Thursday, April 18, 2019 06:21 PM

सिर्फ इंस्पेक्शन से काम नहीं चलेगा

शिमला—छात्र अभिभावक मंच ने निजी स्कूलों की मनमानी व भारी फीसों के खिलाफ शिक्षा निदेशालय के अधिकारियों द्वारा 11 अप्रैल तक प्रदेश के जिला मुख्यालयों में की गई इंस्पेक्शन की रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की मांग उठाई है। मंच ने कहा है कि केवल इंस्पेक्शन से बात नहीं बनेगी। मंच का आंदोलन तब तक चलेगा जब तक छात्रों व अभिभावकों को फीस कटौती के रूप में राहत नहीं मिलती है। 18 मार्च व 8 अप्रैल की शिक्षा निदेशालय की अधिसूचना के बावजूद किसी भी स्कूल ने फीस कटौती के लिए अपने स्तर पर पहलकदमी नहीं की है, जिससे साफ  है कि निजी स्कूल मनमानी से बाज नहीं आ रहे हैं। मंच के संयोजक विजेंद्र मेहरा ने मांग की है कि प्रदेश सरकार निजी स्कूलों की मनमानी पर रोक लगाए। इसके लिए सबसे पहले प्रदेश सरकार फीस का ढांचा तैयार करे। प्रदेश उच्च न्यायालय  के निर्देशों के बाद निजी स्कूलों ने लूट का तरीका बदल दिया है। इसके तहत अब फीस बुकलेट में हर वर्ष एडमिशन फीस व बिल्डिंग फंड का कॉलम हटाकर एनुअल चार्जेज, ट्यूशन फीस, स्मार्ट क्लास रूम फीस मोबाइल मैसेज फीस व अन्य तरह की फीसों के कॉलम बना दिए गए हैं व एडमिशन फीस को इन तरह-तरह की फीसों में एडजस्ट कर दिया गया है। इस तरह फीस बुकलेट से सिर्फ एडमिशन फीस का कॉलम तो हट गया है परंतु एडमिशन फीस की राशि अन्य फीसों में एडजस्ट कर दी गई है। अगर वाकई में अगली कक्षाओं में एडमिशन फीस नहीं ली जा रही है जैसा कि स्कूल प्रबंधन दावा कर रहे हैं तो फि र एडमिशन होने के बाद अगली कक्षाओं में एडमिशन फीस न होने के कारण फीस काफी कम होनी चाहिए थी, लेकिन फीस तो अगली कक्षाओं में और ज़्यादा वसूली जा रही है, जिससे स्पष्ट है कि निजी स्कूलों के प्रबंधन आई वॉश कर रहे हैं तथा छात्रों व अभिभावकों की लूट बेरोकटोक तरीके से जारी है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक तरफ  भारी फीसें वसूली जा रही हैं वहीं दूसरी ओर ड्रेस व किताबों के नाम पर लूट और ज़्यादा भयानक है। स्कूलों द्वारा ड्रेस व किताबों के नाम पर प्रति छात्र प्रति वर्ष अमूमन बीस से पच्चीस हजार रुपए वसूले जाते हैं। ये किताबें सीबीएसई गाइडलाइनज के तहत उपलब्ध करवाई जाने वाली किताबों से पांच से आठ गुणा अधिक कीमत पर बेची जा रही हैं। ड्रेस भी साधारण दुकानों के मुकाबले तीन गुणा रेट पर उपलब्ध करवाई जा रही है। हजारों रुपए की किताबें व ड्रेस खरीदने पर अभिभावकों को एक भी रुपया नहीं छोड़ा जाता है, इस तरह स्कूलों द्वारा फीसों, ड्रेस व किताबों के माध्यम से भारी लूट की जा रही है, जिस पर कोई भी सख्त कदम शिक्षा विभाग द्वारा नहीं उठाया जा रहा है।