी हैं

सजा-सजाकर थाली में

फांसी के फदों की गांठें

देशभक्तों को झुला-झुलाकर हुई हैं ढीली

मौत की छाती पर बैठना

रही है शहीदी की जिंदादिली

यह आजाद जवानी खून में है खिली

सर ऊंचा और सीने यूं ही नहीं तने हैं

ये महल शहीदों की चिताओं पर बने हैं।

-भीम सिंह परदेशी, महादेव, सुंदरनगर, हिमाचल प्रदेश