Monday, October 21, 2019 08:37 AM

सीजन-7 में बिखेरा आवाज का जादू

प्रदेश के अग्रणी समाचार पत्र ‘दिव्य हिमाचल’ मीडिया ग्रुप द्वारा आयोजित हिमाचल की आवाज सीजन-7 में अपनी मखमली आवाज से सोलन की रहने वाली प्रियंका ने अपना जादू बिखेर सबको दीवाना कर दिया व हिमाचल की आवाज सीजन-7 की विजेता का पुरस्कार प्राप्त किया। जानकारी के अनुसार 21 वर्षीय प्रियंका ने चन्ना म्यूजिक अकादमी शिमला से अपने संगीत के क्षेत्र का सफर शुरू किया। इसके बाद प्रियंका ने प्राचीन कला केंद्र चंडीगढ़ व भारतखंडे से वोकल म्यूजिक में विशारद की है और अब हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से म्यूजिक में मास्टर डिग्री कर रही हैं। मध्यमवर्गीय परिवार से संबंध रखने वाली प्रियंका ने कई प्रतियोगिताओं में भाग लिया व विजेता रहीं। अब हिमाचल की आवाज मंच पर अपनी प्रतिभा के झंडे गाड़ कर जिलाभर का नाम रोशन किया है। प्रियंका ने बताया कि ‘दिव्य हिमाचल’ के मेगा इवेंट में भाग लेकर उन्हें काफी अच्छा लगा व गुणी जजेज की सलाह उन्हें काफी प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि दिव्य हिमाचल प्रदेश की लड़कियों के लिए सुरक्षित मंच प्रदान करता है, जिसके लिए वह मीडिया ग्रुप की आभारी हैं। उन्होंने कहा कि लड़कियों को सपना देखने व पूरा करने का पूरा अधिकार है व लड़कियों को हमेशा प्रोत्साहित करना चाहिए। प्रियंका ने कहा कि वह अपनी कामयाबी का श्रेय अपने गुरु विनोद चन्ना व गुरु मां कैशल्या चन्ना को देती हैं। जिन्होंने उन्हें संगीत के क्षेत्र में निपूर्णता पाने की राह दिखाई व हर कदम पर उनका साथ दिया। गौर रहे कि प्रियंका के पापा रामनाथ ठाकुर जिला मंडी में पोलिटिकल साइंस के लेक्चरर हैं और माता नीलम ठाकुर नेशनल हाई-वे में सुपरवाइजर के पद पर कार्यरत हैं और प्रियंका का एक छोटा भाई अनमोल ठाकुर है, जो चंडीगढ़ से बीसीए कर रहा है। प्रियंका ठाकुर ने आर्या गर्ल्ज स्कूल से जमा दो जबकि आरकेएमवी शिमला से स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूर्ण की है। फोक एवं क्लासिकल म्यूजिक में निपुर्ण प्रियंका कई घंटों तक गायकी का रियाज करती हैं। प्रियंका का कहना है कि आज की युवा पीढ़ी अपनी संस्कृति से दूर होती जा रही है, जो कि सही नहीं है। उनका कहना है कि वह हमेशा प्रदेश एवं देश की संस्कृति को बचाने एवं सुदृढ़ करने के लिए हमेशा तत्पर हैं।

शिक्षा

* प्राचीन कला केंद्र से विशारद

* एचपीयू से ले रही एमए म्यूजिक की शिक्षा

* कई प्रतियोगिता में ले चुकीं भाग

* सोलन की आवाज बनी

* हिमाचल की आवाज की विजेता

प्रियंका की कामयाबी पर हर्ष जताया

संगीत गुरु विनोद चन्ना ने कहा कि प्रियंका एक प्रतिभाशाली युवती है। जिसमें संगीत को सीखने की ललक है। उन्होंने कहा कि ‘दिव्य हिमाचल’ मीडिया ग्रुप के माध्यम से लोक संस्कृति व भारतीय संस्कृति संरक्षित है।  जिसके लिए मीडिया ग्रुप बधाई का पात्र है।

मोहिनी सूद, सोलन

किस्मत और भाग्य के साथ मेहनत भी जरूरी

प्रियंका अपने माता-पिता के साथ

हिमाचल की आवाज बनना आपके जीवन या करियर में क्या महत्त्व रखता है?

यह मेरे जीवन में बहुत महत्त्व रखता है। यह मेरे लिए बहुत गर्व की बात है कि मुझे यह सम्मान मिला। किसी भी इनसान के लिए उसकी जन्म भूमि का खिताब मिलना बहुत बड़ी उपलब्धि होती है जिसे मैं शब्दों में बयां नहीं कर सकती, इस सम्मान को पाकर मुझे बहुत खुशी और गर्व महसूस हो रहा है।

संगीत से आपका लगाव कैसे हुआ तथा पहली पायदान क्या रही?

संगीत में मेरा लगाव बचपन से था। मुझे पुराने गाने सुनना बहुत पसंद था व गाने की भी इच्छा रहती थी पर कहते हैं न बिन गुरु ज्ञान नहीं इसलिए मैंने विनोद कुमार चन्ना जी के पास संगीत की शिक्षा लेना शुरू किया और अब जो भी मैं गा पा रही हूं वह सब मेरे गुरु जी की बदौलत है।

लोक संगीत से प्रोफेशनल गायन के रिश्ते में आपकी राय?

मेरा मानना है कि प्रोफेशनल गाना अच्छी बात है पर प्रोफेशनल से मतलब यह नहीं है कि आप अपने लोक गायन को भूल जाएं। लोक गायन हमारी नींव है, हमारी संस्कृति हमारी परंपरा है तथा हमें लोक संगीत का ख्याल रखना चाहिए। हम प्रोफेशन में भी लोक संगीत को जोड़ सकते हैं।

किसी भी गायक के लिए संगीत की औपचारिक शिक्षा कितनी जरूरी?

मैं यह मानती हूं कि बिन गुरु ज्ञान नहीं। हम चाहे कितना भी अच्छा क्यों न गाते हों मगर  हम क्या गा रहे हैं यह समझ हमें सीखने से ही  मिलती है। गुरु ही हमें रास्ता दिखा सकते हैं, एक मात्र गुरु ही हमें हमारी गलती पर टोकते हैं। आप बिना पढ़ाई किए किसी डर से आपरेशन बिलकुल ठीक करने की उम्मीद कैसे कर सकते हैं। सीखना बहुत जरूरी है। संगीत में रुचि रखने वाले सभी विद्यार्थियों को संगीत सीख लेना चाहिए।

आपको किस पसंदीदा गायक या गायिका की शैली पसंद है?

वैसे तो सारे गायकों का गायन मुझे पसंद है। पर मैं क्लासिकल म्यूजिक में ज्यादा रुचि रखती हूं। इसी कारण पंडित भीमसैन जोशी , वैकटेश कुमार , अश्वनी बिंदे  को ज्यादा सुनती हूं और सुगम संगीत में मुझे सोनू निगम जी, लता जी बहुत पसंद हैं।

सपनों और हकीकत के बीच किस्मत और मेहनत को किस तरह देखती हैं?

मेरे लिए तो सपनों को अगर हकीकत बनाना है तो मेहनत बहुत जरूरी है। मेहनत कभी बेकार नहीं जाती, भले ही देर से कुछ अच्छा रिजल्ट मिले मगर मिलता जरूर है। किस्मत को भी पलटने की ताकत मेहनत रखती है और मेहनत  का फल हमेशा मीठा होता है।

गुरु की महिमा में शिष्य के हुनर या व्यक्तित्व विकास की अनिवार्यता क्यों जरूरी मानती हैं?

एक गुरु ही है जो अपको सच्च से रू-ब-रू करवाता है। गुरु ही आपको सच्च से मिलवाता है। गुरु के बिना शिक्षा कुछ भी नहीं और गुरु के चरणों में साफ दिल रखने वाला शिष्य एक उच्च कोटी का कलाकार जरूर बनता है, उसके व्यक्तिगत विकास के लिए भी गुरु की ही महिमा शामिल रहती है। गुरु के आशीर्वाद से कुछ भी संभव है। इसलिए कहते हैं गुरु ब्रह्मा गुरु विष्णु, गुरु देवो महेश्वरा, गुरु साक्षात परब्रह्म तसमें श्री गुरुवे नमः। मैं अपनी  कामयाबी का श्रेय अपनी संगीत गुरु मां कौशल्या व गुरु विनोद चन्ना को देती हूं, जिनकी बदौलत मैं यह मुकाम हासिल कर पाई।

अब तक आप अपने  किस  प्रदर्शन से अभिभूत हुई या किसी तारीफ  की अनुगूंज आपको शक्ति दे गई?

सच तो यह है कि मैं अपनी किसी तारीफ को याद नहीं रखती, क्योंकि मेरे गुरु जी कहते हैं कि खुद मेहनत करो, अच्छा काम करो और तारीफ हमेशा पीछे छोड़ दो वरना आपकी आगे बढ़ने की शक्ति कम हो जाएगी। मुझे आगे बढ़ने की शक्ति मेरे गुरु जी और गुरु मां से मिलती है। उनका आशीर्वाद ही मुझे आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।

भविष्य की कल्पना में प्रियंका खुद को कहां देखती हैं?

भविष्य में भी मैं खुद को आगे बढ़ते ही देखती हूं। क्योंकि अगर मैंने कोई जगह चुन ली तो तब मैं उस जगह पर पहुंचूगी तो मैं रुक जाऊंगी औरे मैं रुकना नहीं चाहती। मुझे बस आगे चलना है, आगे बढ़ना है, बहुत मेहनत करनी है।

गीत-संगीत के अलावा फुर्सत में क्या करती हैं?

गीत संगीत के अलावा वैसे मुझे जीवन में कुछ और काम नहीं है। मेरा अधिकतर समय रियाज में, पढ़ाई में जाता है। मगर मुझे कभी मौका मिलता है तो मैं शांत सी जगह में अपने परिवार के साथ घूमना पसंद करती हूं।

गायन की विद्या में तीन शर्तें जिन्हें आजमाती हैं?

मेरा रोज का पहला नियम रियाज है। दूसरा नियम गुरु के प्रति पूर्ण श्रद्धा और निष्ठा। तीसरा नियम अपनी कामयाबी को भुला कर अपनी गलतियों को ढूंढना और ठीक करना है।

कोई ख्वाब जो धीरे से हर दिन कान में कुछ कह जाता है?

मैं रोज खुद से यही कहती हूं कि अभी किनारे से समुद्र को देखती हूं, डूबना अभी बाकी है, बहुत दूर जाना है बहुत मेहनत करना बाकी है।

आपकी पसंद का कोई गीत?

लता जी का..... मेरी आवाज ही पहचान है मेरा पसंदीदा गीत है।

हिमाचली बोली में आपकी पसंद का कोई गीत?

बनका मुलका हिमाचल..... छोटी उपर कैलाशों।