Friday, December 13, 2019 07:20 PM

सीजेआई दफ्तर आरटीआई दायरे में

रिटायरमेंट से पहले मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने दिया एक और बड़ा फैसला

नई दिल्ली - सुप्रीम कोर्ट के चीफ  जस्टिस का ऑफिस भी कुछ शर्तों के साथ सूचना के अधिकार कानून (आरटीआई) के दायरे में आ गया है। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को ऐतिहासिक फैसले में कहा कि सीजेआई का ऑफिस भी पब्लिक अथॉरिटी है। इसे सूचना के अधिकार कानून की मजबूती के लिहाज से बड़ा फैसला माना जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सभी जज आरटीआई के दायरे में आएंगे। सुप्रीम कोर्ट ने इस तरह से साल 2010 के दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पारदर्शिता के मद्देनजर न्यायिक स्वतंत्रता को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। सीजेआई ने कहा कि कॉलेजियम के द्वारा सुझाए गए जजों के नाम ही सार्वजनिक किए जा सकते हैं। फैसले पर जानकारी देते हुए प्रशांत भूषण ने कहा कि पारदर्शिता को बरकरार रखने के लिए यह जरूरी था। जजों की नियुक्ति को डिसक्लोज करने को भी जस्टिस चंद्रचूड़ ने सूचना के अधिकार के तहत माना है। जजों द्वारा चीफ  जस्टिस के सामने संपत्तियों का ब्यौरा देने को इस दायरे से बाहर रखने का निर्णय लिया गया है। बता दें कि ये अपीलें सुप्रीम कोर्ट के सेक्रेटरी जनरल और शीर्ष अदालत के केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी द्वारा दिल्ली हाई कोर्ट के साल 2009 के उस आदेश के खिलाफ  दायर की गई थी, जिसमें कहा गया है कि सीजेआई का पद भी सूचना का अधिकार कानून के दायरे में आता है। सुप्रीम कोर्ट के चीफ  जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच जजों की संविधान पीठ ने इस पर फैसला सुनाया है। इसमें चीफ  जस्टिस के अलावा जस्टिस एनवी रमन्ना, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस संजीव खन्ना शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई पूरी कर चार अप्रैल को ही अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। टॉप कोर्ट ने कहा था कि कोई भी अपारदर्शी प्रणाली नहीं चाहता है, लेकिन पारदर्शिता के नाम पर न्यायपालिका को नुकसान नहीं पहुंचाया जा सकता। बता दें कि सीजेआई रंजन गोगोई 17 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं और उन्होंने रिटायरमेंट से पहले एक और बड़ा फैसला लिया है। इससे पहले उन्होंने हाल ही में अयोध्या जमीन विवाद पर ऐतिहासिक फैसला सुनाया था।

तीन तलाक कानून पर केंद्र से मांगा जवाब

नई दिल्ली - सुप्रीम कोर्ट ने तीन बार तलाक कह कर संबंध विच्छेद करने को दंडनीय अपराध बनाने के कानून की वैधानिकता को चुनौती देने वाली ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) की याचिका पर केंद्र से बुधवार को जवाब मांगा। जस्टिस एनवी रमण की अध्यक्षता वाली पीठ ने नोटिस जारी करते हुए मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की याचिका मुस्लिम महिला; विवाह पर अधिकारों का संरक्षण अधिनियम, 2019 को चुनौती देने वाली अन्य याचिकाओं के साथ जोड़ दी। यह अधिनियम तलाक, बिद्दत और मुस्लिम पति द्वारा दिए गए किसी भी फौरी तलाक को अमान्य करार देता है और इसे और गैरकानूनी बनाता है।

गोगोई इन एक्शन फैसले दे दनादन

अयोध्या पर ऐतिहासिक फैसला सुनाने के बाद चीफ  जस्टिस रंजन गोगाई ने बुधवार को सीजेआई ऑफिस को आरटीआई दायरे में लाने और कर्नाटक के नाटक पर महत्त्वपूर्ण निर्णय सुनाए। गुरुवार को वह सबरीमाला, राफेल मुद्दे व राहुल गांधी पर दाखिल याचिकाओं पर फैसला सुनाएंगे। 17 नवंबर को रिटायरमेंट से ठीक पहले वह सभी महत्त्वपूर्ण लंबित मुद्दों को निपटाते जा रहे हैं...

सबरीमाला पर निपटाएंगे पुनर्विचार याचिकाएं

सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर लगे प्रतिबंध को हटाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सभी आयु की महिलाओं के प्रवेश को अनुमति दी थी। इस फैसले का कई धार्मिक संगठन विरोध कर रहे थे और इसे परंपरा का उल्लंघन करार दिया था। सुप्रीम कोर्ट में फैसले पर पुनर्विचार के लिए कुल 19 रिव्यू पिटिशन दाखिल की गईं, जिन पर गुरुवार को फैसला आना है।

राफेल डील की एसआईटी जांच पर आएगा निर्णय

सुप्रीम कोर्ट ने राफेल खरीद की जांच एसआईटी से कराने की मांग को पहले ही खारिज कर दिया था। बाद में सर्वोच्च अदालत ने कुछ नए तथ्यों के सामने आने के तर्क पर रिव्यू पिटिशन स्वीकार की थी। अब इस मामले पर भी कोर्ट अपना फैसला सुनाने जा रही है।

राहुल पर राफेल विवाद में दायर मानहानि पर भी फैसला

भाजपा सांसद मीनाक्षी लेखी द्वारा राहुल गांधी के खिलाफ  दायर मानहानि केस में भी सुप्रीम कोर्ट अपना फैसला सुना सकती है। पीएम नरेंद्र मोदी के लिए ‘चौकीदार चोर है’ के नारे के प्रयोग को सुप्रीम कोर्ट के फैसले से जोड़ने के खिलाफ  लेखी ने अवमानना याचिका दाखिल की थी। इस मामले में राहुल गांधी की ओर से माफीनामा भी दायर किया गया था, लेकिन अदालत की ओर से कोई राहत नहीं मिली थी।