Sunday, July 21, 2019 12:12 AM

सुधार की राह पर नया बजट

डा. जयंतीलाल भंडारी

विख्यात अर्थशास्त्री

 

निश्चित रूप से यह लोकलुभावन बजट नहीं है। यह विकास केंद्रित बजट है। यद्यपि वित्त मंत्री ने सुधार की राह पर चलने वाला बजट प्रस्तुत किया है, जिसमें कठोर आर्थिक सुधार भी दिखाई दे रहे हैं, लेकिन यदि वित्त मंत्री पेट्रोल और डीजल पर एक-एक रुपए की एक्साइज ड्यूटी और सेस नहीं बढ़ाती तथा नौकरीपेशा आयकरदाताओं को कुछ और आय कर राहत देतीं, तो इससे देश के करोड़ों लोगों को बजट से और अधिक खुशियां मिल सकती थीं...

यकीनन वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के द्वारा प्रस्तुत वर्ष 2019-20 का बजट उनकी राजनीतिक सूझबूझ और आर्थिक दूरदर्शिता को रेखांकित करता है। निश्चित रूप से यह लोकलुभावन बजट नहीं है। यह विकास केंद्रित बजट है। इस बजट के माध्यम से वित्त मंत्री ने जहां आम आदमी के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने की रणनीति प्रस्तुत की है, वहीं नई मांग के निर्माण से रोजगार बढ़ाने की रूपरेखा भी प्रस्तुत की है। निश्चित रूप से यह बजट गांव, गरीब, किसान, युवा तथा बुनियादी ढांचे पर केंद्रित होकर वैश्विक सुस्ती के बीच अर्थव्यवस्था को गतिशील करने की रणनीति को रेखांकित कर रहा है। मोदी-2 सरकार द्वारा वर्ष 2024 तक पांच ट्रिलियन डालर यानी 350 लाख करोड़ रुपए वाली भारतीय अर्थव्यवस्था का जो चमकीला सपना सामने रखा गया है, उस सपने को साकार करने की दिशा में नया बजट कदम आगे बढ़ाते हुए दिखाई दिया है। नए बजट में कृषि क्षेत्र की जरूरतों को पूरा करने को सरकार ने उच्च प्राथमिकता दी है।

वर्ष 2019-20 के नए बजट में गांव में हर घर तक पीने का पानी पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके मद्देनजर 1500 ब्लॉकों की पहचान की गई है। 2024 तक हर गांव में पीने के पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए जल संरक्षण अभियान चलाने की बात बजट में कही गई है। अन्नदाता को ऊर्जादाता बनाने का लक्ष्य नए बजट में रखा गया है। दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए डेयरी कामों को बढ़ावा देने के लिए प्रावधान बजट में किए गए हैं। 10 हजार नए किसान उत्पादन संघ बनाने की बात बजट में कही गई है। बजट में वर्ष 2022 तक प्रत्येक गांव में बिजली पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। ऐसे इन प्रावधानों से ग्रामीण बुनियादी ढांचा मजबूत होगा और गांव तथा किसानों की खुशियां बढेंगी। नए बजट में वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता, महिला सुरक्षा और बच्चों के पोषण पर ध्यान देते हुए दिखाई दी हैं। नए बजट में कहा गया है कि शीघ्र ही नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति लाई जाएगी। नई शिक्षा नीति में रिसर्च पर ज्यादा जोर होगा। नेशनल रिसर्च फाउंडेशन बनाए जाएंगे। उच्च शिक्षा के लिए 400 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया। बजट में  ‘भारत में अध्ययन’ कार्यक्रम शुरू करने की घोषणा की गई है, जो उच्च शिक्षा के लिए विदेशी छात्रों को भारत लाने पर ध्यान केंद्रित करेगा। इसके साथ ही बजट का एक चमकीला पक्ष युवाओं के कौशल विकास का है। एक करोड़ युवाओं को ऐसा कौशल प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे वे देश की रोजगार जरूरतों के अनुरूप बन सकें। साथ ही दूसरे देशों में कौशल विकास के कारण अच्छे रोजगार के अवसर भी प्राप्त कर सकें।

वित्त मंत्री ने छोटे कारोबार, छोटे उद्योग और श्रमिकों के कल्याण पर भी ध्यान दिया है। वित्त मंत्री ने तीन करोड़ छोटे दुकानदारों को पेंशन देने का ऐलान किया है। 59 मिनट में छोटे दुकानदारों को लोन देने की योजना भी बजट में प्रस्तावित की गई है। इतना ही नहीं, बजट में महिलाओं के विकास से अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए प्रावधान भी हैं। जिस महिला का जन-धन अकाउंट है और जो सेल्फ हेल्प ग्रुप में वैरिफाइड है, उसे पांच हजार रुपए की ओवरड्राफ्ट की सुविधा देने की घोषणा बजट में की गई है। नए बजट के तहत वित्त मंत्री निम्न मध्यमवर्गीय लोगों को लाभांवित करते हुए दिखाई दी हैं, लेकिन उच्च मध्यम वर्गीय लोगों को बजट से आय कर राहत नहीं दी है। नए बजट में पांच लाख रुपए तक की आय पर टैक्स नहीं लगाए जाने का प्रावधान है। इसके साथ ही आय कर की विभिन्न स्लैबों के तहत कोई अतिरिक्त राहत नहीं दी गई है। वित्त मंत्री ने अब 45 लाख रुपए तक का घर खरीदने पर ब्याज में 3.5 लाख रुपए की छूट दी है। इसके अलावा 2.5 लाख रुपए तक का इलेक्ट्रिक व्हीकल खरीदने पर भी छूट दी गई है। नए बजट में सोने पर शुल्क 10 फीसदी से बढ़ाकर 12.5 फीसदी कर दिया गया है। तंबाकू पर भी अतिरिक्त शुल्क लगाया गया है। पेट्रोल-डीजल पर 1-1 रुपए का अतिरिक्त सेस तथा एक्साइज ड्यूटी लगाई गई है। बजट में कहा गया है कि स्टार्टअप के लिए जुटाए फंड पर इन्कम टैक्स जांच नहीं की जाएगी। वित्तमंत्री ने दो से पांच करोड़ रुपए सालाना कमाने वालों पर तीन फीसदी सरचार्ज लगाया है, वहीं पांच करोड़ रुपए से अधिक कमाने पर सात फीसदी सरचार्ज देना होगा। वास्तव में देश में बढ़ती हुई आर्थिक असमानता के मद्देनजर यह एक बड़ा कदम है। ऑक्सफेम की नई रिपोर्ट के अनुसार भारत में प्रतिवर्ष जितनी संपत्ति निर्मित हो रही है, उसका 73 फीसदी मात्र एक फीसदी सबसे धनी लोगों के पास पहुंच रहा है। नए बजट में बुनियादी ढांचे को प्राथमिकता दी गई है। अगले 5 वर्षों में इंफ्रास्ट्रचर में 100 लाख करोड़ रुपए का निवेश करने की बात कही गई है, जिससे अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित करने में मदद मिलेगी।

छोटे उद्योगों के लिए सस्ता कर्ज और कॉरपोरेट टैक्स में राहत भी दिखाई दी है। नए बजट में एफडीआई के माध्यम से विदेशी निवेश के महत्त्वपूर्ण कदम रखे गए हैं। नए बजट में रेलवे के बुनियादी ढांचे के लिए पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) की रणनीति पर बल दिया गया है। वित्त मंत्री ने कहा कि सरकारी बैंकों की संख्या घटाकर आठ की जाएगी। बैंकों को 70 हजार करोड़ रुपए दिए जाएंगे। इससे बैंकों की स्थिति सुधरेगी और बैंक अर्थव्यवस्था को गतिशील करने में योगदान देंगे। यद्यपि वित्त मंत्री ने सुधार की राह पर चलने वाला बजट प्रस्तुत किया है, जिसमें कठोर आर्थिक सुधार भी दिखाई दे रहे हैं, लेकिन यदि वित्त मंत्री पेट्रोल और डीजल पर एक-एक रुपए की एक्साइज ड्यूटी और सेस नहीं बढ़ाती तथा नौकरीपेशा आयकरदाताओं को कुछ और आय कर राहत देतीं, तो इससे देश के करोड़ों लोगों को बजट से कुछ और अधिक खुशियां मिल सकती थीं।

इसमें कोई दोमत नहीं है कि बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अर्थव्यवस्था को गतिशील बनाए रखने के लिए एक ओर आम आदमी की क्रय शक्ति बढ़ाने के लिए ग्रामीण विकास, बुनियादी ढांचा और रोजगार बढ़ाने वाली सार्वजनिक परियोजनाओं पर व्यय बढ़ाया है, वहीं दूसरी ओर उद्योग-कारोबार के चेहरे पर मुस्कराहट देने के लिए उपयुक्त राहतकारी बजट प्रावधान भी किए हैं। हम आशा करें कि वर्ष 2019-20 के नए पूर्ण बजट में मोदी-2 सरकार ने जो कदम उठाए हैं, उससे अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। हम आशा करें कि बजट में किए गए उन प्रावधानों से वर्ष 2019-20 तक भारत वैश्विक अध्ययन रिपोर्टों को साकार करते हुए दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था भी बन जाए।