Friday, December 06, 2019 09:48 PM

सीर में एक्सपर्ट्स करेंगे मॉडल स्टडी

 20 किलोमीटर से ज्यादा दायरा होगा कवर, जल्द होगी डीपीआर तैयार

घुमारवीं बारिश के मौसम में बाढ़ से तबाही मचाने वाली घुमारवीं की सीर खड्ड की चैनेलाइजेशन के लिए मॉडल स्टडी होगी। इसके लिए सीडब्लयूपीआरएस (सेंटर वाटर एंड पावर रिसर्च स्टेशन) पुणे के एक्सपर्ट्स 15 नवंबर को घुमारवीं पहुंचेगे। विशेषज्ञ बम्म से लेकर बलघाड़ तक 20 किलोमीटर से ज्यादा एरिया की मॉडल स्टडी करेंगे। एक्सपर्ट्स की टीम लंबे चौड़े दायरे में फैली सीर खड्ड के तटीकरण की स्टडी करने के बाद रिपोर्ट तैयार करेंगे। रिपोर्ट के आधार पर इसकी डीपीआर बनाई जाएगी। जिसके बाद फंडिंग के लिए फ्लड मैनेजमेंट प्रोग्राम भारत सरकार को भेजा जाएगा। घुमारवीं की सीर खड्ड में बारिश के मौसम में बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है। बाढ़ से यहां पर हर साल तबाही मचती है। अभी तक जाहू से लेकर बम्म तक पांच किलोमीटर दायरे में दोनों तरफ  सीर खड्ड का तटीकरण किया गया है। क्योंकि इस एरिया में हर वर्ष बरसाती मौसम में बाढ़ के दौरान होने वाले भू-कटाव में किसानों की सैकड़ों बीघा उपजाऊ जमीन बर्बाद होती थी। बरसात शुरू होते ही किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें झलक जाती। सीर खड्ड के चैनेलाइजेशन के लिए विधानसभा से लेकर सड़कों तक बुलंद होने लगी और 1990 में तत्कालीन भाजपा विधायक कर्म देव धर्माणी ने इस मुद्दे को जोर-शोर से विधानसभा में उठाया था। इस पर संज्ञान भी लिया गया और चैनेलाइजेशन को लेकर योजना बनाने के लिए निर्देश हुए। दरअसल, जाहू से लेकर घुमारवीं तक सीर खड्ड के किनारे सैकड़ों बीघा किसानों की उपजाऊ भूमि हर साल बाढ़ से बर्बाद होती है। सीर खड्ड में जाहू से बम्म तक पांच किलोमीटर तक 1426.54 लाख रुपए से चैनेलाइजेशन किया गया है। मगर बम्म से नीचे घुमारवीं और इससे आगे झंडूता हलके के बलघाड़ तक चैनेलाइजेशन न होने के कारण यहां पर सीर खड्ड का खतरा बरकरार है। इससे बारिश का मौसम शुरू होने से पहले ही यहां पर लोगों में भय सताने लगता है। ताजा स्थिति में आईपीएच विभाग घुमारवीं की ओर से सीर खड्ड के शेष बचे दायरे को कवर करने के मद्देनजर मॉडल स्टडी करवाई जाएगी। इसके लिए पुणे सेंटर के विशेषज्ञ 15 नवंबर तक घुमारवीं पहुंच जाएंगे। स्टडी करने के बाद एक्सपर्ट्स रिपोर्ट तैयार करेंगे। इसके आधार पर अगली कार्ययोजना को अंतिम रूप दिया जाएगा। अहम बात यह है कि जब तक बम्म से लेकर घुमारवीं होते हुए झंडूता के बलघाड़ तक सीर खड्ड का चैनेलाइजेशन नहीं हो जाता है, तब तक हर साल बरसात किसानों की जमीन पर कहर बरपाती रहेगी। बताते चलें कि आईपीएच विभाग की बम्म से लेकर जाहू तक पांच किलोमीटर दायरा कवर करने के बाद अब बम्म से आगे घुमारवीं होते हुए झंडूता उपमंडल के बलघाड़ तक के दायरे में सीर खड्ड का तटीकरण करने की योजना है। इसके लिए पहले मॉडल स्टडी करवाई जाएगी।  स बारे पुणे सेंटर से एक्सपर्ट्स 15 नवंबर तक घुमारवीं पहुंच जाएंगे। वहीं, एक्सईएन आईपीएच घुमारवीं ई. सतीश शर्मा ने कहा कि सीर खड्ड का चैनेलाइजेशन किया जाएगा। इसके लिए पहले मॉडल स्टडी करवाई जाएगी। इसके लिए पुणे सेंटर से एक्सपर्ट्स 15 नवंबर तक घुमारवीं पहुंच जाएंगे। जोकि स्टडी कर रिपोर्ट तैयार करेंगे।

सीर खड्ड हर साल बहा ले जाती है करोड़ों

सीर खड्ड बारिश के मौसम में हर साल करोड़ों रुपए की संपदा बहाकर ले जाती है। सीर खड्ड पर बनी आईपीएच विभाग की योजनाओं को काफी नुकसान पहुंचता है। खड्ड के किनारे लोगों की सैकड़ों बीघा उपजाऊ भूमि बह जाती है। बाढ़ की तबाही से बचने के लिए पहले खड्ड का चैनेलाइजेशन किया जाएगा। इसके लिए आईपीएच विभाग पहले इसकी मॉडल स्टडी करवाएगा।सीर ने 2007-2014 में मचाई थी तबाही

सीर खड्ड में बाढ़ से बारिश के मौसम में साल 2007 तथा 2014 में काफी तबाही मचाई थी। बाढ़ के कारण मकान तथा गोशालाएं बह गई थी। इसमें कुछ लोगों की जान भी चली गई थी। सैकड़ों बीघा उपजाऊ भूमि तथा जाहू के समीप पुल बाढ़ की चपेट में आ गया था। लोग आज भी उन भयंकर रातों को याद कर सिरह जाते हैं।